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योग हड्डियों-मांसपेशियों की समस्याओं की रोकथाम में कारगर : विशेषज्ञ
By Deshwani | Publish Date: 19/6/2017 6:23:57 PM
योग हड्डियों-मांसपेशियों की समस्याओं की रोकथाम में कारगर : विशेषज्ञ

नई दिल्ली, (हि.स.)। दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही भारत की प्राचीन विद्या - योग आर्थराइटिस, कार्पल टनल सिंड्रोम, टेनिस एल्बो, जोड़ों में दर्द, कमर एवं गर्दन दर्द, हड्डियों, जोड़ों और स्पाइन की अनेक समस्याओं में फायदेमंद है। लेकिन, गलत तरीके से योग करने पर मांसपेशियों एवं स्पाइन में खिंचाव, लिगामेंट फटने तथा अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 

 
जर्नल आफ रुमेटोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक, योगाभ्यास करने वाले आर्थराइटिस के मरीजों को योग से काफी अधिक शारीरिक एवं मानसिक लाभ होता है। जो लोग सप्ताह में तीन बार योगाभ्यास करते हैं, उन्हें योग नहीं करने वाले मरीजों की तुलना में दर्द के स्तर, शारीरिक ऊर्जा, मूड एवं शारीरिक स्वास्थ्य में काफी सुधार होता है।
 
आर्थोपेडिक एवं स्पाइन विशेषज्ञों का कहना है कि योग से हड्डियों के निर्माण में मदद मिलती है तथा आर्थराइटिस एवं ऑस्टियोपोरोसिस सहित कई मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों एवं मांसपेशियों की) समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है। 
अगर योग को सही तरीके एवं समुचित सावधानी के साथ नहीं किया जाए मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट के फटने और अन्य अधिक गंभीर नुकसान होने का भी खतरा हो सकता है। यह खतरा उन लोगों को अधिक होता है जिन्हें पहले से ही मस्कुलेस्केलेटल समस्याएं होती हैं। 
 
नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन प्रो. (डा.) राजू वैश्य ने कहा कि योग के नियमित अभ्यास से हड्डियां मजबूत और स्वस्थ बनती है। इससे शारीरिक पोस्चर में सुधार होता है तथा स्पाइनल कार्ड को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। योग की मदद से पीठ दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। योग मांसपेशियों को लचीला बना देता है, हड्डियों में रक्त संचरण को बेहतर बनाता है तथा कैल्शियम होमोस्टेसिस को बनाए रखने में मदद करता है और इस प्रकार यह ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है। 
 
डा. वैश्य ने कहा, समग्र स्वास्थ्य की दृष्टि से ‘योग के अनेक लाभ हैं जिनमें रीढ़ को स्वस्थ बनाए रखने तथा हड्डियों को मजबूत बनाए रखने जैसे लाभ प्रमुख हैं। सात से आठ सप्ताह तक योग करने के बाद ही हमारे शरीर का लचीलापन 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। कई योगाभ्यासों एवं योग मुद्राओं से शरीर के संतुलन में सुधार होता है और इसके कारण बुजुर्ग लोगों के चलने-फिरने के दौरान गिरने की आशंका काफी कम हो जाती है।
 
फोर्टिस हॉस्पिटल (नोएडा) के वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा कि हालांकि कोई भी उपचार विधि हर किसी को फायदा नहीं पहुंचाती। लेकिन योग के साथ ऐसे कई पहलू जुड़े हैं जिसके कारण योग को पीठ दर्द एवं गर्दन दर्द के इलाज में रामबाण माना जाता है। अनेक अध्ययनों से पता चलता है कि आठ सप्ताह तक हर सप्ताह कम से कम दो बार भी योग करें तो रीढ़ की ताकत, उसके लचीलेपन एवं झटके को सहने की शक्ति में काफी वृद्धि होती है जो कमर दर्द एवं गर्दन दर्द के मरीजों के पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण होता है।
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