HomeBIHARमोतिहारीजीवामृत के छिड़काव से प्राकृतिक खेती को मिला बढ़ावा

जीवामृत के छिड़काव से प्राकृतिक खेती को मिला बढ़ावा

-धान के खेत में रावे विद्यार्थियों ने किया जीवामृत का प्रयोग, प्राकृतिक खेती की तकनीक को समझा

माला सिन्हा 

पीपराकोठी : कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी में मंगलवार को प्राकृतिक खेती को लेकर टीसीए, ढोली के रावे विद्यार्थियों ने खेत स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया. इस दौरान विद्यार्थियों ने प्राकृतिक खेती के अंतर्गत धान की फसल में जीवामृत का छिड़काव किया. विद्यार्थियों ने स्वयं खेत में जीवामृत का प्रयोग कर प्राकृतिक खेती की तकनीकों को करीब से समझा. गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों को जीवामृत तैयार करने, इसके उपयोग की विधि, उचित मात्रा तथा फसल पर इसके प्रभाव की जानकारी दी गई. प्रशिक्षकों ने बताया कि जीवामृत प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण जैविक घोल है. इसके प्रयोग से मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाने में मदद मिलती है तथा मिट्टी की जैविक गुणवत्ता एवं उर्वरता को बनाए रखने में इसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है. धान के खेत में जीवामृत के छिड़काव के दौरान विद्यार्थियों ने फसल की स्थिति का अवलोकन भी किया. उन्होंने जाना कि प्राकृतिक खेती में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर खेती की लागत को कम करने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने की दिशा में काम किया जा सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में प्राकृतिक एवं जैविक विकल्पों को अपनाकर टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत किया जा सकता है. रावे कार्यक्रम के तहत आयोजित इस गतिविधि से विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती का केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि खेत स्तर पर उसके प्रयोग का प्रत्यक्ष अनुभव भी मिला. विद्यार्थियों ने जीवामृत के छिड़काव के साथ प्राकृतिक खेती में इसके महत्व को समझा और किसानों तक ऐसी तकनीकों को पहुंचाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular