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रवि शास्त्री की नियुक्ति से बहुत सी उम्मीदें : रमेश ठाकुर
By Deshwani | Publish Date: 13/7/2017 11:42:52 AM
रवि शास्त्री की नियुक्ति से बहुत सी उम्मीदें : रमेश ठाकुर

भारतीय क्रिकेट टीम के नए कोच को लेकर पिछले दो दिनों तक ड्रामा होता रहा। नया कोच कौन होगा, इस बात का आभास सभी को पहले से ही था। रवि शास्त्री के नाम पर ठप्पा पहले से ही लग चुका था। गांगुली-लक्ष्मण की वीरू के नाम पर सहमति कप्तान कोहली की जिद के सामने नहीं टिकी। नए कोच बनने की पटकथा कुंबले के इस्तीफे के बाद रवि शास्त्री के नाम पर पहले ही तय हो गई थी। शास्त्री कप्तान कोहली की पहली पसंद थे। वह किसी भी कीमत पर उन्हें कोच के पद पर आसीन कराना चाहते थे। कुंबले-केाहली के बीच कलह जबसे खुलकर सामने आई, उसी वक्त से टीम का प्रदर्शन कमजोर हो गया था। पिछले कुछ समय के भारतीय क्रिकेट टीम के नतीजे इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी हैं कि टीम के मैनेजमेंट में बदलाव होना चाहिए। कोच और कप्तान के मध्य किचकिच, खिलाड़ियों में आपसी तालमेल का अभाव आदि खबरें छनकर मीडिया में लगातार आ रही थीं। मुख्य कोच अनिल कुंबले के इस्तीफे के बाद से ही कयास लगाए जाने लगे थे कि अगले कोच रवि शास्त्री ही होंगे। वैसा हुआ भी! रवि शास्त्री कप्तान विराट कोहली की पहली पसंद हैं। 
मंगलवार को पूर्व भारतीय कप्तान रवि शास्त्री को मुख्य कोच नियुक्त करने की अपुष्ठ खबरें चारों ओर तैरती रहीं। देर रात बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी की ओर से अधिकृत पुष्टि कर दी गई कि इंडियन क्रिकेट टीम को उसका नया कोच मिल गया है। पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री को ये जिम्मेदारी दी गई है। रवि शास्त्री का टीम इंडिया के साथ जुड़ने का यह तीसरा कार्यकाल होगा। इससे पहले 2014 से 2016 तक वह टीम के निदेशक रहे, जबकि 2007 में बांग्लादेश दौरे पर भारतीय टीम के क्रिकेट मैनेजर रहे हैं। विराट कोहली और अनिल कुंबले के बीच तकरार जगजाहिर होने के बाद कुंबले ने मुख्य कोच पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद शास्त्री का कोच पद की रेस में आने का रास्ता साफ हो गया था। 
टीम मैनेजमेंट में बदलाव की आहट पाकिस्तान से मिली करारी हार के बाद से ही महसूस होने लगी थी। पाकिस्तान से हार के पीछे कोच और कप्तान के बीच तालमेल न बैठना बताया गया था। कुंबले-कोहली तकरार को लेकर कई खिलाड़ी भी एक दूसरे से असहज थे। और भी कई कारण थे जो धीर-धीरे सामने आने लगे थे। इन्हीं सब बातों से विचलित होकर कोच अनिल कुंबले ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। बीसीसीआई ने सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पूरे मैनेजमेंट में बदलाव करके कोच के रूप में रवि शास्त्री को नियुक्त करने का फैसला किया। 
क्रिकेट सलाहकार समिति यानी सीएसी ने इसके साथ ही जहीर खान को गेंदबाजी सलाहकार, जबकि भारत ‘ए’ व अंडर-19 के कोच राहुल द्रविड़ को बल्लेबाजी सलाहकार नियुक्त किया है। इनकी नियुक्ति इंग्लैंड और वेल्स में 2019 में होने वाले विश्व कप तक है। बल्लेबाजी कोच संजय बांगर सहित बाकी सहयोगी स्टाफ पहले की तरह बना रहेगा। इन तीनों दिग्गजों पर यह बड़ा फैसला सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली व वीवीएस लक्ष्मण ने लिया। हांलाकि कोच के लिए गांगुली व लक्ष्मण अंतिम फैसले तक वीरू के नाम पर सहमति जताते रहे हैं लेकिन बाजी रवि शास्त्री ने ही मारी।
