माला सिन्हा
तिरहुत कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, ढोली के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव रावे कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने शनिवार को वाटगंज एवं बरकुरवा गांवों का भ्रमण कर किसानों से संवाद किया तथा किसान सर्वेक्षण किया. विद्यार्थियों ने किसानों से फसल उत्पादन, फसल चक्र एवं स्थानीय फसल प्रणाली से संबंधित जानकारी प्राप्त की और कृषि से जुड़ी उनकी समस्याओं एवं अनुभवों को समझा. इसके पश्चात विद्यार्थियों ने भरथुइया गांव में आयोजित दलहन समूह अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण (क्लस्टर फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन) कार्यक्रम के अंतर्गत समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन गतिविधि में भाग लिया. कार्यक्रम का मार्गदर्शन डॉ. अर्पिता नालिया मैम ने किया. इस दौरान विद्यार्थियों ने किसानों के साथ संवाद करते हुए खेत में उर्वरकों के संतुलित एवं उचित उपयोग के महत्व पर चर्चा की. किसानों को बताया गया कि उर्वरकों का आवश्यकता से अधिक या असंतुलित उपयोग मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों को प्रभावित कर सकता है. साथ ही, किसानों की कृषि संबंधी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान किया गया. विद्यार्थियों ने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन के महत्व, फसल में कीट एवं रोगों की रोकथाम के लिए विभिन्न उपायों के समन्वित उपयोग तथा फसल चक्र अपनाने के लाभों के बारे में किसानों को जानकारी दी. इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद एवं व्यावहारिक कृषि ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला.



