-बालकनी, छत और घर के परिसर में गमलों व ग्रो बैग में उगा सकते हैं फलदार पौधे
फोटो : पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय में कंटेनर गार्डनिंग का प्रदर्शन करते छात्र छात्राएं व डीन
पीपराकोठी : तेजी से बढ़ते शहरीकरण और लगातार कम होती खुली जगहों के बीच कंटेनर गार्डनिंग शहरी बागवानी का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहा है. इसके माध्यम से कम जगह में भी घर की छत, बालकनी, आंगन और परिसर में ताजे फल एवं सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय की ओर से छात्रों को कंटेनर में फल उत्पादन की संभावनाओं और वैज्ञानिक तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. कंटेनर गार्डनिंग की खासियत यह है कि सही किस्म, उपयुक्त आकार के कंटेनर, बेहतर ग्रोइंग मीडिया और संतुलित पोषण के साथ कई फलदार पौधों को गमले अथवा ग्रो बैग में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है. आम की बौनी किस्में अरुणिका और आम्रपाली, पपीते की रेड लेडी, अनार की भगवा, अमरूद की श्वेता के अलावा बेर और स्ट्रॉबेरी को भी कम जगह में उगाया जा सकता है. महाविद्यालय के डीन डॉ. कुंदन किशोर ने बताया कि कंटेनर में फल उत्पादन की सफलता मुख्य रूप से सही आकार के कंटेनर, उपयुक्त किस्म, गुणवत्तापूर्ण ग्रोइंग मीडिया, संतुलित पोषण तथा समय पर छंटाई और ट्रेनिंग पर निर्भर करती है. आम, बेर और अमरूद जैसे पौधों में कैनोपी मैनेजमेंट के माध्यम से पौधे को नियंत्रित एवं प्रबंधनीय आकार में रखा जा सकता है. वहीं अनार को छोटे और सघन पौधे के रूप में विकसित किया जा सकता है. पपीता भी कंटेनर गार्डनिंग के लिए काफी उपयुक्त फल फसल है. शहरी बागवानी को व्यावहारिक रूप देने के उद्देश्य से कॉलेज के छात्र डॉ. निहारिका कंठ की देखरेख में कॉलेज परिसर में कंटेनर गार्डन विकसित कर रहे हैं. छात्रों ने खाद और वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर उपयुक्त मीडिया तैयार किया तथा उसमें विभिन्न फलदार पौधों का रोपण किया. विशेषज्ञों के अनुसार कम जगह फल उत्पादन में बाधा नहीं, बल्कि एक अवसर है. वैज्ञानिक तरीके से कंटेनर गार्डनिंग अपनाकर घर की बालकनी और छत को भी छोटे फल उद्यान में बदला जा सकता है.



