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साठ फीसदी दलित भाजपा के साथ: प्रो. कठेरिया
By Deshwani | Publish Date: 13/1/2017 2:33:06 PM
साठ फीसदी दलित भाजपा के साथ: प्रो. कठेरिया

लखनऊ,  (हि.स.)।। भाजपा के दलित चेहरा और मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहे आगरा के सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया का दावा है कि उत्तर प्रदेश का 60 प्रतिशत दलित आज भाजपा के साथ है। 

उनका मानना है कि प्रदेश के दलितों का बसपा सुप्रीमो मायावती से मोह भंग हो गया है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद इटावा में जन्मे रामशंकर कठेरिया आगरा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उन्होंने दलित चेतना पर बहुत काम किया है और कई पुस्तकें भी लिखी है। हिन्दुस्थान समाचार के प्रदेश समाचार समन्वयक पीएन द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उनसे विस्तृत चर्चा की। प्रस्तुत है वार्ता के मुख्य अंश- प्रश्न-आप भाजपा का दलित चेहरा माने जाते हैं। इस चुनाव में दलितों का रुझान भाजपा के पक्ष में कितना होगा? जवाब-आज भाजपा के साथ सर्वसमाज खड़ा है। प्रदेश का 60 फीसदी दलित भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिये तैयार है। प्रश्न-बसपा सुप्रीमो मायावती दलितों के वोटों पर अपना एकाधिकार मानती हैं। फिर आप 60 प्रतिशत का दावा कैसे कर रहे हैं? जवाब-देखिये, मायावती ने दलितों के हित में कुछ नहीं किया। उन्होंने दलित चेतना के लिये बामसेफ और डीएस-4 जैसे संगठनों द्वारा चलाये जा रहे अभियानों को कुचला है। धीरे-धीरे दलितों को सारी जानकारी हो गयी। इससे उनका मायावती के प्रति अब मोह भंग हो गया है। रही बात भाजपा की तो उसने दलितों के मसीहा बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर से जुड़े हर स्थानों को प्रमुखता दी। उनके मिशन को आगे बढ़ाते हुये केंद्र की मोदी सरकार ने दलितों के लिये कई कल्याणकारी योजनायें शुरु की। इसके चलते इस वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अब भाजपा के पक्ष में एक जुट हो रहा है।
 प्रश्न-पहले भाजपा दलितों का मुद्दा लेकर बड़ी तेजी से चली थी, लेकिन दयाशंकर सिंह की घटना के बाद एकाएक इस अभियान में कमी क्यों आ गयी ? आप भी आजकल नेपथ्य में नजर आ रहे हैं। ऐसा क्यों ? जवाब-ऐसा कुछ नहीं है। पिछले दो महीने से पार्टी परिवर्तन यात्रा और अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थी। इसलिए लोगों को ऐसा लग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे, ''सबका साथ सबका विकास'' के साथ पार्टी आज भी दलितों के उत्थान को लेकर गंभीर है। हम उनके लिए अब स्वाभिमान सम्मेलन कर रहे हैं। भाजपा का एजेंडा कभी कमजोर नहीं होता। हम दलितों के पूर्ण विकास के लिए कृतसंकल्प हैं। प्रश्न-(साक्षी महाराज के हालिया बयान के संदर्भ में) भाजपा के लोग ऐसा बयान क्यों देते हैं? क्या पार्टी का कोई हिडेन एजेंडा है? जवाब-नहीं भाजपा का कोई हिडेन एजेंडा नहीं है। भाजपा का एजेंडा स्पष्ट है। हम विकास और सुशासन की बात करते हैं और वही डिलीवर भी करते हैं। भाजपा सत्ता के लिए राजनीति नहीं करती, वह देश और प्रदेश में व्यवस्था परिवर्तन चाहती है। ऐसा परिवर्तन जिसमें सबका साथ और सबका विकास निहित हो। रही बात साक्षी महाराज की तो वह उनका अपना निजी बयान हो सकता है। पार्टी का उससे कुछ भी लेना देना नहीं है। प्रश्न-आप भी तो हेट स्पीच के लिए अक्सर विवादों में रहे हैं। विश्व हिन्दू परिषद के नेता अरुण माहौर की हत्या के बाद आया आपका बयान भी काफी विवादास्पद रहा ? जवाब-यह पुराना मामला है। लेकिन, उस समय मैंने ऐसा कुछ नहीं बोला था, जिसे विवादास्पद कहा जा सके। दरअसल, आप लोगों (मीडिया) ने उस मामले को अनायास ही तूल दिया था। 
