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पालतू पशु भी हैं परिवार का हिस्सा, इनकी सुरक्षा हो ज़्यादा, पेट इंश्योरेंस का वादा

लेखक – श्री अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर – कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)

 

भारत में मौजूदा दौर में पालतू पशुओं को अपनाने की संख्या में खासा इज़ाफा देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से पालतू-पशुओं की देखभाल से संबंधित प्रोडक्ट और सेवाओं में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। कुल मिलाकर देखें, तो भारत में साल 2023 में घर में कुत्ता पालने की संख्या में 3.3 करोड़ से अधिक की वृद्धि देखने को मिली। अनुमान यह है कि साल 2028 में यह संख्या 5.1 करोड़ तक पहुंच जाएगी। भले ही बिल्लियां कम संख्या में पाली जाती हैं, लेकिन वर्तमान में बिल्ली पालने के चलन में भी इज़ाफा हुआ है। गौर करें तो पता लगता है कि साल 2024 में यह संख्या लगभग 40 लाख के आंकड़ें को छू गई थी

आज के युग में बड़ी संख्या में पालतू पशुओं को गोद लिया जा रहा है और उन्हें परिवार का सदस्य बनाया जा रहा है। यही वजह है कि पालतू पशुओं के प्रोडक्ट और उनके देखरेख से जुड़े खर्चों में वृद्धि हो रही है। इसके अलावा, राज्य सरकारें भी पालतू पशुओं से जुड़ी पहलों में अच्छा-खासा सहयोग दे रही हैं, जैसे कि तेलंगाना के सिद्धिपेट में मार्स इंडिया द्वारा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में निवेश किया जा रहा है और कर्नाटक सरकार पालतू पशुओं की देखभाल से जुड़े शोध पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

भारत में पालतू पशुओं के इंश्योरेंस यानी कि पेट इंश्योरेंस में तेज़ी से बढ़त हो रही है और देशभर के पशुप्रेमियों के बीच यह बेहद अहम विकल्प बनकर उभरा है। आइए समझें कि आखिरकार आपके पालतू पशु के लिए यह एक अहम निवेश क्यों है?

पालतू पशु के लिए इंश्योरेंस क्यों लें और इसके क्या फायदे हैं?

जिनके पास भी पालतू पशु हैं वे अच्छी तरह से जानते हैं कि पेट इंश्योरेंस दुर्घटना व बीमारी के समय बेहद काम की चीज़ है। पेट पैरेंट जानते हैं कि इसमें न केवल आपको आकर्षक कवरेज मिलता है, बल्कि इस क्षेत्र में भी तेज़ी से वृद्धि हो रही है। पेट इंश्योरेंस एक खास तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी है, जिसमें आपके पेट्स के मेडिकल खर्चों को कवर किया जाता है। जब कभी आपके पेट को कोई बीमारी हो जाती है या दुर्घटना हो जाती है, तो आपको अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ती है और आप पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। इंश्योरेंस न हो तो आपको अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। अगर आपके पास पेट इंश्योरेंस है, तो एक्सीडेंट, बीमारी और फ्रैक्चर के लिए आपको पर्याप्त कवरेज मिलता है, जिसमें सर्जरी से पहले और बाद में इलाज से जुड़े उपयुक्त खर्च शामिल होते हैं। इस पॉलिसी में बीमार होने या दुर्घटना में चोट लगती है, तो पशु चिकित्सालयों में भर्ती होने पर इलाज के लिए हॉस्पिटलाइज़ेशन कवर भी मिलता है। अगर दुर्भाग्यवश एक्सीडेंट या बीमारी की वजह से पालतू पशु की मृत्यु हो जाती है, तो मृत्यु लाभ के तहत इंश्योरेंस की तय राशि का भुगतान किया जाता है, जिसमें शव के अंतिम संस्कार, शव को दफनाने या इसके निपटान के लिए अतिरिक्त ₹3,000 भी दिए जाते हैं। इस पॉलिसी के अंतर्गत आप ओपीडी कवर का भी चयन कर सकते हैं, जिसमें कुछ विशेष बीमारियों के लिए पशु चिकित्सक से कराए गए इलाज के खर्च के लिए ₹30,000 तक रीइम्बर्स किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी देखभाल के साथ-साथ इसमें थर्ड-पार्टी लायबिलिटी कवर भी शामिल है, जिससे कि अगर आपके पालतू पशु की वजह से किसी दूसरे व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुंचती है, संपत्ति का नुकसान होता है, बीमारी होती है या मृत्यु हो जाती है, तो इससे जुड़े खर्चों के लिए कवर मिलता है। इसके साथ ही, मान्य मामलों में कानूनी कार्यवाही के खर्च भी कवर किए जाते हैं।

पशु चिकित्सा पर नियमित रूप से खर्च के बावजूद पेट इंश्योरेंस अहम क्यों है?

