HomeBIHARमोतिहारीअन्नदाता के सम्मान के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा : कुलपति

अन्नदाता के सम्मान के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा : कुलपति

-आईसीएआर का मना 12वां स्थापना दिवस

-किसान व वैज्ञानिक हुए सम्मानित

माला सिन्हा

पीपराकोठी : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान ने शुक्रवार को अपना 12वां स्थापना दिवस मनाया. कार्यक्रम का शुभारंम परिसर में स्थापित महात्मा गांधी सहित अन्य महापुरुषों के प्रतिमा को माल्यार्पण व आगत अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर किया गया. कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य अतिथि बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डा दिनेश चंद्र राय, आईसीएआर पटना डा संजीव कुमार, डा विकास दास निदेशक डा राघवेंद्र सिंह, डीन डा कुंदन किशोर, एसएसबी कमानडेंट प्रफुल कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन व केक काटकर किया. इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कुलपति श्री राय ने कृषि क्षेत्र की बदलती चुनौतियों के संदर्भ में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और किसानों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया. कहा कि जब हमारे देश की आबादी 30 करोड़ थी. भूमि बड़े थे तब हमारे देश के लोग को भरपेट भोजन नहीं मिल पाता था और आज इसी विज्ञान अनुसंधान के बदौलत हमारे अन्नदाता 150 करोड़ आबादी को पोषणयुक्त भोजन दें रहे है. लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारे अन्नदाता को सही सम्मान नहीं मिल पा रहा है. जबतक किसानों को उचित सम्मान नहीं मिल जाता तबतक विकसित भरत का सपना अधूरा ही रहेगा. उन्होंने मौजूद किसानों से वैज्ञानिकों से सहयोग लेकर बेहतर खेती करने की अपील की. कहा कि हम बिहारियों का सौभाग्य है कि यहां सोने जैसे मिट्टी और अमृत जैसा पानी है. बस जरूरत है इसका सदुपयोग करने की. वहीं निदेशक डा राघवेंद्र सिंह ने शामेकित कृषि से संबंधित जानकारी देते हुए किसानों को लाभ उठाने की बात कही. आगे उन्होंने कहा कि यह संस्थान विज्ञान के माध्यम से अपने वैज्ञानिकों द्वारा बेहतर कार्य कर रही है. और अगले पांच वर्षों के विजन को भी ध्यान रख कर कार्य कर रहा है. कहा कि यह संस्थान आज अपना सफलता पूर्वक 12वां वर्षगांठ मना रहा है. उन्होंने उत्तर बिहार की बाढ़ एवं जलजमाव जैसी विशिष्ट कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए समेकित कृषि प्रणाली, फसल–मत्स्य–पशुधन आधारित मॉडल, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, तकनीकी नवाचार एवं किसान-केंद्रित अनुसंधान को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास अनुसंधान को केवल प्रयोगशाला और प्रक्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय किसानों के खेत तक पहुंचाना तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित टिकाऊ एवं लाभकारी आजीविका मॉडल विकसित करना है. मंच संचालन शैलेश कुमार सिंह ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधान वैज्ञानिक डा एसके पुर्वे ने किया. मौके पर मुख्य रूप से डा विकाश दास, केविके प्रमुख डा अरविन्द कुमार सिंह, डा राकेश कुमार, प्रगतिशील किसान व सेवानिवृत सैनिक राजेश कुमार, एफपीओ के चेयरमेन दुर्गा सिंह, यतीन्द्र कश्यप, डॉ. राकेश कुमार, आईसीए आर ,पटना, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुख, डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, माधोपुर, डॉ. अभय प्रताप सिंह, परसौनी, डॉ. आर. पी. सिंह, डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी, सहित सहायक निदेशक उद्यान, जिला पशुपालन पदाधिकारी, आत्मा के परियोजना निदेशक, पिपराकोठी के एरिया मैनेजर, कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि तथा प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया.

सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व एसएसबी का मूल मंत्र : कमानडेंट

फोटो : संबोधित करते एसएसबी के कमानडेंट प्रफुल कुमार

माला सिन्हा

पीपराकोठी : आईसीएआर के स्थापना दिवस के अवसर पर एसएसबी के कमानडेंट प्रफुल कुमार ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा सही हांथो में होतो देश सुरक्षित रहेगा. एसएसबी हमेशा सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व के आदर्श पर चलती है. नेपाल से हमारा फ्रेंडली संबंध है, और एसएसबी को नेपाल सीमा पर लगाया गया है. कहा कि एसएसबी सीमा की सुरक्षा के साथ जनसरोकार से जुडी समस्या का निदान करता है. युवाओं कौशल विकास हेतु तरह तरह के प्रशिक्षण देकर उन्हें दक्ष करने का काम कर रहा है.

किसान व वैज्ञानिक हुए पुरस्कृत

फोटो : पुरस्कार पाते किसान

माला सिन्हा

पीपराकोठी : आईसीएआर के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रगतिशील किसान, आईसीएआर के वैज्ञानिक, एफपीओ के चेयरमेन सहित अन्य को प्रसस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया. जिसमें पपाया मैन सेवानिवृत सैनिक राजेश कुमार, पन्नालाल दास, अन्नुलाल, हरिहर दास, कृष्ण कुमार, रीना देवी, अंशु कुमार, रत्नेश कुमार, मनोज सिंह, एफपीओ के चेयरमैन दुर्गा सिंह, पीपराकोठी, दिब्य दर्शनी कोटवा, महारानी श्वेता शरण, वैज्ञानिक डा कौशिक बनर्जी, विवेक कुमार, रौशन कुमार, विशाल कुमार, विष्णु काजी, आदि के नाम शामिल है.

छह महत्वपूर्ण पुस्तकों का हुआ विमोचन

फोटो : विमोचन करते अतिथि

माला सिन्हा

पीपराकोठी : समारोह के दौरान संस्थान के छह महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया. इनमें ऐनुअल रिपोर्ट 2025, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर, मैन्युअल फॉर सेंट्रल लबोरटरी फैसिलिटी, जलजमाव क्षेत्र के छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका वृद्धि हेतु बकरी आधारित समेकित कृषि प्रणाली; वर्षा जल संचयन और जल संसाधन प्रबंधन: एक मार्गदर्शिका–जल का मूल्य, कृषि का भविष्य; टेकिंग साइंस टो फार्मर्स द विकसित कृषि संकल्प अभियान –2025; तथा खेत बचाओ अभियान, टेस्ट बिफोर यू इन्वेस्ट – द खेत बचाओ अभियान स्टोरी फ्रॉम बिहार शामिल हैं.

spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular