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अनेक भाषाओं की जननी व भारतीय संस्कृति की प्राणधारा है संस्कृत: प्रो. देवेन्द्र

आर्षविद्या वेद विद्यालय में मना श्रावणी उपाकर्म व संस्कृत दिवस

देश वाणी। दिलीप दुबे

मोतिहारी। महर्षिनगर बरियारपुर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय में शनिवार को श्रावणी उपाकर्म सह संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन श्रद्धा व उल्लास के साथ हुआ। इस अवसर पर दशविध गणस्नान, तर्पण, ऋषि पूजन, यज्ञोपवीत प्रतिष्ठा, वेद पूजन, रुद्राभिषेक तथा रक्षाबंधन जैसे वैदिक अनुष्ठान विधि-विधान से किए गए।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता व सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. देवेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि देवभाषा संस्कृत संस्कारित भाषा होने के साथ-साथ प्राकृत, पाली, अपभ्रंश व हिन्दी सहित अनेक भाषाओं की जननी है। इसमें वैदिक एवं लौकिक साहित्य का अनुपम समन्वय मिलता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पीयूपी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. (प्रो.) कर्मात्मा पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की प्रधान धारा है, जो वैश्विक स्तर पर व्यापकता, धार्मिकता और लौकिकता से परिपूर्ण है। वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने श्रावणी उपाकर्म को आत्मशुद्धि, प्रायश्चित और ऋषि परंपरा के प्रति श्रद्धा-समर्पण का पावन पर्व बताया।

समारोह में वक्ता के रूप में विनोद पाण्डेय, सुधीर दत्त पाराशर, राजन पाण्डेय, कुन्दन पाठक, शिवम सोनू एवं विकास पाण्डेय ने भी अपने विचार रखे। मंच संचालन रुपेश कुमार ओझा तथा धन्यवाद ज्ञापन राकेश तिवारी ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से कृष्ण कुमार, डॉ. चन्द्र सुभाष, डॉ. हेना चन्द्रा, गायत्री पाण्डेय, कुमारी पूनम, सुजीत मिश्र, उत्पल कुमार, मिथिलेश पाण्डेय, लोकमणि मिश्र, अरुण तिवारी, सीताराम साह, सुधाकर पाण्डेय, आलोक चन्द्र, विनीत कुमार, पुष्पेन्द्र पाण्डेय एवं वेदपाठी बटुक उपस्थित रहे।

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