देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। दीवाली और लोक आस्था के महापर्व छठ से पूर्व मेहसी प्रखण्ड के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भीमलपुर और उत्क्रमित मध्य विद्यालय चक्की में वन विभाग के सहयोग से ‘पर्यावरण की पाठशाला’ का आयोजन किया गया। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय लोक परंपराओं में निहित प्रकृति-प्रेम से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार ने कहा कि हमारे पूर्वज प्रकृति को ही भगवान मानते थे। उन्होंने ‘भगवान’ शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि भ से भूमि, ग से गगन, वा से वायु और न से नीर यानी जल ही हमारे भगवान हैं। उन्होंने कहा कि धनतेरस, दीवाली और छठ जैसे पर्व असल में प्रकृति संरक्षण का ही संदेश देते हैं।
प्रधानाध्यापक डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि सदियों से चली आ रही पेड़-पौधों और नदियों की पूजा के पीछे पर्यावरण को बचाने का गहरा रहस्य छिपा है। शिक्षिका शिल्पा रानी ने बच्चों को न केवल पौधे लगाने बल्कि उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प दिलाया। वहीं, प्रभारी प्रधानाध्यापक पुष्पम कुमारी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम का संचालन करती हुई खुशबू कुमारी सिंह ने कहा कि एक पौधा महज पेड़ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और जीवन का आधार है। अंत में छात्र-छात्राओं और इको क्लब के सदस्यों ने विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्वक पौधे लगाए। कार्यक्रम को सफल बनाने में राज गुरु, बंटी लाल सहनी, फरहान अहमद समेत कई शिक्षकों और पर्यावरण प्रेमियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



