बिहार
प्रतिबंधित दवाओं और खांसी की दवा का नशे के रूप में हो रहा है सेवन
By Deshwani | Publish Date: 19/3/2017 5:45:28 PM
प्रतिबंधित दवाओं और खांसी की दवा का नशे के रूप में हो रहा है सेवन

सुपौल/निर्मली। इंडो-नेपाल के कुनौली बाजार में इन दिनों नेपाली लोगों द्वारा प्रतिबंधित दवाओं का नशे के रूप में सेवन धड़ल्ले से किया जा रहा है। एक ओर जहां सेल फोर इंडिया दवाइयां चोरी छिपे नेपाली भू-भाग में तस्करी कर ले जायी जा रही है। वहीं दूसरी ओर नेपाली युवा भारतीय भूभाग में आकर इन प्रतिबंधित दवाओं का सेवन नशे के रूप में कर रहे है। और वहीं राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बाद नशे के आदि हो चुके भारतीय लोगों के द्वारा भी प्रतिबंधित दवाओं का सेवन नशे के रुप में किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के बाजार में इन दिनों अगर आम मरीज किसी भी डॅाक्टर का पुर्जा लेकर दवा दूकानदार के पास पहुंचते है तो पुर्जा पर लिखी दवाओं में अगर किसी के भी पुर्जा पर फेन्साड्रिल या कॅारेक्स लिखा हो तो साफ तौर पर दुकानदार इन्कार कर देते हैं कि उक्त दवा मेरे दुकान पर नहीं है। 
अगर वहीं नेपाली नागरिक या नशे के आदि हो चुके लोग पहुंच जाये तो उसे दोगुनी या तिगुनी कीमत लेकर बेरोकटोक दे दिया जाता है। इन नेपाली नागरिकों द्वारा भारतीय भूभाग में ही उक्त कफ सीरप को नशा सीरप समझकर पी बैठता है और नशे में झूमने लगता है।इनकी आंखें लाल लाल हो जाती है।
 एक नेपाली युवक से जब इस संदर्भ में पूछा गया तो उसने बताया कि शराब और इस प्रतिबंधित दवाओं के नशा में जमीन आसमान का अंतर है। शराब का नशा एक दो घंटे में समाप्त हो जाता है लेकिन कोरेक्सऔर फेन्साड्रिल का नशा चार से पांच घंटे तक मदहोश किये रहता है। इस कारण से सीमावर्ती बाज़ारों में इन दिनो कोरेक्स व फेन्साडिल कफ सीरप की बिक्री काफी हो रही है।
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