आइए इसे ठीक से समझें। भारत में पालतू पशु की देखभाल के लिए आमतौर पर सालाना लगभग ₹10000 खर्च करने पड़ते हैं। और अगर आपके पास पेडिग्री ब्रीड है, तो अक्सर इनके खर्च और भी ज़्यादा होते हैं। इसके अलावा, इनकी ग्रूमिंग के लिए आपको सालाना अतिरिक्त ₹3,000–₹5,000 तक खर्च करने पड़ते हैं। हालांकि ज़्यादातर घरों में ऐसे खर्चों के लिए पहले ही बजट बना लिया जाता है और आपके पालतू पशु की सेहत और नियमित स्वास्थ्य देखभाल में इसकी बेहद अहम भूमिका होती है।

दरअसल असली खर्च तब शुरू होता है, जब कोई इमरजेंसी आ जाती है। अस्पताल में भर्ती करना, सर्जरी, फ्रैक्चर का इलाज या एक्सीडेंट के बाद इलाज और देखभाल जैसे मामलों में पशु मालिकों को अच्छीखासी रकम जमा करनी पड़ती है, जिसके लिए उन्होंने कभी तैयार नहीं की होती है। पेट इंश्योरेंस इस खूबी के साथ तैयार किया गया है कि इसमें अचानक से होने वाले खर्चों के साथ-साथ महंगे इलाज भी कवर किए जाते हैं। इसलिए अचानक से कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो पेट इंश्योरेंस आपको अच्छीखासी आर्थिक सहायता प्रदान करता है इससे पेट पैरेंट हर दिन होने वाले खर्चों की चिंता किए बिना अच्छी तरह से अपने पशु का इलाज करवा पाते हैं।

अपने पालतू पशु के लिए जितनी जल्दी हो सके एक पेट इंश्योरेंस ज़रूर लें, क्योंकि आमतौर पर इसमें उम्र की सीमा होती है और सेहत से जुड़ी बीमारियां किसी भी उम्र में हो सकती हैं। इसके अलावा, पॉलिसी खरीदते समय इस बात पर ज़रूर ध्यान दें कि किस तरह के खर्चों के लिए कवरेज मिल रहा है, कौन सी बातें इसमें शामिल नहीं हैं, वेटिंग पीरियड कितना है और कितना डिडक्टिबल लागू होता है। एक अच्छा पेट इंश्योरेंस वह होता है जिसमें दुर्घटना, बीमारी, सर्जरी, अस्पताल में भर्ती होना, ओपीडी परामर्श और ज़रूरत के अनुसार नस्ल या उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के लिए व्यापक कवरेज शामिल होता है। पारदर्शिता भी बेहद ज़रूरी है। पशु मालिकों को अपने पशु से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी प्रदान करनी चाहिए और पशु के वैक्सीनेशन से लेकर उनके मेडिकल रिकार्ड भी इंश्योरेंस कंपनी से साझा करने चाहिए। इससे न केवल क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाएगी, बल्कि आप बाद में होने वाली किसी भी परेशानी से बच जाएंगे। एक पशुप्रेमी और पेट पैरेंट होने के नाते बेहद ज़रूरी है कि आप अपने प्यारे से पेट के लिए आज ही पेट इंश्योरेंस में निवेश करें। इससे आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ आप चिंतामुक्त भी रहेंगे।

एक अच्छा पेट पैरेंट होने के नाते अपना कर्त्तव्य निभाएं और पेट इंश्योरेंस लेकर बताएं कि आप अपने पेट से कितना प्यार करते हैं पेट इंश्योरेंस की मदद से मुश्किल वक्त में आप अपने पेट का बेहतरीन इलाज करवाने के साथ-साथ अच्छी तरह से उसकी सेहत का ख्याल भी रख पाएंगे

 

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