राष्ट्रीय
आधार की अनिवार्यता के खिलाफ सुनवाई के लिए अगले हफ्ते संविधान बेंच का गठन
By Deshwani | Publish Date: 7/12/2017 1:26:18 PM
आधार की अनिवार्यता के खिलाफ सुनवाई के लिए अगले हफ्ते संविधान बेंच का गठन

नई दिल्ली, (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट आधार को अनिवार्य बनाये जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए अगले हफ्ते संविधान बेंच का गठन करेगी। आज याचिकाकर्ताओं के वकील श्याम दीवान ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन किया तो कोर्ट ने कहा कि वे अगले हफ्ते इस बेंच का गठन करेंगे।


मेंशनिंग के दौरान श्याम दीवान ने कहा कि सरकार द्वारा की गई समयसीमा खत्म होने को है| इसलिए उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए संविधान बेंच का गठन किया जाए। तब केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकार समय सीमा 31 मार्च तक बढ़ा सकती है। सरकार इसके बारे में कल यानि 8 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर सकती है।


पिछले 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आधार को अनिवार्य बनाये जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आधार को खातों और मोबाइल नंबरों से लिंक करने की अंतिम समय सीमा भी बढ़ाने से इनकार कर दिया था।


सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और टेलीकॉम सेवा देनेवाली कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे आधार को लिंक करने संबंधी सूचना भेजते समय उपभोक्ताओं को परेशान नहीं करें। वे लिंक करने की अंतिम तिथि का भी उल्लेख करें। बिना समय सीमा का उल्लेख किए कोई सूचना उपभोक्ता के पास न भेजें। बैंक खातों को आधार से लिंक करने की समय सीमा 31 दिसंबर है जबकि मोबाइल नंबर को लिंक करने की आखिरी तिथि 6 फरवरी है।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मसले को संविधान बेंच को भेज देना चाहिए। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि इसमें दो मसले हैं। एक सेवाओं से लिंक करने और दूसरा समय सीमा। श्याम दीवान ने कहा कि बैंक खातों से आधार को जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक संविधान बेंच इस पर कोई फैसला नहीं करता तब तक इसे बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जोड़ना अनिवार्य करने से केंद्र को रोका जाए।


इस मामले पर केंद्र सरकार ने एक हलफनामा भी दायर किया था जिसमें कहा गया था कि आधार के आंकड़े हैक या चुराये नहीं जा सकते हैं। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि आधार नहीं होने की वजह से किसी की मौत नहीं हुई है।



 

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