प्रशासन द्वारा जमीन बेचने के दावों का आधिकारिक खंडन-
जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया माध्यमों पर चल रही उन खबरों का पूरी तरह से खंडन किया है, जिनमें यह दावा किया गया था कि प्रशासन द्वारा भूमि की बिक्री का आदेश दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कुछ व्यक्तियों और कथित पत्रकारों द्वारा दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से यह भ्रामक प्रचार किया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने जमीन बेच दी है या वह जमीन बेचने का आदेश दे रहा है।
अधिकारियों के पास भूमि विक्रय का वैधानिक अधिकार नहीं-
जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि किसी भी कानून, अधिनियम या सरकारी प्रक्रिया के तहत किसी भी प्रशासनिक पदाधिकारी को भूमि के क्रय या विक्रय का आदेश देने का अधिकार प्राप्त नहीं है। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह की खबरें पूरी तरह से तथ्यहीन हैं और जनता को गुमराह करने के लिए फैलाई जा रही हैं।
सरकारी भूमि और रोक सूची पर प्रशासन की भूमिका-
जिला प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए बताया कि उसका कार्य केवल सरकारी भूमि को ‘रोक सूची’ (Hold List) में डालना है। इसके अलावा, केवल वही भूमि रोक सूची में डाली जा सकती है जो भूमि अधिग्रहण, भू-हदबंदी (Ceiling) या स्वत्ववाद (Title Suit) के अंतर्गत आती है। साथ ही, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना भी जिला प्रशासन की अनिवार्य जिम्मेदारी है।
भ्रामक खबर फैलाने वालों पर कसेगा शिकंजा–
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि ऐसी गलत और आधारहीन खबरों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है। भ्रामक सूचनाएं प्रसारित कर प्रशासनिक छवि धूमिल करने वाले संबंधित व्यक्तियों और पत्रकारों के विरुद्ध चिन्हित कर विधि-सम्मत कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।












