टीम ने आइस क्रीम का नमूना जांच के लिए पटना भेजा।
जाँच मे मिला फर्जी लेबल लगाकर चल रही थी फैक्ट्री।
फ़ूड इंस्पेक्टर ने कहा, बगैर लाइसेंस का फैक्ट्री चलाने वाले के विरुद्ध होंगी कार्रवाई।
देशवाणी। आशा कुमारी
मोतिहारी।
हरसिद्धि थाना क्षेत्र के गायघाट हाई स्कूल के गेट पर आइसक्रीम खाने से बच्चों के बीमार होने की घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन (सीएस) सहित अन्य अधिकारियों ने शनिवार को जांच कराई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने पुलिस द्वारा जब्त किए गए आइसक्रीम के ठेले से नमूना संग्रह किया। साथ ही बच्चों द्वारा खाई गई आइसक्रीम के रैपर का ठेले में रखी आइसक्रीम से मिलान किया। दोनों के एक समान पाए जाने की बात सामने आई है।
इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी कोटवा थाना क्षेत्र के कररिया गांव पहुंचे, जहां बेस्ट चॉइस आइसक्रीम की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। पुलिस की मौजूदगी में फैक्ट्री में रखी सभी आइसक्रीम को नष्ट करा दिया गया। जांच के दौरान सामने आया कि फैक्ट्री संचालक बिना लाइसेंस के फर्जी लेबल लगाकर आइसक्रीम का निर्माण कर रहा था।
फैक्ट्री का संचालन माधोपुर मधुमालत निवासी रंजीत प्रसाद गुप्ता के पुत्र मासूम कुमार द्वारा किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जब्त आइसक्रीम का नमूना जांच के लिए पटना स्थित प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी तरीके से आइसक्रीम फैक्ट्री संचालित करने वाले संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
होंठ चिपकने से मचा था हड़कंप
गौरतलब है कि शुक्रवार को गायघाट हाई स्कूल के गेट के पास एक विक्रेता आइसक्रीम बेचने पहुंचा था। इसी दौरान आइसक्रीम खाने के बाद करीब आधा दर्जन बच्चों के होंठ आपस में चिपक गए थे। बच्चों के होंठ जबरन छुड़ाने के दौरान खून निकलने की बात भी सामने आई थी। घटना के बाद परिजन बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले गए। सूचना मिलने पर पुलिस ने आइसक्रीम बेचने वाले को पकड़ लिया और ठेला जब्त कर लिया था। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। अब आइसक्रीम के नमूने की लैब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बच्चों के होंठ चिपकने के पीछे क्या कारण था।



