50 वर्षों से कायम जमाबंदी को बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के किया गया शून्य; जिलाधिकारी से 21 अक्टूबर तक मांगा प्रतिवेदन, बदलाव का आदेश देने वाले पदाधिकारी का नाम स्पष्ट करने को कहा
देश वाणी । न्यूज़ डेस्क बेतिया।
बेतिया। पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया अंचल अंतर्गत पूर्वी कर्गहिया मौजा में जमाबंदी संख्या-105 में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने सख्त संज्ञान लिया है। उन्होंने जिलाधिकारी, पश्चिम चंपारण को मामले की जांच कर दोषी कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने, दंडात्मक कार्रवाई करने और जमाबंदी में बदलाव का आदेश देने वाले पदाधिकारी की भूमिका स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
आयुक्त ने जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता (राजस्व) और अंचलाधिकारी, बेतिया को संबंधित अभिलेखों एवं प्रतिवेदन के साथ 21 अक्टूबर 2026 को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। संबंधित प्रतिवेदन 21 अक्टूबर को पूर्वाह्न 12 बजे तक उपलब्ध कराने को कहा गया है।
50 वर्षों से कायम जमाबंदी में बदलाव का आरोप
प्रमंडलीय आयुक्त को प्राप्त परिवाद के अनुसार, पूर्वी कर्गहिया मौजा की जमाबंदी संख्या-105 में 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन दर्ज थी। परिवादी का दावा है कि यह जमाबंदी 50 वर्षों से अधिक समय से उनके पिता के नाम पर कायम थी और नियमित रूप से लगान भी जमा किया जा रहा था।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि मूल जमाबंदी को शून्य कर जमीन का रिकॉर्ड दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऑनलाइन दर्ज कर दिया गया। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति का परिवादी के परिवार से कोई संबंध नहीं है। जमाबंदी में बदलाव के लिए जमीन को बेतिया राज से संबंधित बताया गया, जबकि परिवादी के अनुसार वर्तमान में उक्त भूमि का बेतिया राज से कोई संबंध नहीं है।
सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना बदलाव पर सवाल
आयुक्त ने मामले में टिप्पणी की है कि सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना लंबे समय से कायम जमाबंदी को शून्य कर किसी दूसरे असंबद्ध व्यक्ति के नाम दर्ज करना प्रथम दृष्टया लाभ से प्रेरित कृत्य प्रतीत होता है। उन्होंने इसे संभावित आपराधिक कृत्य बताते हुए प्राथमिकी दर्ज करने और जमाबंदी में आवश्यक सुधार की कार्रवाई शीघ्र करने का निर्देश दिया है।
आयुक्त ने उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय से कायम जमाबंदी को सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना निरस्त या परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए।
नई जमाबंदी में केवल 53 डिसमिल जमीन दर्ज होने पर उठाए सवाल
आयुक्त ने अपने निर्देश में यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि नई जमाबंदी में केवल 53 डिसमिल जमीन ही कैसे दर्ज की गई, जबकि मूल जमाबंदी में विभिन्न प्लॉट और खेसरा सहित कुल 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन शामिल थी। शेष जमीन की जमाबंदी कहां गई, इसका भी जवाब मांगा गया है।
उन्होंने इसे केवल जमाबंदी रद्द करने का मामला नहीं, बल्कि कथित फर्जीवाड़े के रूप में देखते हुए तत्काल अभिलेखों में सुधार करने का निर्देश दिया है।
आदेश देने वाले पदाधिकारी और कर्मियों की भूमिका होगी स्पष्ट
आयुक्त ने जिलाधिकारी से यह बताने को कहा है कि जमाबंदी में परिवर्तन किस पदाधिकारी के आदेश पर किया गया। यदि जिलाधिकारी या अपर समाहर्ता (राजस्व) के स्तर से अंचलाधिकारी, बेतिया को कोई आदेश जारी किया गया था, तो उसके आधार और परिस्थितियों को भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है।
अंचलाधिकारी से यह जवाब भी मांगा गया है कि ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी में किस प्रकार बदलाव किया गया और इसमें किन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही। आयुक्त ने दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
राजस्व मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
प्रमंडलीय आयुक्त ने तिरहुत प्रमंडल के सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजस्व मामलों का नियमानुसार एवं विधिवत निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आयुक्त के अनुसार, किसी भी मामले में अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर सख्त अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनहित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का भी निर्देश दिया है।