प्रश्न-विधानसभा चुनाव में जनता के बीच जाने के लिए आपके पास कौन-कौन से मुद्दे हैं? जवाब-देखिये, मैं पहले ही कह चुका हूं कि विकास और सुशासन हमारा मुख्य मुद्दा है। उत्तर प्रदेश की जनता यहां की सपा सरकार से ऊब चुकी है। जब से यह सरकार बनी है, प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहाल है और जनता भयभीत है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कुशासन और प्रदेश में लगातार हो रहे हत्या, लूट जैसी जघन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर भाजपा लगातार जनता के बीच में है। अब परिवर्तन का समय आ गया है। जनता वर्तमान सरकार को माफ नहीं करेगी। प्रश्न-लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश ने भाजपा को 71 और आपके सहयोगी अपना दल को दो यानी कुल 73 सांसद दिये। लेकिन, आरोप है कि आपके सांसद लोगों के साथ कनेक्ट नहीं हो रहे हैं? जवाब-ऐसा नहीं है। यह आरोप सरासर गलत है। ढ़ाई साल में मोदी जी के नेतृत्व में सभी सांसद जनहित की योजनाओं के लेकर गांव-गांव किसानों के बीच गये हैं। इस संबंध में मैं आपके सामने एक गांव का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहता हूं। सपा के गढ़ इटावा में भरथना क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान से मैंने हाल ही में केंद्र सरकार के कार्यक्रमों व योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि उनके गांव में उज्जवला योजना के अन्तर्गत 250 परिवारों को मुफ्त रसोई गैस (एलपीजी) कनेक्शन मिला, 150 शौचालय बन गये और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सात लोगों के आवास स्वीकृत हुये हैं। प्रधान ने यह भी बताया कि उनके गांव में बिजली नहीं थी लेकिन पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के माध्यम से अब गांव में बिजली पहुंच गयी है। प्रश्न-चुनाव के समय आपकी पार्टी में बाहरी लोगों की भर्ती तेज हो गयी है। ऐसे में नये लोगों को जब ज्यादा तरजीह मिलेगी और वे टिकट लेने में भी सफल हो जायेंगे तो क्या इससे पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव नहीं आयेगा? जवाब-देखिये बाहरी लोगों के आने का मतलब है कि पार्टी का जनाधार बढ़ा है और पार्टी चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने जा रही है। सियासत में जब भी कोई पार्टी प्रभावी भूमिका में आती है और लोगों को लगता है कि यह सत्ता में आयेगी तो अन्य दलों के लोगों का उस पार्टी के प्रति आकर्षण बढ़ना एक राजनीतिक स्वभाव है। लेकिन, जितने लोग चुनाव के वक्त आ रहे हैं, सभी को टिकट मिल जायेगा ऐसा कुछ भी नहीं है।
 वे सभी लोग बगैर किसी शर्त के पार्टी में शामिल हो रहे हैं। हां, जो निवर्तमान विधायक हैं, यदि वे जीतने की स्थिति में होंगे तो पार्टी उनपर गंभीरता से विचार कर सकती है। जहां तक पार्टी के कार्यकर्ताओं के आक्रोश की बात है, भाजपा के कार्यकर्ता पार्टी के प्रति समर्पित होते हैं। वे कुशासन से मुक्ति हेतु किसी भी त्याग के लिए सदैव तैयार रहते हैं। प्रश्न-आपकी पार्टी अभी तक मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं पेश कर पायी है। ऐसे में चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जायेगा? जवाब-भाजपा में चेहरे की कोई कमी नहीं है। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कुशल नेतृत्व प्राप्त है। राज्य में प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का नेतृत्व है। जहां तक मुख्यमंत्री की बात है, उसका चुनाव पार्टी का संसदीय बोर्ड करता है। प्रश्न-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ कह रहे हैं कि पार्टी का कोई नेता अपने परिजनों व रिश्तेदारों के लिये टिकट की मांग न करे। लेकिन, खबर है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अपने परिवार वालों के लिए टिकट मांग रहे हैं। क्या अब भाजपा में भी परिवारवाद को बढ़ावा मिलेगा? जवाब-देखिये, भाजपा में न कभी परिवारवाद रहा है और न ही रहेगा। लेकिन, पार्टी के किसी नेता के बेटी-बेटियां यदि सक्रिय राजनीति में हैं और पार्टी के लिए लगातार संघर्षरत हैं तो उनपर टिकट के लिए विचार करना कहीं से भी परिवारवाद नहीं है। प्रश्न-प्रदेश की सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के विवाद को आप कैसे देख रहे हैं ? चुनाव में कुनबे के इस विवाद का फायदा किसको मिलेगा? जवाब-सपा की यह सोची समझी चाल है। पांच साल के कुशासन से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सत्तारुढ़ दल के चुनावी रणनीति का यह पहला चरण है। जनता को मूर्ख बनाने के लिए यह सब हो रहा है। नामांकन प्रक्रिया शुरु होते ही ये सब एक हो जायेंगे। इससे किसी को फायदा नुकसान नहीं होने जा रहा है। भाजपा काफी आगे जा चुकी है। चुनाव बाद हम सरकार बनाने जा रहे हैं। प्रश्न-चुनाव में आप भाजपा को कहां देख रहे हैं? जवाब-पूर्ण बहुमत की दशा में। हम ही नहीं प्रदेश की जनता भी देख रही है। जनता ने मन बना लिया है। वह हमें पूर्ण बहुमत देने जा रही है। प्रश्न-इसके लिये आपको अग्रिम बधाई। जवाब-बहुत-बहुत धन्यवाद। 
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