माला सिन्हा
पीपराकोठी : तिरहुत कृषि महाविद्यालय, ढोली की स्नातक कृषि की 30 छात्राएं कृषि विज्ञान केंद्र के रावे कार्यक्रम के तहत एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी के सात विषयों का सर्वे और शोध करेंगी. 27 अगस्त से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत छात्राएं जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर ग्रामीण कृषि कार्य का अनुभव प्राप्त करेंगी. दो माह तक चलने वाले इस कार्यक्रम में चयनित सुदूर गांवों में कृषि, खेत-खलिहान और ग्रामीण जीवन से जुड़ी गतिविधियों का सर्वे किया जाएगा. कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. अरबिंद कुमार सिंह ने बताया कि छात्राएं ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव रावे के तहत शोध और सर्वे कर रही हैं. कृषि के प्रमुख विषयों में सस्य विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, कृषि भौतिक विज्ञान, कृषि रसायन, कृषि अर्थशास्त्र, पशुपालन और कृषि अभियंत्रण को शामिल किया गया है. कार्यक्रम के प्रथम दिन छात्राओं के लिए रावे ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसका मार्गदर्शन डॉ. गायत्री कुमारी पाढ़ी ने किया. इस दौरान छात्राओं को रावे कार्यक्रम के उद्देश्यों, विभिन्न गतिविधियों और कार्ययोजना की जानकारी दी गई. कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे. प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं ने किसानों द्वारा गेंदा के फूल की माला बनाकर बिक्री करने, आटा चक्की और प्लाईवुड जैसे लघु उद्योगों, जीविका से जुड़ी महिलाओं की गतिविधियों, अगरबत्ती उद्योग, आटा प्रसंस्करण तथा चूड़ा बनाने की मशीन सहित ग्रामीण क्षेत्र में संचालित विभिन्न कृषि एवं स्वरोजगार गतिविधियों का सर्वे किया. केविके प्रमुख डा अरविन्द कुमार सिंह ने बताया कि चार वर्षीय कृषि विज्ञान पाठ्यक्रम में कृषि के विभिन्न विषयों का वैज्ञानिक पद्धति से क्रमबद्ध अध्ययन कराया जाता है. सेमेस्टर प्रणाली के तहत विद्यार्थियों को कृषि तकनीक के विभिन्न विषयों का सैद्धांतिक और प्रायोगिक ज्ञान दिया जाता है. अंतिम वर्ष में रावे के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि, किसान, समाज, गांव और खेत-खलिहान से जुड़ी सामाजिक एवं व्यवहारिक जानकारियों से रूबरू होने का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का प्रसार होने के बावजूद युवा शक्ति की कमी बनी हुई है. ऐसे में कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार, अध्ययन और स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं. रावे कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि की जमीनी हकीकत समझने के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है.



