नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के बच्चों द्वारा CBI Office, Shillong में की गई वॉल पेंटिंग के उपलक्ष्य में श्री प्रमोद कुमार मांझी, DIG, CBI (ACB), Shillong ने बच्चों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। उन्हें और उनकी टीम को वॉल पेंटिंग काफी अच्छी लगी। इसी उपलक्ष्य में उन्होंने एक मीटिंग का आयोजन किया, जहाँ बच्चों को सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया।
यह मीटिंग केवल 15 मिनट के लिए निर्धारित थी, लेकिन बातचीत का सिलसिला ऐसा चला कि यह लगभग 2 घंटे तक चलता रहा। DIG श्री प्रमोद कुमार के साथ उनकी टीम से सब इंस्पेक्टर L Khongsai और उनके सहयोगी W Hembart War भी मीटिंग में उपस्थित थे।
10 डिज़ाइनर्स की टीम ने CBI Office, Shillong में वॉल पेंटिंग की, जो आने-जाने वाले लोगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गई है। यहाँ तक कि DIG श्री प्रमोद कुमार के निवास पर भी मधुबनी पेंटिंग की गई। CBI Office की टीम ने परिवहन से लेकर भोजन तक की पूरी व्यवस्था उपलब्ध करवाई।

CBI Office से W Hembart War ने बताया कि उन्हें यह वॉल पेंटिंग काफी पसंद आई, क्योंकि इसमें Meghalaya की संस्कृति को दर्शाया गया है। उनका कहना था कि जो भी कार्यालय में आता है, वह वॉल पेंटिंग की प्रशंसा करता है। श्री Hembart War, CBI Office में काफी पसंद किए जाते हैं, और DIG श्री प्रमोद कुमार ने उनके नाम “War” को “Yodha” से जोड़ते हुए उसका सकारात्मक अर्थ भी बताया।
हमारी मुलाकात डीआईजी प्रमोद कुमार मांझी से हुई, जो कई हाई प्रोफाइल केस में काम कर चुके हैं। आपको बता दें कि आपको बता दें कि उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स (Times of India) मुंबई बम ब्लास्ट केस की जांच में उनका योगदान रहा है। इसके अलावा आतंकवाद से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के अनुसार आतंकवाद से जुड़े अभियुक्त फिरोज अब्दुल रशीद खान उर्फ हमजा और आतंकी ताहिर मोहम्मद उर्फ ताहिर टकला की गिरफ्तारी की कार्रवाई में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने बताया कि कभी भी अपने आप को, अपने बैकग्राउंड, कास्ट या रिलिजन को लेकर हेज़िटेशन या नीची दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। अपने मूल पर कभी शर्म नहीं करनी चाहिए। पता चला कि उन्हें मोटिवेशनल स्पीच देना पसंद है और कई जगह उन्हें बुलाया जाता है। रिटायरमेंट के बाद उनका शौक है कि वे मैरिज लॉयर बनें और काउंसलिंग प्रोवाइड करें, वह भी फ्री ऑफ कॉस्ट। वैसे उनके रिटायरमेंट में अभी लगभग 5-6 साल बचे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इन्वेस्टिगेशन के दौरान कभी असत्य का सहारा लेना पड़ता है, तो उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार परिस्थितियाँ अलग होती हैं।
उन्होंने समझाया कि सत्य और असत्य कई बार दृष्टिकोण पर निर्भर करते हैं।उदाहरण के रूप में उन्होंने कहा कि कभी हम बच्चे के सामने घोड़ा बन जाते हैं—वह तथ्यात्मक रूप से सच नहीं होता, लेकिन उस संदर्भ में वह स्वीकार्य होता है। उन्होंने यह बात मुस्कुराते हुए कही कि कई बार दूसरे के फायदे के लिए भी झूठ बोलना पड़ जाता है। उन्होंने पर्सपेक्टिव की बात करते हुए कहा कि जो एक सिचुएशन में झूठ लगता है, वही दूसरी सिचुएशन में सच हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, जब वे अपने बेटे के लिए घोड़ा बने, तो वह तथ्यात्मक रूप से सच नहीं था, लेकिन उस सिचुएशन में वह स्वीकार्य था। ट्रुथ और लाई को हमेशा सीधी रेखा में जस्टिफाई नहीं किया जा सकता, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसे कैसे परसीव करते हैं।
DIG श्री प्रमोद कुमार को कविता लिखना काफी पसंद है। बॉडी लैंग्वेज से लेकर मनोविज्ञान तक कई टॉपिक्स पर बात हुई। वे 98th बैच से हैं और उन्हें गवर्नमेंट सर्विस में 26 साल हो चुके हैं।

अंत में उन्होंने बच्चों को सर्टिफिकेट से सम्मानित किया और कुछ यादगार पल बिताए। यह वॉल पेंटिंग CBI Office के लिए एक लाइफ टाइम मेमोरी बनेगी। पता ही नहीं चला कि 15 मिनट की मीटिंग कब 2 घंटे में बदल गई। फिर भी कई सवाल थे जो हम नहीं पूछ पाए। खैर, अगली बार ज़रूर पूछ लेंगे। धन्यवाद।












