बिहार
जनवितरण प्रणाली बदहाल,उपभोक्ता व विक्रेता दोनों परेशान
By Deshwani | Publish Date: 10/6/2017 4:32:04 PM
जनवितरण प्रणाली बदहाल,उपभोक्ता व विक्रेता दोनों परेशान

कटिहार, (हि.स.)। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना अन्तर्गत सरकार गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को सस्ती दरों पर उत्तम खाद्यन्न उपलब्ध करवा रही है। ताकि उन्हें खाद्य एवं पोषण की सुरक्षा मिले और वे सम्मान के साथ जीवन जी सके। ऐसे परिवारों को प्रतिमाह दो किलोग्राम गेहूँ और तीन किलोग्राम चावल रियायती दर पर और अन्त्योदय अन्नयोजना में शामिल परिवारों को प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न का प्रावधान सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है। लेकिन यह योजना प्रशासनिक उदासीनता के कारण खाद्य सुरक्षा अधिनियम के मूल रूप से भटक गई है। हर तरफ लूट खसोट बेझिझक जारी है। कटिहार जिले के राशन कार्ड उपभोक्ता डीलर की कालाबाजारी से परेशान हैं तो डीलर आला अधिकारियों के कमीशन से। कटिहार जिले के कई पंचायत के राशन कार्ड उपभोक्ताओं ने बताया कि जनवितरण बिक्रेता मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि उनके द्वारा प्रति परिवार राशन एक से डेढ़ किलोग्राम कम दिया जाता है और सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से पचास पैसा प्रति किग्रा ज्यादा लिया जाता है। इसके बावजूद गेहूँ और चावल में धूल और कण की मात्रा अधिक रहती है। उपभोक्ताओं ने बताया कि कभी कभी राशन में धूल और कंकड़ की मात्रा इतनी अधिक होती है कि पालतू जानवर भी इसे खाने से परहेज करते हैं। उपभोगताओं से ज्यादा रकम और कम वजन देने की बात पर जनवितरण प्रणाली विक्रेताओं का जवाब चौकाने वाला था। डीलरों ने बताया कि अग्रिम ड्राफ्ट लगाने के बाद गोदाम से राशन उठाव के समय एजीएम और लेवर को लोडिंग और अनलोडिंग के लिए रुपये देने पड़ते हैं। उठाव किया गया राशन 50 किग्रा प्रति बोरा के हिसाब से नापकर नहीं बोलकर मिलती है। डीलरों का आरोप है कि प्रति बोड़ा दो से तीन किग्रा कम राशन गोदाम से कम मिलता है। अब वितरण से पहले प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी से रजिस्टर में हस्ताक्षर करवाने के ऐवज में एमओ साहब को प्रति क्विंटल 15 से 20 रुपया देना पड़ता है। इस स्थिति में उपभोक्ताओं को मजबूरी में एक से डेढ़ किलो अनाज काम और पैसा ज्यादा लेना पड़ता है। 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार केन्द्र और राज्य सरकार की साझेदारी से यह सिस्टम चलती है। केंद्रीय सरकार राशन खरीद, भंडारण, परिवहन और आवंटन के लिए जिम्मेवार है, जबकि राज्य सरकार के पास उचित मूल्य की दुकान के स्थापित नेटवर्क के माध्यम से उपभोक्ताओं तक राशन वितरण की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की पहचान, राशन कार्ड जारी करने आदि की जिम्मेदारी और निगरानी करती है।
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