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मनोरंजन व आतिथ्य क्षेत्र में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

Shabd AIR HQ, 25 May,

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने बाल अधिकार संगठन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ की जनहित याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मनोरंजन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों में बाल श्रम पर अधिक कड़ाई से रोक लगाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत,न्यायाधीश जोयमाल्य बागची और न्यायाधीश विपुल एम पांचोली की पीठ ने बाल अधिकार समूह ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ द्वारा प्रस्तुत की गयी दलीलों का संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता ने अदालत से ‘परमादेश’ (रिट ऑफ मैंडमस) जारी करने की मांग की है,ताकि केंद्र सरकार को बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम (कैल्शप्रा) की अनुसूची के भाग-ए में ऑर्केस्ट्रा,डांस बार,डांस ट्रूप्स,नौटंकी,मसाज पार्लर,स्पा और सैलून जैसे क्षेत्रों को शामिल करने का निर्देश दिया जा सके।इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन या प्रदर्शन पर स्पष्ट व पूर्ण प्रतिबंध लगाने की गुहार लगायी गयी है।याचिका में अनुसूची के भाग-बी में शामिल प्रविष्टि 52 को भाग-ए में स्थानांतरित करने की भी मांग की गयी है,जो वर्तमान में मसाज पार्लर,जिम,मनोरंजन केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं को कवर करती है।इस बदलाव से इन क्षेत्रों में मौजूदा नियामक व्यवस्था पूरी तरह से निषेध में बदल जाएगी।स्थिति को “गंभीर मुद्दा” बताते हुए शीर्ष अदालत ने एनसीपीसीआर को ऐसे प्रतिष्ठानों में काम करते पाए जाने वाले बच्चों के बचाव (रेस्क्यू) और पुनर्वास के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का भी निर्देश दिया है।

New Delhi | Supreme Court Issued Notice To Centre On PIL Seeking Complete Ban Of Child Labour In Entertainment And Hospitality Sectors

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