देश वाणी। हृदयानन्द सिंह यादव।
बेतिया। गीतों के राजकुमार एवं कविवर गोपाल सिंह नेपाली जी की 115वीं जयंती उनके निवास स्थान के निकट कविवर गोपाल सिंह नेपाली पथ स्थित उनकी भव्य प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा एवं भावुकता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कविवर के परिजनों, चंपारण के युवा साहित्यकारों एवं समाजसेवियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पवर्षा कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान अपने पूज्य चाचा कविवर गोपाल सिंह नेपाली से जुड़े संस्मरणों को याद करते हुए उनकी भतीजियों सविता सिंह नेपाली एवं चमन सिंह नेपाली की आंखें नम हो गईं। परिजनों की भावुकता देखकर वहां उपस्थित साहित्यप्रेमी और गणमान्य लोग भी भावुक हुए बिना नहीं रह सके।
जयंती समारोह को संबोधित करते हुए संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र शरण ने कहा कि कविवर गोपाल सिंह नेपाली की कविताएं कालजयी हैं। आज के युवाओं को यदि अपने जीवन की सही दिशा निर्धारित करनी है तो उन्हें नेपाली जी के साहित्य एवं विचारों को आत्मसात करना होगा। उनकी रचनाओं का अध्ययन जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाता है।
वहीं, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि नंद कुमार आदित्य ने कविवर की जयंती पर सरकार की उदासीनता पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस कवि ने अपनी कलम को स्वाधीन बनाया, उनके पैतृक घर तक को उनसे छीन लिया गया और सरकार आज भी मौन है। नेपाली जी की पंक्ति “बदनाम रहे बंटवार, मगर घर तो रखवालों ने लूटा” को दोहराते हुए वे भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि सरकार अपने ही सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गौरव को भूलती जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
इस अवसर पर सरिता सिंह नेपाली ने युवाओं को राष्ट्रहित से जुड़ने का संदेश देते हुए कविवर नेपाली जी की रचना “नवीन कल्पना करो” की पंक्तियां सस्वर प्रस्तुत कीं—
“हम थे अभी-अभी गुलाम, यह न भूलना,
करना पड़ा हमें सलाम, यह न भूलना।
रोते फिरे उमर तमाम, यह न भूलना,
था फूट का मिला इनाम, यह न भूलना।
बीती गुलामियां न लौट आएं फिर कभी,
भेद न भरो किशोर, भेद न भरो,
तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो।”
कविवर गोपाल सिंह नेपाली की जयंती के अवसर पर सागर पोखरा के अतिरिक्त शहर के विभिन्न स्थानों पर भी विविध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें याद किया गया। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, साहित्यप्रेमियों, समाजसेवियों एवं युवा साहित्यकारों ने भाग लिया।
अंत में नेपाली परिवार के साथ उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने कविवर गोपाल सिंह नेपाली के साहित्य और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।












