देशवाणी
बेतिया।अवधेश कुमार शर्मा।
बिहार सरकार ने समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के तहत संचालित सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना में पूरक पोषाहार वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, गंभीर रूप से अल्पवजन और अतिकुपोषित बच्चों को मिलने वाला टेक होम राशन (टीएचआर) बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (सुधा) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
राज्य सरकार की स्वीकृति के अनुसार अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहले की तरह सूखे राशन के बजाय रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट प्रीमिक्स खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी। इसमें न्यूट्री राइस खिचड़ी प्रीमिक्स, न्यूट्री पुलाव, फोर्टिफाइड मूंग दाल-चावल खिचड़ी, मल्टीमिक्स अनाज एवं प्रोटीन प्रीमिक्स तथा फोर्टिफाइड नमकीन दलिया जैसी पोषक सामग्री शामिल होगी।
बिहार के सभी 38 जिलों, 544 बाल विकास परियोजनाओं और 1,15,064 आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह नई व्यवस्था लागू होगी। सरकार का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार, कुपोषण की रोकथाम, बाल मृत्यु दर में कमी तथा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा देना है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप समाज कल्याण विभाग आवश्यकता पड़ने पर मेनू एवं पूरक पोषाहार सामग्री में बदलाव कर सकेगा। खाद्यान्न की आपूर्ति भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) अथवा बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के माध्यम से सुधा फेडरेशन को कराई जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत अब आंगनबाड़ी पोषाहार क्रियान्वयन समिति को राशि नहीं मिलेगी। आईसीडीएस निदेशालय, पटना से राशि सीधे बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड को उपलब्ध कराई जाएगी, जो निर्धारित पोषाहार सामग्री सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाएगा।
यह प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की 20 जुलाई 2026 की बैठक में स्वीकृत किया गया था और अब इसे पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है।












