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रक्सौल में ‘आनन्द आश्रम’ का शुभारंभ, बेसहारा बुजुर्गों को मिलेगा रोटी, कपड़ा, आवास और दवा का सहारा

रक्सौल।अनिल कुमार।रक्सौल में समाज सेवा की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए रविवार को ‘बुजुर्ग आनन्द आश्रम’ का शुभारंभ किया गया। फीता काटकर आश्रम का उद्घाटन बिमल सर्राफ, डॉ. सुशील कुमार सिंह, बबन प्रसाद एवं उर्मिला देवी ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर जितेंद्र दत्ता, अजय बादल अम्बुज गुप्ता, साबरा खातुन, श्वेता श्रीवास्तव, परमानन्द तिवारी एवं नेहा श्रीवास्तव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

आनन्द आश्रम शुरू करने का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों को सहारा देना है, जो परिवार से बिछड़ जाने, अपनों की उपेक्षा अथवा आर्थिक तंगी के कारण बेसहारा जीवन जीने को मजबूर हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव में जिन बुजुर्गों के पास रहने के लिए घर नहीं है और जो भोजन तथा दवाओं के लिए दूसरों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह आश्रम उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आया है।

बुजुर्गों को मिलेगा भोजन, वस्त्र, आवास और दवा

आश्रम के माध्यम से जरूरतमंद बुजुर्गों को रोटी, कपड़ा और आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ आवश्यक दवाओं एवं स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा, अपनापन और बेहतर जीवन प्रदान करना भी है।

आज भी कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जो कभी अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। लेकिन उम्र ढलने और शरीर कमजोर होने के बाद कुछ बुजुर्गों को स्टेशन, मंदिरों के आसपास, सड़कों और फुटपाथों पर जीवन गुजारना पड़ता है। उनके पास न नियमित आय होती है, न संचित धन और न ही भोजन एवं इलाज की समुचित व्यवस्था।

ऐसी परिस्थितियों में आनन्द आश्रम की पहल समाज के सामने मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश प्रस्तुत करती है।

‘बुजुर्ग बोझ नहीं, हमारे समाज की धरोहर हैं’

आश्रम की मूल भावना है कि बुजुर्गों को बोझ नहीं, बल्कि समाज की धरोहर और अनुभव का मार्गदर्शक माना जाए। जिस उम्र में उन्हें परिवार के स्नेह, सम्मान और देखभाल की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, उस समय उन्हें अकेला छोड़ देना एक गंभीर सामाजिक चिंता है।

आश्रम के माध्यम से जरूरतमंद बुजुर्गों की देखभाल, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति और यथासंभव परिवार से पुनर्मिलन कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

समाज के सहयोग से साकार होगा सेवा का संकल्प

आनन्द आश्रम की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, व्यवसायियों, सामाजिक संगठनों और दानदाताओं से सहयोग की अपील की गई है। बुजुर्गों के भोजन, कपड़े, बिस्तर, दवा और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में जनसहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आश्रम की यह पहल संदेश देती है कि समाज की असली पहचान केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है।

आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि कोई बुजुर्ग भूखा न सोए, बेघर न रहे और दवा के अभाव में पीड़ा न सहे। आपका छोटा-सा सहयोग किसी बुजुर्ग के जीवन में आशा, सम्मान और मुस्कान ला सकता है।

फोटो -रक्सौल में ‘आनन्द आश्रम’ का शुभारंभ, बेसहारा बुजुर्गों को मिलेगा रोटी, कपड़ा, आवास और दवा का सहारा

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