भारतीय कोच के लिए इस बार ज्यादा विदेशी पूर्व क्रिकेटरों ने रुचि नहीं दिखाई। वेस्इंडीज के सिमंस व टाम मूडी के अलावा इस दौड़ में किसी ने भाग नहीं लिया। सिमंस ने आवेदन तो किया पर इंटरव्यू में शामिल नहीं हुए। बीसीसीआई की ओर से उनसे संपर्क किया गया तो सिमंस ने इन्कार कर दिया। इस पर उनका तर्क था कि जिस समय इंटरव्यू होगा, उस समय वेस्टइंडीज में आधी रात होगी और उस समय वह इंटरव्यू नहीं दे सकेंगे। इसके बाद बीसीसीआई ने सिमंस के नाम पर विचार नहीं किया। हालांकि टाॅम साक्षात्कार में शामिल हुए। हालांकि वह रेस में कहीं दिखाई नहीं दिए। आवाजें तो यह भी उठ रही थीं कि कोच की नियुक्ति पहले ही हो चुकी थी। रवि शास्त्री के नाम पर मोहर लग चुकी थी। सा़क्षात्कार के नाम पर तो सिर्फ औपचारिकता पूरी करनी थी। भारतीय क्रिकेट टीम को रवि शास्त्री से बुहत उम्मीदें हैं। कुछ कर दिखाने का उनके पास सुनहरा मौका है। अगर वह असफल होते हैं तो कोच और कप्तान की प्रतिष्ठा मिटटी में मिल जाएगी। कारण यह कि इस बार कोच की नियुक्ति में सिर्फ कप्तान की चली है। 
दस जुलाई को मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय पर मैराथन साक्षात्कार प्रक्रिया हुई। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और सचिन तेंडुलकर की अगुवाई में एक एडवाइजरी कमेटी बनाई गई। तीनों सदस्यों ने पांच आवेदकों का करीब चार घंटे तक इंटरव्यू लिया। आवेदकों में रवि शास्त्री, लालचंद राजपूत, टॉम मूडी और रिचर्ड पायस ने स्काईप माध्यम से साक्षात्कार से जुड़े, जबकि धुरंदर बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग स्वंय साक्षात्कार स्थल पहुंचे। 
रवि शास्त्री के पास नेशनल टीम को बेहतर मैनेजमेंट देने का बेशुमार हुनर है। पूर्व में भी वह भारतीय क्रिकेट से जुड़े रहे हैं। रवि ने अगस्त 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1-3 की हार के बाद टीम निदेशक का पद संभाला था और वे ट्वेंटी-20 विश्व कप तक इस पद पर रहे थे। उस दौरान टीम इंडिया ने इंग्लैंड को उसी के घर में एकदिवसीय सीरीज में पहली बार धूल चटाई थी। इसके बाद टी--20 सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को भी उसी की सरजमीं पर हराया था। श्रीलंका में 22 साल में पहली बार भारतीय टीम ने टेस्ट सीरीज जीती थी। अपने घर में दक्षिण अफ्रीका को टेस्ट सीरीज में हराया था।
भारतीय टीम में ऐसी बहुत सी दरारें थीं जिनके लिए टीम और टीम मैनेजमेंट में बड़े बदलाव की दरकार थी। टीम इंडिया के नए कोच के लिए काफी माथापच्ची हुई। 
भारतीय क्रिकेट टीम में पिछले कुछ साल से एक बात देखने को मिल रही है। वह है कप्तान की बात पर ज्यादा तबज्जो देना। मैनेजमेंट में किए गए मौजूदा बदलाव उसी का परिचायक है। कप्तान जिसे कोच के लिए पंसद करता है, मैनेजमेंट उसी पर फोकस करता है। कोच के पद की रेस में रवि शास्त्री के अलावा और भी कई अनुभवी कैंडिडेट शामिल थे, लेकिन विराट का फेवरेट होने की वजह से शास्त्री को मौका दिया गया। रवि को अगले यानी 2019 वर्ल्ड कप तक के लिए कोच बनाया गया है। अगर पंसद और नपसंद की बात न करें तो रवि के पास क्रिकेट को देने के लिए बहुत अनुभव है। अपने वक्त भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई थी।
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