रक्सौल।अनिल कुमार। रेलवे द्वारा रक्सौल में लंबे समय से प्रस्तावित आरओबी 33A का लेआउट प्लान प्रेषित करने के लिए धन्यवाद देते हुए शिक्षाविद् डॉ. स्वयंभू शलभ ने इस योजना के शुभारंभ की पहल का स्वागत किया है। साथ ही वर्तमान लेआउट प्लान में कुछ जरूरी संशोधन किए जाने का आग्रह भी किया है ताकि यह ओवरब्रिज और अधिक उपयोगी सिद्ध हो सके।
डॉ. शलभ ने रेलवे बोर्ड एवं पूर्व मध्य रेलवे को बताया है कि रक्सौल में आरओबी के निर्माण के दौरान यहाँ की यातायात व्यवस्था, रेलवे स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय सीमा की कनेक्टिविटी को एक साथ देखने की जरूरत है क्योंकि रक्सौल रेलवे स्टेशन भारत और नेपाल के बीच आवागमन एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों, पर्यटकों, व्यापारियों और नेपाल आने-जाने वाले लोगों का आवागमन होता है।
प्रेषित प्रस्ताव के पहले बिंदु में उल्लेख किया गया है कि इस प्लान में स्टेशन रोड के पास फ्लाईओवर से नीचे उतरने के लिए केवल सीढ़ी दी गई है जो पर्याप्त नहीं है। प्रस्ताव में स्टेशन रोड की तरफ जाने के लिए एक अतिरिक्त ब्रांच रोड दिये जाने का सुझाव दिया गया है।
इस संदर्भ में एक अन्य विचारणीय विकल्प यह भी बताया गया है कि उत्तर साइड से आनेवाले फ्लाईओवर को सीधे स्टेशन रोड की तरफ उतारा जाय और दक्षिण तरफ एक छोटी दूरी का ब्रांच रोड बाटा चौक या आश्रम रोड के आसपास उतारा जाय। इससे ट्रैफिक लोड बंट जाएगा और जाम की समस्या भी खत्म होगी। साथ ही साथ इस ओवरब्रिज निर्माण का मुख्य उद्देश्य जो रेलवे गेट 33A पर लगने वाले जाम से राहत दिलाना है वह भी पूरा हो जाएगा।
प्रस्ताव के दूसरे बिंदु में कहा गया है कि लेआउट प्लान में आरई वाल की लंबाई उत्तर की तरफ 83 मीटर और दक्षिण की तरफ 214 मीटर बताई गई है। दक्षिण की तरफ वाल की लंबाई जो 214 मीटर है उसे कम किए जाने की संभावना पर विचार किए जाने का सुझाव दिया गया है ताकि पोस्ट ऑफिस रोड और बैंक रोड जो रक्सौल बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा है प्रभावित न हो।
प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रक्सौल में आईसीपी बाईपास निर्माण के बाद भारी वाहनों की आवाजाही आईसीपी सड़क से ही होती है। एलसी 33 A की सड़क जिसके ऊपर आरओबी का निर्माण होना है पब्लिक और हल्के वाहनों के लिए है।



