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मिथिलांचल की मैथिली को ’राइजिंग स्टार’ न बन पाने का मलाल नहीं
By Deshwani | Publish Date: 24/4/2017 2:47:57 PM
मिथिलांचल की मैथिली को ’राइजिंग स्टार’ न बन पाने का मलाल नहीं

मनोज पाठक  

पटना, (आईपीएन/आईएएनएस)। बिहार में मिथिलांचल की बेटी मैथिली ठाकुर को राइजिंग स्टार नहीं बन पाने का मलाल नहीं है। मैथिली शास्त्रीय संगीत में अपना एक घराना बनाकर उसे और मजबूत करने की योजना बना रही है। मैथिली ने बिहारवासियों सहित उन सभी समर्थकों को धन्यवाद दिया और उनका आभार जताया, जिन्होंने टीवी शो ’राइजिंग स्टार’ में फाइनल तक पहुंचने में उसकी मदद की। 

मैथिली की आवाज का जादू अब किसी पहचान की मोहताज नहीं। कलर्स चैनल पर सिंगिंग रियालटी शो ’राइजिंग स्टार’ में ’रनर अप’ रहीं मैथिली इस प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा वोट लेने वाली प्रतिभागी रहीं। वह फाइनल में बेनेट दोसांझ से हार गईं। मैथिली का मानना है कि संगीत एक साधना है अैार सब कुछ आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने आईएएनएस को फोन पर बताया कि “मेरी मंजिल फिल्मी दुनिया कभी नहीं रही। मेरी मंजिल शास्त्रीय संगीत है और मुझे शास्त्रीय संगीत में और निपुण बनना है तथा अपना घराना बनाकर उसे प्रसिद्घि दिलवाना है।“

संगीत के क्षेत्र में अपनी मधुर आवाज से बहुत कम समय में अमिट छाप छोड़ने वाली मैथिली ठाकुर को संगीत विरासत में मिली है। बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी (उड़ेन) की रहने वाली मैथिली को संगीत की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा अपने दादा बच्चा ठाकुर और पिता रमेश ठाकुर से मिली। 

मैथिली बताती हैं कि घर में संगीत के परिवेश में पली-बढ़ी होने के कारण बचपन से ही उसका लगाव संगीत से रहा। मैथिली के दो भाई ऋषभ (14) और गुंजन (10) भी शास्त्रीय संगीत में निपुण हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी मैथिली वर्तमान में दिल्ली के द्वारका में परिवार के साथ रहते हुए वहां बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई कर रहीं हैं। इसके अलावे मैथिली प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद में पांचवें वर्ष की पढ़ाई भी कर ही हैं।

शास्त्रीय संगीत को पसंद करने वाली मैथिली कहती हैं, “संगीत एक साधना है। संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कोई ’शॉर्टकट’ नहीं हो सकता।“ मैथिली अब तक संगीत के क्षेत्र में कई विशिष्ट पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। वह राष्ट्रीय स्तर के गायन कार्यक्रम ’इंडियन आइडल जूनियर-2015’ और ’सारेगामापा’ सहित कई रियलिटी शो में अपनी प्रतिभा का जौहर दिखा चुकी हैं।

’आई जिनियस यंग सिंगिंग स्टार’ जीतने के बाद यूनिवर्सल म्यूजिक द्वारा मैथिली की ’या रब्बा’ अलबम को लोगों ने काफी पसंद किया है। इस अलबम में ’शैतानिया’ टाइटल सांग को यू-ट्यूब पर अब तक 16 लाख से ज्यादा लोग देख और सुन चुके हैं।  मैथिली ने उन सभी समर्थकों का आभार जताया है, जिन्होंने उसे राइजिंग स्टार के फाइनल तक पहुंचाने में मदद दी। 

उल्लेखनीय है कि सिंगिंग रियलिटी शो के ’जज’ मुख्य रूप से दर्शक थे, जो लाइव पसंदीदा प्रतिभागियों को मोबाइल के जरिए वोट देते थे। इस शो में जज के रूप में शंकर महादेवन, मोनाली ठाकुर और दिलजीत दोसांझ थे।  इधर, मिथिला के विकास के लिए काम कर रही संस्था ’मिथिलालोक फाउंडेशन’ ने मैथिली ठाकुर को ’पाग सम्मान’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। संस्था के अध्यक्ष और सुप्रसिद्घ अंग्रेजी लेखक डॉ. बीरबल झा ने कहा कि ऐसा पहली बार है जब मधुबनी से कोई प्रतिभागी किसी रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाने में सफल हुआ है। 

उन्होंने कहा, “इस कार्यक्रम के जरिए आज मैथिली न केवल मिथिला क्षेत्र बल्कि समूचे देश में संगीत की पहचान बन गई है। उम्मीद है कि वह अपने गायन के द्वारा भविष्य में भी मिथिला क्षेत्र व वहां के लोगों का मान-सम्मान बढ़ाती रहेंगी।“ उन्होंने कहा कि संस्था शीघ्र ही दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर मैथिली को सम्मानित करेगी, जिसमें उन्हें मान-पत्र के साथ मिथिला के सम्मान का प्रतीक ’पाग’ भेंट किया जाएगा।

मैथिली के पिता रमेश ठाकुर कहते हैं कि उनकी इच्छा मैथिली को संगीत के क्षेत्र में बहुत ऊंचाई पर देखने की है। उन्होंने कहा कि भले ही मैथिली राइजिंग स्टार नहीं बन पाई हों, लेकिन इस प्रतियोगिता से उसकी पहचान बढ़ी है। उसके प्रशंसकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्होंने इसके लिए कलर्स चैनल, प्रतियोगिता के सभी जजों व मैथिली के सभी समर्थकों और वोट देने वालों का शुक्रिया अदा किया।

उनकी इच्छा है कि मैथिली अपने संगीत के घराने को मजबूत करें और भविष्य में ऐसे लोगों के लिए मार्गदर्शक बनें, जिससे संगीत की दुनिया और बड़ी हो सके। उनका कहना है कि संगीत की दुनिया काफी बड़ी है, लेकिन शास्त्रीय संगीत की महत्ता घट रही है, जिसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

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