झारखंड
झामुमो एक बार फिर विभाजन की ओर
By Deshwani | Publish Date: 10/10/2017 5:08:29 PM
झामुमो एक बार फिर विभाजन की ओर

रांची,( हि.स.)। झारखंड में विपक्ष की एकजुटता के प्रयासों के बीच मुख्य विपक्षी दल झामुमो एक बार फिर विभाजन की ओर बढ़ रहा है। झारखंड आंदोलनकारी और पूर्व सांसद कृष्णा मार्डी ने झामुमो( मार्डी ) नाम से एक अलग गुट बनाया है। हालांकि मार्डी ने इसकी औपचारिक घोषणा अभी नहीं की है। मार्डी के करीबी सूत्रों के अनुसार इसकी विधिवत घोषणा झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष विनोद बिहारी महतो की पुण्य तिथि 18 दिसम्बर को किये जाने की सम्भावना है।
सूत्रों के अनुसार कृष्णा मार्डी ने पिछले महीने झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के बैनर तले बोकारो जिले के बेरमो में हुई बैठक में ही झामुमो का अलग गुट बनाने का संकेत दे दिया था। उस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आये झामुमो से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी का अलग गुट बनाने का सुझाव दिया था। वक्ताओं ने झामुमो के वरिष्ठ नेताओं पर स्वार्थ की राजनीति करने और सत्ता में रहते हुए आम झारखंडियों तथा झारखंड आंदोलनकारियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था। कुछ लोगों ने तो यह भी कहा था कि झामुमो बाप-बेटे की पार्टी बन कर रह गयी है।
 
यह पहला मौका नहीं है जब झामुमो विभाजन की ओर बढ़ रहा है। इसके पूर्व केन्द्र की नरसिंह राव सरकार को समर्थन देने या नहीं देने के सवाल पर 1992 में झामुमो का विभाजन हुआ था। तब झामुमो( सोरेन) और झामुमो (मार्डी) गुट बना था। इसके कारण झारखंड आंदोलन कमजोर पड़ने लगा था। काफी प्रयास के बाद 1998 में फिर दोनों गुटों का विलय हुआ था। झामुमो में पहली बार विभाजन 1984 के राज्यसभा चुनाव के दौरान शिबू सोरेन और विनोद बिहारी महतो के बीच मतभेद के बाद हुआ था। विनोद बिहारी महतो ने उस चुनाव में भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के चतुरानन मिश्र को समर्थन देने की घोषण की थी लेकिन शिबू सोरेन पर आरोप लगा था कि उन्होंने पांच विधायकों का वोट कांग्रेस के पक्ष में दिलवा दिया है। इसी कारण महतो ने सोरेन को छह साल के लिये पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके चलते पार्टी दो फाड़ हो गयी थी। तब झामुमो (विनाेद) और झामुमो( शिबू) गुट बना था।
शिबू सोरेन ने उस वक्त निर्मल महतो को अपने गुट का अध्यक्ष बनाया था। झामुमो के पास उस समय 11 विधायक थे। इनमें से छह विधायक विनोद गुट में और पांच शिबू गुट में गये थे। जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद शैलेन्द्र महतो और कुछ अन्य नेताओं के प्रयास से 1989 में दोनों गुटों का विलय हो गया था। इसके बाद झामुमो की ताकत बढ़ी और 1990 के विधान सभा चुनाव में झामुमो के 19 विधायक जीत कर आये थे। उस समय टुंडी से चुनाव जीते विनोद बिहारी महतो विधायक दल के नेता बने थे जबकि दुमका से सांसद शिबू सोरेन संसदीय दल के नेता थे। लोकसभा के लिये 1991 में हुए चुनाव में झामुमो के कुल छह सांसद जीत कर आये थे लेकिन 1992 में केन्द्र की कांग्रेस सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर पार्टी टूट गयी थी।
 
गौरतलब है कि एकीकृत बिहार में 1972 में झामुमो का गठन हुआ था । उस समय विनोद बिहारी महतो अध्यक्ष, शिबू सोरेन महासचिव और टेक लाल महतो कोषाध्यक्ष बने थे। सूत्रों की मानें तो 2000 में झारखंड अलग राज्य बनने और विनोद बिहारी महतो के निधन के बाद से ही झामुमो के अंदर कलह बढ़ती जा रही है। पार्टी पर सोरेन परिवार का कब्जा होने के आरोप लगने लगे हैं। 
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