देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाली आद्यशक्ति भगवती दुर्गा की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू हो रहा है। आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान (वेद विद्यालय) के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय के अनुसार, प्रतिपदा तिथि रात्रि 09:37 बजे तक है, इसलिए कलश स्थापन के लिए सूर्योदय से लेकर पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहेगा। विशेष रूप से दिन में 11:36 से 12:24 बजे तक अभिजित मुहूर्त कलश स्थापना के लिए अत्यंत उत्तम रहेगा। भक्तगण अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार घरों व मंदिरों में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ और माता के नौ रूपों की उपासना कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं और दिन के अनुसार, इस साल रविवार को नवरात्र शुरू होने के कारण माता दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसका शुभ संकेत अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि का योग है। वहीं, विजयादशमी मंगलवार को होने के कारण माता का प्रस्थान मुर्गा वाहन पर होगा।
नवरात्र का मुख्य कार्यक्रम
- अक्टूबर (रविवार): कलश स्थापना एवं प्रतिपदा पूजन
- अक्टूबर (शुक्रवार): सायंकाल विल्वाभिमंत्रण
- अक्टूबर (शनिवार): नवपत्रिका प्रवेश और मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा
- अक्टूबर (रविवार): महा अष्टमी व्रत एवं मध्य रात्रि में निशा पूजा
- अक्टूबर (सोमवार): महा नवमी व्रत, हवन, पूर्णाहुति और कुमारी पूजन
- अक्टूबर (मंगलवार): विजयादशमी (दशहरा) का पावन पर्व



