झारखंड
झारखंड लोक सेवा आयोग का विवादों से पुराना नाता
By Deshwani | Publish Date: 11/2/2018 5:06:09 PM
झारखंड लोक सेवा आयोग का विवादों से पुराना नाता

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का विवादों से पुराना नाता रहा है। छठी सिविल सेवा परीक्षा को लेकर जेपीएससी एक बार फिर विवादों में घिर गयी है। जिसे लेकर आखिरकार सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने छठी सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में कट ऑफ मार्क्स कम कर दिया है। अब सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। आदिवासी छात्र संघ और आरक्षण अधिकार मोर्चा इसके विरोध में खुलकर सामने आ गया है।

संघ और मोर्चा के नेताओं का कहना है कि पीटी में पास बाहरी अभ्यथियों को बचाने के लिए अतिरिक्त पीटी का रिजल्ट घोषित करने का निर्णय लिया गया है। पीटी परीक्षा में न्यूनतम कट ऑफ मार्क्स लाने वाले अभ्यार्थी भी अब मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे। राज्य मंत्रि परिषद की पिछली बैठक में इसकी मंजूरी दे दी गयी है। पहले प्रकाशित रिजल्ट के अनुसार सिर्फ छह हजार छात्रों ने पीटी पास किया था। अब 34 हजार छात्र सफल घोषित होंगे। 
जेपीएससी की छठी सिविल सेवा परीक्षा लगातार विवादों में रही है। यही वजह है कि इसके लिए 2015 में शुरू हुई प्रक्रिया तीन वषों में भी पूरी नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि तीन साल में यह प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) से आगे नहीं बढ़ पायी है। इस दौरान किसी न किसी कारणवश मुख्य परीक्षा तीन बार टल गयी। 
जेपीएससी की छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की तिथि इस साल 29 जनवरी से सात फरवरी तक निधारित थी लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध पर जेपीएससी ने इसे अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दी है। विधान सभा के बजट सत्र में जेपीएससी का मामला उठा था। विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने यह मामला उठाते हुए कहा था कि पीटी के रिजल्ट में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है। सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर से जेपीएससी की मुख्य परीक्षा स्थगित करने की जोरदार मांग पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आश्वासन दिया था कि कैबिनेट की बैठक में विचार कर इस पर फैसला करेंगे। कैबिनेट की बैठक के बाद कार्मिक विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने जेपीएससी के सचिव को पत्र भेज कर कहा है कि पीटी परीक्षा को लेकर सरकार कुछ नीतिगत फैसला करने जा रही है। इसलिए मुख्य परीक्षा फिलहाल स्थगित किया जाए। इसके बाद जेपीएससी ने अगले आदेश तक मुख्य परीक्षा स्थगित करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
दरअसल छठी जेपीएससी की पीटी परीक्षा का रिजल्ट निकलने के समय से ही विवाद चल रहा है। पीटी का रिजल्ट दो बार निकाला गया। फिर भी छात्र संतुष्ट नहीं थे। क्योंकि इसमें आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया। इसके लिए छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे लेकिन सरकार का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा था। इसी बीच यह मामला विधान सभा के बजट सत्र में उठा था। यह पहला मौका नहीं है, जब मुख्य परीक्षा स्थगित की गई हो। पूर्व में भी दो बार परीक्षा की तिथि घोषित करने के बाद किसी न किसी कारण जेपीएससी छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा स्थगित कर चुकी है। कायदे से जेपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा हर साल होनी चाहिए लेकिन झारखंड में 17 साल में अब तक केवल पांच परीक्षाएं हुई हैं। इनमें से दो की सीबीआई जांच चल रही है।
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