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पहले फैसला सुरक्षित रखा था हाईकोर्ट ने, आज तलवार दम्पत्ति को कर दिया बरी
By Deshwani | Publish Date: 12/10/2017 6:02:49 PM
पहले फैसला सुरक्षित रखा था हाईकोर्ट ने, आज तलवार दम्पत्ति को कर दिया बरी

 इलाहाबाद, (हि.स.)। नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकाण्ड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरूवार को भरी अदालत में अपना अहम फैसला सुनाते हुए राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी कर दिया। हाईकोर्ट का मानना है कि केवल सन्देह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 6 नवम्बर 2013 को नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दम्पत्ति ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा ने इस साल 7 सितम्बर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई 18 महीने तक चली थी।

तलवार दम्पत्ति दिल्ली-एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे हैं। राजेश पंजाबी परिवार से हैं और नुपुर महाराष्ट्रियन परिवार से हैं। नुपुर एयरफोर्स के अफसर की बेटी हैं और डा. राजेश हार्ट स्पेशलिस्ट के बेटे हैं। आरुषि का जन्म 1994 में हुआ था। 
सीबीआई की दो टीमों ने इस मामले की जांच की जिसमें एक ने तलवार दम्पत्ति को क्लीन चिट दी तो दूसरी ने इन्हें संदिग्ध माना। इस मामले की जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपति को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। इस केस की जांच 31 मई 2008 को उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दम्पत्ति को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना। इसके बाद सितम्बर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की तो उन्होंने भी तलवार दम्पत्ति को प्राइम सस्पेक्ट माना।
तलवार दम्पत्ति की बेटी आरुषि तलवार की लाश उनके घर में 16 मई, 2008 को मिली और 17 मई को नेपाल के रहने वाले नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली। राजेश तलवार ने पहले उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप लगाया था लेकिन जब दूसरे दिन उसी की लाश मिल गई तो केस उलझ गया। इस पर 18 मई 2008 को जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस ने कहा कि दोनों मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही पुलिस ने माना कि मर्डर में परिवार से जुड़े किसी शख्स का हाथ है। 19 मई को तलवार परिवार के पूर्व घरेलू नौकर विष्णु शर्मा पर भी पुलिस ने शक जाहिर किया। 21 मई को यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी मर्डर की जांच में शामिल हुई। पुलिस ने 22 मई को आरुषि की हत्या के पीछे आनर किलिंग का शक जाहिर करके इस पहलू से भी जांच शुरु की। पुलिस ने आरुषि के लगातार संपर्क में रहे एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। इस दोस्त से आरुषि ने 45 दिनों में 688 बार फोन पर बात की थी।
पुलिस ने डा. राजेश तलवार को मर्डर के आरोप में अरेस्ट किया और 29 मई को जांच सीबीआई के हवाले हुई। एक जून, 2008 को सीबीआई ने जांच शुरू की। तीन जून, 2008 को कम्पाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए सीबीआई ने हिरासत में लिया। 27 जून, 2008 को नौकर राजकुमार को अरेस्ट किया गया। 12 जुलाई, 2008 को नौकर विजय मंडल अरेस्ट डा. तलवार को जमानत मिली। 29 दिसंबर 2010 सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी लेकिन पेरेंट्स के रोल पर सवाल उठाए। 09 फरवरी 2011 को मामले में तलवार दंपति बने आरोपी। 21 फरवरी 2011 को दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए। 19 मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट गए, यहां भी राहत नहीं मिली। 11 जून, 2012 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की और 26 नवम्बर 2013 को नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा हुई। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।
न्यायमूर्ति वी.के.नारायण और न्यायमूर्ति ए.के.मिश्रा प्रथम की खण्डपीठ ने कहा कि सीबीआई अभियोजन केस को साबित नहीं कर सकी, इस कारण दंत चिकित्सकों को लाभ देते हुए उन्हें बरी किये जाने का आदेश दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ दंत चिकित्सकों को दिया जाना चाहिए। इस नाते साक्ष्य के अभाव में उन्हें आरोपों से बरी किया गया है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद के आदेश दिनांक 26 नवम्बर 13 को रद्द कर दिया है। दोनों अपीलार्थी इस समय डासना जेल गाजियाबाद में बंद है। कोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में एक बार निर्णय सुरक्षित कर लिया था तथा आदेश की प्रतीक्षा की जा रही थी परन्तु कोर्ट ने मामले को विरल से विरलतम केस मानते हुए इस मामले की कुछ मुद्दों पर दोबारा सुनवाई की थी। गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ इस दंपति ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
 
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