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महिलाएं बना रही सस्ता और अच्छी गुणवत्ता का सेनेटरी नेपकिन
By Deshwani | Publish Date: 9/2/2018 1:50:08 PM
महिलाएं बना रही सस्ता और अच्छी गुणवत्ता का सेनेटरी नेपकिन

बालाघाट । पढ़ी-लिखी महिलाओं और बालिकाओं को छोड़ दिया जाये तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्राय: महिलायें महावारी के दिनों में सेनेटरी नेपकिन का उपयोग नहीं करती है। लेकिन अब समय बदलने लगा है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं में स्वच्छता के प्रति जागरूकता आने लगी है। ऐसे में सेनेटरी नेपकिन बनाना और उसका गांवों में विक्रय करना मुनाफे का धंधा हो सकता है। मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन द्वारा इस बात को समझा गया है और बालाघाट जिले में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सेनेटरी नेपकिन तैयार करने के काम से जोड़ा गया है।

बालाघाट जिला मुख्यालय से लगे ग्राम गोंगलई की महिलाओं के एक समूह द्वारा सेनेटरी नेपकिन तैयार करने का कार्य प्रारंभ किया गया है। गोंगलई के सागर आजीविका स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गीता लिल्हारे ने बताया कि उनके समूह में 13 महिलायें शामिल है। इन महिलाओं ने एक माह पूर्व ही सेनेटरी नेपकिन बनाने का कार्य प्रारंभ किया है। एक माह में उनके द्वारा आजीविका ब्रांड के 3208 सेनेटरी नेपकिन के पैकेट बनाये गये हैं। प्रत्येक पैकेट में 8 पेड होते हैं। उनके द्वारा तैयार किये गये आजीविका ब्रांड का सेनेटरी नेपकिन बाजार में बिकने वाले अन्य ब्रांड के नेपकिन से सस्ता है।
गीता ने बताया कि उनके द्वारा तैयार आजीविका ब्रांड का सेनेटरी नैपकिन 8 पेड का पेकेट मात्र 25 रुपये में विक्रय किया जा रहा है, जबकि थोक में वे 22 रुपये पैकेट की दर से विक्रय कर रही है। गीता ने बताया कि उनके समूह की महिलाओं को नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में सेनेटरी नेपकिन बनाने वाली फर्म का भ्रमण कराया गया था। समूह की महिलाओं ने वहां पर इस काम को सीखा है और गोटेगांव की उसी फर्म से नेपकिन पैकेट बनाने के लिए कच्चा माल ला रही है। सेनेटरी नेपकिन के इस काम से समूह की महिलाओं को अच्छा काम मिल रहा है। एक पैकेट की पेकिंग पर एक रुपये की मजदूरी दी जाती है। एक महिला एक दिन में 240 पैकेट तैयार कर लेती है। सेनेटरी नेपकिन का पैकेट तैयार करने में स्वच्छता का बहुत अधिक ध्यान रखना होता है। समूह की महिलायें हाथों में दस्ताने पहन कर इस काम को अंजाम देती है।
गीता ने बताया कि उनके समूह द्वारा तैयार सेनेटरी नेपकिन गोंगलई, धनसुवा, बोरी, कटंगी, कोहकाडीबर, हीरापुर के गांवों में सप्लाय की गई है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में इसकी भारी मांग है। उनके इस धंधे को प्रारंभ हुए अभी एक माह भी नहीं हुआ है, लेकिन उनके द्वारा तैयार सेनेटरी नेपकिन महिलाओं में लोकप्रिय होते जा रही है। अपने इस उत्पाद को अधिक से अधिक महिलाओं एवं बालिकाओं तक पहुंचाने के लिए वे बालाघाट के कन्या विद्यालयों में भी सम्पर्क करने वाली है।
मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक ओमप्रकाश बेदुआ ने बताया कि बालाघाट जिले के सभी 10 विकासखंड से एक-एक महिला स्वयं सहायता समूह को आजीविका ब्रांड की सेनेटरी नेपकिन बनाने के काम से जोड़ा गया है। इन्हें पहले प्रशिक्षण दिलाया गया है। हाईजेनिक होने के कारण इसे बनाने में बहुत सावधानी रखनी पड़ती है। अब महिलायें कुशलता के साथ यह काम कर रही है। महिलाओं द्वारा तैयार सेनेटरी नेपकिन जिले में गठित स्वयं सहायता समूहों की मूहिलाओं द्वारा क्रय कर लिया जा रहा है।
 
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