झारखंड
12 घंटे बाद मुक्त हुए एसपी सहित एक दर्जन अधिकारी
By Deshwani | Publish Date: 25/8/2017 7:36:21 PM
12 घंटे बाद मुक्त हुए एसपी सहित एक दर्जन अधिकारी

खूंटी, (हि.स.) । बारह घंटे तक ग्रामीणों के बंधक बने एसपी और अन्य पुलिस अधिकारी सहित अन्य जवान शुक्रवार को सुबह लगभग आठ बजे मुक्त हुए। यदि कहें कि पूरा जिला प्रशासन ही 12 घंटे ग्रामीणों की गिरफ्त में रहा। जानकारी के अनुसार पुलिस उप महानिरीक्षक अमोल वेणुकांत होमकर और डीसी डा मनीष रंजन द्वारा ग्रामीणों को समझाने और उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिये जाने के बाद ग्रामीणों ने सभी अधिकारियों को छोड़ दिया। बता दे कि खूंटी थाना की मुरही पंचायत के कंकी गांव में उग्र ग्रामीणों ने रांची के एसपी अष्विनी कुमार सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी प्रणब कुमार पाल, कार्यपालक दंडाधिकारी रवींद्र गागराई, खूंटी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रणवीर सिंह, तोरपा के एसडीपीओ नाजीर अख्तर, खूंटी के थानेदार इंस्पेक्टर अहमद अली, तोरपा के थानेदार अमित तिवारी, कर्रा के थाना प्रभारी उदय कुमार गुप्ता, मुरहू के थाना प्रभारी अरूण कुमार तिवारी के अलावा कई पुलिस कर्मियों को गुरुवार को रात आठ बजे से बंधक बना लिया। शुक्रवार को सुबह डीआईजी और डीसी सहित कई अधिकारी कंकी गांव पहुंचे। उनकी पहल के बाद ग्रामीणों ने सभी अधिकारियों को छोड़ दिया।

क्यों उग्र हुए ग्रामीण
जानकारी के अनुसार पुलिस को कंकी गांव के पास पत्थर खदान में फायरिंग की सूचना मिली थी। उसकी जांच के लिए गुरुवार शाम लगभग सात बजे एसडीपीओ रणवीर सिंह अनके अंगरक्षक और खूंटी थाना प्रभारी अहमद अली कंकी गांव गये थे। कंकी गांव घुसने के पहले एक बैरियर लगा था। पुलिस ने उसे हटा दिया। बैरियर हटा कर पुलिस अधिकारी पत्थर खदान पहुंचे और फायरिंग के मामले की जांच की। उन्हें वहां कुछ नहीं मिला। जब एसडीपीओ और अन्य पुलिस कर्मी खदान से लौटने लगे, तो कंकी के पास ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। एसडीपीओ ने ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। मामले की जानकारी मिलने पर एसपी अष्विनी कुमार सिन्हा, एसडीओ प्रणब कुमार पाल और कार्यपालक दंडाधिकारी रवींद्र गागराई कंकी गांव पहुंवे और गामीणों को समझाने का प्रयास किया, पर ग्रामीणों ने उन्हें भी घेर लिया। पुलिस अधिकारी छोड़ने के लिए मिन्नतें करते रहे, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि रात को कोई बात नहीं होगी। जो भी बात होगी, सुबह होगी। मामले की जानकारी मिलने पर तोरपा के एसडीपीओ नाजीर अख्तर, थाना प्रभारी अमित कुमार तिवारी के अलावा कर्रा और मुरहू के थानेदार भी कंकी पहुंचे पर ग्रामीणों ने उन्हें भी बंधक बना लिया। शुक्रवार सुबह सात बजे कंकी पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया-बुझाया। एक घंटे के बाद डीसी भी वहां पहुंचे। बाद में ग्रामीणों और और प्रषासनिक अधिकारी की एक बैठक हुई। बैठक में डीसी ने कहा कि प्रयाासन आपका है। आपको कोई भी समस्या हो, तो आप आयें आपकी हर शिकायत सुनी जायेगी। बैठक में डीआईजी और डीसी ने ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। 
प्रशासन ने काफी संयम से काम लिया
ग्रामीणों द्वारा प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को 12 घंटे तक बंधक बनाये रखने के संबंध में एसडीओ प्रणब कुमार पाल ने कहा कि प्रशासन ने काफी संयम से काम लिया। यदि प्रषासन ने सूझ-बूझ का परिचय नहीं दिया होता, तो स्थिति बिगड़ सकती थी।
कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान
जिला प्रशासन के 12 घंटों तक कब्जे में रहने के मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब एसपी और अन्य आला अधिकारी 12 घंटे तक ग्रामीणों के चंगुल में रह सकते हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? लोगों ने कहा कि राज्य की यह संभवतः पहली घटना है, जब कोई एसपी 12 घंटे तक लोगों के चंगुल में फंसा रहा। उन्होंने कहा कि खूटी में ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प की यह कोई पहली घटना नहीं है। आये दिन इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। कई बार जिले के पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को ग्रामीण बंधक बना चुके हैं। 
रात भर जमीन पर बैठे रहे अधिकारी
ग्रामीणों के बंधक बने एसपी अष्विनी कुमार सिन्हा सहित अन्य सभी अधिकारी और पुलिसकर्मियों को रात भर ग्रामीणों ने जमीन पर बैठाये रखा। बंधक बने एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें लघुशंका के लिए भी निकलने नहीं दिया जाता था। काफी मिन्नत करने के बाद 20-25 लोग उन्हें भीड़ से किनारे ले जाते थे। अधिकारी ने कहा कि भीड़ ने उनके साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया 
पुलिस अधिकारियों को मुक्त करने के बाद ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसमें पूरी स्थिति की चर्चा की गयी। बैठक में पुलिस की कार्यशैली की निंदा की और कहा कि पुलिस जानबूझ कर ग्रामसभा के मामले में दखल देना चाहता है। कहा गया कि पुलिस ने भीड़ से बचने के लिए हवाई फायरिंग भी की। इसके बाद भी स्थिति बिगड़ी। बैठक में घटना के विरोध में खूंटी में रैली निकालने और प्रदर्षन करने की सहमति बनी। हालांकि शुक्रवार को ग्रामीण कहीं नहीं दिखे।
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