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झारखंड
धर्म संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश
By Deshwani | Publish Date: 12/8/2017 4:47:27 PM
धर्म संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश

रांची, (हि.स.)। झारखंड सरकार ने विधानसभा के मॉनसून सत्र के पांचवें दिन धर्म संशोधन विधेयक पेश कर दिया। झामुमो के विधायक स्टीफन मरांडी ने इसे प्रवर समिति (स्टेडिंग कमिटि ) को भेजने को कहा। मरांडी ने कहा कि धर्म संशोधन विधायक मौलिक अधिकारों का हनन है । किसी भी व्यक्ति को अपने मन से किसी भी धर्म को स्वीकार करने का अधिकार है । ऐसे में यह बिल लाकर प्रदेश सरकार लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन करना चाहती है।
विधायक मरांडी ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो संविधान का भी निर्माण हुआ और उसमें स्पष्ट रूप से यह कानून बनाया गया कि जिसके तरह भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 294 (ए) में जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर सजा का प्रावधान है । सरकार जो कानून लेकर आयी है, उसमें धर्म परिवर्तन के लिए प्रशासन से इजाजत लेने की बात कही गयी है, जो गलत है। उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसलिए इसे प्रवर समिति को भेजा जाये।
 
स्टीफन मरांडी के प्रश्नों के आलोक में भाजपा विधायक राधाकृष्ण किशोर ने बहस में भाग लेते हुए कहा कि इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है। यह पहले ही आ जाना चाहिए था। इसमें डेढ़ दशक से अधिक की देरी हो चुकी है। लेकिन, सरकार विधेयक लाने के लिए बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि विधेयक में हर चीज की बारीकी से व्याख्या की गयी है। इसी तरह से कानून का अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। भाजपा विधायक ने कहा कि वर्ष 2011 में राज्य में 10,90,283 क्रिश्चियन थे, आज उनकी संख्या 14,18,783 हो गयी है। यह वृद्धि 30 प्रतिशत के पास है । सबसे ज्यादा धर्मांतरण झारखंड में हुआ है। आज झारखंड का सिमडेगा ईसाई बाहुल जिला बन गया है । उन्होंने कहा कि राज्य के दलितों का और गरीबों का धर्म परिवर्तन हो रहा है। ऐसी जगहों पर पहुंच कर उन्हें भड़काया जाता है, उन्हें अनाज के नाम पर, शिक्षा देने के नाम पर धर्म बदलने को मजबूर किया जाता है।
 
बहस में बाग लेते हुए निर्दलिय विधायक भानुप्रताप शाही ने कहा कि हर धर्म के लोगों की अपनी आस्था है। यह बिल लाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सनातन धर्म सिकुड़ रह है, इसे बचाने की जरूरत है। यह सारे धर्मों की रक्षा के लिए है। ऐसे बिल का सारे लोगों को समर्थन करना चाहिए । भाजपा विधायक शिवशंकर उरांव ने विधेयक का समर्थन किया और कहा कि सनातनधर्मी को प्रकृति धर्मी भी कहते हैं। सभी धर्मों का मूल सनातन धर्म है। इसे अगर बचाना है, तो पूजा-पाठ का सनातन तरीका अपनाना होगा। कोई धर्म बदलने के लिए जबरन आकर्षित करने की कोशिश करे, यह गलत है. उन्होंने कहा कि गांव में जाकर लोगों को प्रलोभन दिया जाता है. इस बिल को पास करना जरूरी है। आनेवाले दिनों में यह बिल लोगों का मनोबल बढ़ायेगा। कोई धर्मांतरण करानेवालों के झांसे में नहीं आयेगा।
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