SHABD,Patna, July 30,
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि प्रदेश में जल्द ही 29 हजार नयी आशा कार्यकर्ताओं की बहाली की जाएगी। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में की गयी वृद्धि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में एक लाख से अधिक आशा और ममता कार्यकर्ताएं लाभान्वित होंगी।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने आज पटना में विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में उल्लेखनीय वृद्धि करने का निर्णय ऐतिहासिक है। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 29 हजार नयी आशा कार्यकर्ताओं की बहाली प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय इन महिला कार्यकर्ताओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं को बड़ी सौगात दी गई है। वर्ष 2019 में जहां आशा कार्यकर्ताओं को 1000 रुपए प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, उसे अब तीन गुणा बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 300 रुपए की जगह अब 600 रुपए की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। ये फैसला 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा। यह फैसला स्वास्थ्य व्यवस्था को और सशक्त बनाएगा और जमीनी स्तर पर कार्यरत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करेगा।
उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक निर्णय का सीधा लाभ 91,094 आशा कार्यकर्ताओं, 4,364 आशा फैसिलिटेटर्स और लगभग 4,600 ममता कार्यकर्ताओं को मिलेगा। इसके अतिरिक्त आशा कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन के लिए 13 हजार 180 रुपए, मोबाइल रिचार्ज हेतु 200 रुपए और दो साड़ियों के लिए 2 हजार 500 रुपए की राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आशा एवं ममता कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी हैं, जिन्होंने राज्य के दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। इनके प्रयासों से राज्य में कई सकारात्मक स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है।
उन्होंने बताया कि गृह प्रसव की दर में कमी और संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई है। मातृ मृत्यु दर, जो वर्ष 2005 में 365 थी, वो घटकर 91 हो गई है। शिशु मृत्यु दर अब 27 है, जो राष्ट्रीय स्तर के बराबर है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 29 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है। नवजात शिशु मृत्यु दर (0-28 दिन) 19 है, जो राष्ट्रीय औसत 19 के करीब है। एचएमआईएस आंकड़ों के अनुसार टीकाकरण का आच्छादन अब 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को एएनसी जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाना, टीकाकरण, उच्च पोषण और ओआरएस जैसे जीवन रक्षक साधनों का वितरण आदि कार्य बखूबी किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 29 हजार नई आशा कार्यकर्ताओं की बहाली प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही विभाग में बीटीएस और बीपीएससी के माध्यम से विभिन्न पदों पर नियुक्तियां भी की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवाएं समय पर और सुलभ रूप में आमजन तक पहुंचें।
फोटो-वीडियो कैप्शन: पटना में विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग के सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय
Bihar to Soon Recruit 29,000 New ASHA Workers
The Bihar government is gearing up for a major recruitment drive, with plans to soon appoint approximately 29,000 new ASHA (Accredited Social Health Activist) workers across the state. This move aims to further strengthen the grassroots healthcare system and ensure better health service delivery, particularly in rural and underserved areas.
Key Details and Context:
- Boost to Healthcare: The addition of a large number of ASHA workers is expected to significantly enhance the reach and effectiveness of health initiatives in Bihar, including maternal and child health, immunization programs, and health awareness campaigns.
- Previous Announcements: While recent reports have mentioned figures around 27,000 to 29,000 new ASHA workers, the exact final number will be confirmed with the official notification. Earlier announcements from the Health Minister indicated recruitment within a few months.
- Selection Process: ASHA workers are generally selected at the local level. In rural areas, the Gram Sabha, often overseen by the village head (Mukhiya), plays a key role. In urban areas, ward councilors are involved in the selection process. The aim is to ensure transparency and community participation in the selection of these frontline health workers.
- Eligibility: Typically, ASHA workers are women residents of the village, usually married, widowed, or divorced, and preferably between 25 to 45 years of age. They should have good communication skills and a minimum educational qualification, often up to the 8th or 10th standard.
- Government Focus: This recruitment drive aligns with the Bihar government’s ongoing efforts to strengthen its healthcare infrastructure and improve public health outcomes, complementing recent announcements of increased incentives for existing ASHA and Mamta workers.