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Friday, January 30, 2026
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देशहित बनाम राजनीति: “जनसंख्या से ज्यादा आधार व वोटर ? फिर भी मतदाता सूची शुद्धिकरण पर विवाद क्यों

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पटना से जितेन्द्र कुमार सिन्हा की रिपोर्ट|

बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। अब तक लगभग अस्सी प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपने गणना प्रपत्र जमा कर दिए हैं। बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने इस बात पर जोर दिया है कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान को लेकर लोगों में अधिक सक्रियता देखी जा रही है।

सबसे पहले, मतदाता सूची में 80% प्रपत्रों का जमा होना निश्चित रूप से लोगों में उत्साह और जागरूकता को दर्शाता है। यह एक सकारात्मक संकेत है कि नागरिक अपने मताधिकार के प्रति गंभीर हैं और मतदाता सूची को अद्यतन करने में सहयोग कर रहे हैं।

दूसरा बिंदु, “जनसंख्या से ज्यादा आधार व वोटर मिल रहे हैं।” यह एक गंभीर आरोप है और अगर यह बात सही है तो इसकी गहन जांच होनी चाहिए। मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता, खासकर यदि उसमें अवैध नागरिकों (जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या मुसलमानों) के नाम शामिल होने की बात है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है। इस तरह की विसंगतियों को दूर करना अत्यंत आवश्यक है ताकि केवल वैध भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकें।

तीसरा बिंदु, विपक्ष, विशेषकर तेजस्वी यादव द्वारा इस पुनरीक्षण का विरोध करना, चिंता का विषय हो सकता है, खासकर यदि वाकई अवैध नामों को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्ष का काम सरकार के कार्यों पर नजर रखना और जवाबदेही तय करना है, लेकिन यदि देशहित में चल रहे किसी अभियान का विरोध केवल राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है, तो यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

जानकारों की यह राय कि “देशहित में चल रहे अभियान का राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन करना चाहिए” बिल्कुल सही है। मतदाता सूची का शुद्धीकरण और उसमें से अवैध नामों को हटाना किसी भी राजनीतिक दल के हित से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित का मामला है। एक स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची निष्पक्ष चुनावों और सुदृढ़ लोकतंत्र की नींव होती है।

निष्कर्ष:

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण में लोगों की भागीदारी सराहनीय है।
  • जनसंख्या से अधिक आधार और वोटर मिलने का आरोप गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि अवैध नाम पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए।
  • विपक्ष को ऐसे मुद्दों पर रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए और यदि वाकई अवैध नामों को हटाया जा रहा है तो देशहित में इसका समर्थन करना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक विरोध के लिए विरोध करना।
  • देशहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सर्वसम्मति से कार्य करना लोकतंत्र के लिए हितकारी होता है।

श्री गुंजियाल ने बताया कि जो मतदाता 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली अस्थायी सूची में अपना नाम शामिल कराना चाहते हैं, उन्हें, भले ही उनके पास वोटर कार्ड पहले से ही क्यों न हो, ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म भरना होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता के पास तत्काल आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं, तो वे फिलहाल गणना प्रपत्र जमा कर सकते हैं। इन आवश्यक दस्तावेज़ों को जमा करने के लिए मतदाताओं को 30 अगस्त तक का समय दिया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आगे जानकारी दी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दूसरे चरण में, 20 जुलाई से बूथ लेवल अधिकारी (BLO) एक बार फिर घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना फॉर्म एकत्र करेंगे। इसी कड़ी में, गणना प्रपत्र जमा करने की सुविधा के लिए आज सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है।


तेजस्वी यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठाए सवाल, लगाए गड़बड़ी के आरोप

एक तरफ जहां मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पूरे ज़ोरों पर है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने इस प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों में लचीलापन लाने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद चुनाव आयोग ने अभी तक कोई औपचारिक संशोधित अधिसूचना जारी नहीं की है। उनके इस बयान ने पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण: 80% से अधिक लोगों ने जमा किए प्रपत्र, तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल

मुख्य बातें:

  • पुनरीक्षण में उत्साह: बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में अब तक 80% से अधिक लोगों ने गणना प्रपत्र जमा कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में अधिक उत्साह देखा जा रहा है।
  • दस्तावेज़ और समय-सीमा: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली अस्थायी सूची में नाम शामिल कराने के लिए वोटर कार्ड धारकों को भी आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म भरना होगा। दस्तावेज़ न होने पर गणना प्रपत्र जमा किया जा सकता है और दस्तावेज़ जमा करने के लिए 30 अगस्त तक का समय मिलेगा।
  • दूसरा चरण: अभियान के दूसरे चरण में 20 जुलाई से बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर गणना फॉर्म एकत्र करेंगे।
  • विशेष शिविर: आज सभी मतदान केंद्रों पर गणना प्रपत्र जमा करने के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
  • तेजस्वी यादव का आरोप: राजद नेता तेजस्वी यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बावजूद चुनाव आयोग ने अभी तक कोई औपचारिक संशोधित अधिसूचना जारी नहीं की है।

Nation’s Interest vs. Politics: More Aadhaar & Voters Than Population? Why the Controversy Over Electoral Roll Purification?

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