बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला के नरकटियागंज
नगर परिषद अंतर्गत आर्यसमाज मंदिर की भूमि अवैध ढंग से खरीद विक्री का मामला उजागर
हुआ है। आर्य समाज मंदिर नरकटियागंज के पदाधिकारियों ने शिकारपुर थानाध्यक्ष की
संलिप्तता भी उजागर किया है। जिसमें भू माफियाओं का संरक्षण देने और आर्य समाज
मंदिर की भूमि पर अवैध निर्माण कराने को शह देना बताया गया है। उपर्युक्त भूमि
खाता 06 खेसरा 1420 रकबा लगभग दो कट्ठा बताया गया है।
जिसे जमुनी देवी 37 वर्ष पति स्व.जोखू राम आधार संख्या 46966948
8619 ने
दिनांक 28 अगस्त 2024 को तबारक हुसैन आयु 65
वर्ष और शहनाज़ बेगम आयु 59 वर्ष को 15 धूर भूमि 16
लाख 90 हजार रुपये में बेंच दिया। जिन्होंने 05 मई 2026 को
उपर्युक्त भूमि बबिता देवी पति दुर्गेश कुमार गुप्ता को 1.87 डिसमिल बेच
दिया।
आर्य समाज मंदिर की दान में प्राप्त उपर्युक्त भूमि को तीन भाग में बेंचा
गया, दुसरे भाग में 29 अगस्त 2024 को महनार बेगम 48
वर्ष पति राहत हुसैन आधार 487476496158 औरअम्बेया खातून आयु 33
वर्ष पति मोहम्मद रमजान अंसारी आधार 877321784592 ने 10
धुर बेंच दिया। तीसरे भाग में जमुनी देवी 37 वर्ष ने इक़बाल
अहमद अंसारी आयु 29 वर्ष पिता तबारक हुसैन आधार 930844323118 और
रेहान नैयर आयु 31 वर्ष पिता अमीरुद्दीन आधार 870720173429
धूमनगर को 13 धूर भूमि बेंच दिया। सबसे बड़ी आश्चर्यजनक बात
यह कि तीन दस्तावेज की विक्री नामा की भूमि जमुनी देवी के जमाबंदी से नहीं घटाकर
रघुनी हलखोर की जमाबंदी संख्या 15 से ख़ारिज कर उपर्युक्त लेख्यकारी को
दाखिल कर दिया गया। जिससे अंचल कार्यालय भी पूरे प्रकरण में दागदार होता परिलक्षित
है।
उपर्युक्त मामला में पुलिस ने बिहार भूमि विवाद
निराकरण अधिनियम 2009 अंतर्गत वाद संख्या 60, 61,
62/2025-2026 इक़बाल अहमद बनाम राजेश्वर प्रसाद वगैरह मामला में भूमि सुधार
उपसमाहर्ता ने न्यायादेश पारित करते हुए कहा है कि मुखलाल साह बेतिया राज के फसली
नंबर 1327 सं 1934 का पट्टा को भूमि प्राप्ति का आधार बताया है
जिसे जाँच उपरांत डीसीएलआर नरकटियागंज ने दिनांक 27 फरवरी 2026 को
गलत बताया है। अब देखना यह है कि डीसीएलआर वाद संख्या 60, 61, 62 /
2025-2026 में महनार बेगम बनारं रामेश्वर प्रसाद वगैरह के मामला में
व्यवस्थापक बेतिया राज ने भूमि सुधार उपसमाहर्ता को पत्रांक 2500
दिनांक 20 सितम्बर 2025 के माध्यम से डीसीएलआर के पत्रांक 526/न्या.दिनांक
19 अगस्त 2025 के आलोक में बताया है कि कथित बंदोबस्ती कागजात की छाया
प्रति शिकारपुर मौजा थाना शिकारपुर थाना नंबर 111 खाता संख्या 06
एवं 08 खेसरा 944 एवं 1420 मुखलाल साह के
नाम से बंदोबस्ती बताया गया है।
उसके सम्बंध में सत्यापन उपरांत उसकी सत्यता
बेतिया राज से तीन फोलियों की कॉपी और बेतिया राज के मूल कागजात में उपर्युक्त
भूमि का कोई उल्लेख नहीं है अर्थात पेश किया गया अभिलेख फ़र्ज़ी है। उपर्युक्त फर्जी
अभिलेख के आधार पर मुखलाल साह ने पुत्री सुनर पति देवी को 13 फरवरी 1954 को
भूमि उपहार दिया। जिसका कोई रिकॉर्ड अंचल कार्यालय में नहीं है। पुनः वही भूमि
जमुनी ने वर्ष 1954 में सुनरपति देवी से 16 दिसंबर 1954 को
ख़रीदा। उल्लेखनीय है कि जमुनी देवी का जन्म 1987 में उनकी भूमि का
अभिलेख बताता है। बकौल प्रधान आर्यसमाज मंदिर रामेश्वर प्रसाद आर्य, उपर्युक्त
भूमि को बेंचने वाले का जन्म 1987 में हुआ और वह जमीन 1954
में रजिस्ट्री करा चुकी होती है। यह से मामला पूरी तरह संदेहास्पद प्रतीत होता है।
उधर आर्य समाज मंदिर के मंत्री राजेश कुमार ने बतया कि जमुनी देवी के पुत्र
मोतीलाल राम आयु दस्तावेज नंबर 1514 टोकन नंबर 1491 दिनांक 01
फरवरी 2022 के अनुसार उनकी आयु 43 वर्ष बताई गई है। अब यह भी बड़ा प्रश्न
है कि वर्ष 2024 में माँ की आयु 37 और वर्ष 2022
में पुत्र की आयु 43 वर्ष है। पूरे प्रकरण में भूमि का खेल खेलने
वालों की पहुँच अंचल से लेकर निबंधन और पुलिस थाना तक बताई जा रही है।












