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धरती को चलो इस बार न्यायपूर्ण ढंग से चलाये!
By Deshwani | Publish Date: 16/1/2017 2:21:14 PM
धरती को चलो इस बार न्यायपूर्ण ढंग से चलाये!

 आईपीएन। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पद छोड़ने से पूर्व राष्ट्र के नाम अपने आखिरी संबोधन में देश के समक्ष उत्पन्न खतरों को लेकर आगाह किया। 20 जनवरी 2017 को देश के राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता मुस्लिमों समेत सभी अल्पसंख्यकों और अश्वतों से भेदभाव सहन नहीं करेगा। ओबामा ने माना कि आर्थिक असमानता के कारण नस्लीय विभाजन में तेजी आई है। अल्पसंख्यकों और लैटिन मूल के अमेरिकी नफरती हमलों का शिकार हुए हैं। इस सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए उन्होंने ठोस कानून व्यवस्था, शिक्षा, नौकरियों और घर के अलावा हृदयों में एकता लाने की वकालत की। उन्होंने अपनी पत्नी मिशेल को बीते 25 साल से पत्नी, बच्चों की मां होने के साथ-साथ अच्छी दोस्त भी बताया। मिशेल का नाम ले वे रो पड़े। ओबामा का अपनी पत्नी के प्रति अत्यधिक सम्मान की भावना अनुकरणीय है। विश्व के एक सुलझे हुए वल्र्ड लीडर ओबामा की न्यायपूर्ण तथा हृदयों की एकता की नसीहत से अमेरिका सहित सभी देशों को सीख लेनी चाहिए।

राष्ट्रपति पद संभालने से पहले ही डाॅनल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोट्र्स में दावा किया गया है कि रूस के पास डाॅनल्ड ट्रंप का सेक्स वीडियो है, जो ट्रंप को ब्लैकमेलिंग का जरिया बन सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप को भी इस बारे में जानकारी दी है। हालांकि ट्रंप ने इन खबरों को फर्जी बताया है। विश्व के सबसे शक्तिशाली देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति पर इस तरह के आरोप तथा ब्लैकमेलिंग की खबरें चिन्ता का विषय है। विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में होने वाली हर घटना का असर सारी दुनिया पर पड़ता है। विश्व के प्रत्येक देश को आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी न्यायपूर्ण रणनीति बनाना चाहिए।  
अमेरिका नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दामाद जैरेड कशनर को व्हाइट हाउस में टाॅप एडवाइजर का पद दिया है। ट्रंप के इस ऐलान के बाद कई कानूनी और नैतिक चिंताओं को जन्म दे दिया है। कशनर को ट्रंप के चुनावी अभियान की रीढ़ कहा जाता है। जैरेड कशनर को व्हाइट हाउस में टाॅप एडवाइजर बनाये जाने के लिए हमारी ओर से हार्दिक बधाइयां हैं। हम आशा करते है कि जैरेड कशनर की सलाह से ट्रंप अमेरिका और दुनिया के बेहतर तथा न्यायपूर्ण नीतियां बनाएगे। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान न्यायपूर्ण तथा शान्तिपूर्ण तरीकों से खोजने का साहस दिखायेंगे।
आशंका व्यक्त की जा रही है कि यदि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको और चीन के साथ व्यापार युद्ध छेड़ा तो उससे भारत को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उद्योग मंडल एसोचैम ने यह राय जताई है। उद्योग मंडल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में भारत को अपने व्यापारिक हितों के संरक्षण के लिए पहले से ही कदम उठाने चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के बदले रूख से सूचना प्रौद्योगिकी के साथ अमेरिका बाजार को कुछ चुनिंदा वस्तुओं का भारत का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है। भारत को वैश्विक समझदारी तथा जागरूकता का परिचय देना चाहिए। भारत ने विश्व को बाजार की दृष्टि से नहीं वरन् एक कुटुम्ब की दृष्टि से सदैव देखा है। भारत को अपनी न्यायपूर्ण तथा व्यापक हित की नीति पर ही चलना चाहिए।
पाकिस्तान के द नेशन के अनुसार बीते सलमान हैदर के गायब होने के बाद से ही उंगलियां हुकूमत की ओर उठने लगी हैं कि कहीं इसमें उसका हाथ तो नहीं है! सलमान हैदर वही शख्स हैं, जिन्होंने बलूचिस्तान में अगवा किए जा रहे लोगों की आवाज हमेशा बुलंद की। मगर अब वह खुद ठीक उसी हालात में गायब हो गए हैं, उनकी भी कोई खोज-खबर नहीं मिल रही। इसके अलावा और भी व्यक्ति लापता हैं। अभिव्यक्ति की आजादी जैसे बहुमूल्य अधिकार की रक्षा करने में पाकिस्तान विफल रहा है। पाकिस्तानी जनता इस अन्याय से परेशान है।
जहां एक खबर के अनुसार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चार हजार से अधिक आतंकी और जम्मू कश्मीर के लापता 4088 लोग मौजूद हैं। राज्य सरकार ने यह जानकारी जम्मू कश्मीर की विधानसभा में दी है। जम्मू कश्मीर के हजारों लापता लोग अब भी पाकिस्तान और पीओके में रह रहे हैं। इसके अतिरिक्त चार हजार आतंकी भी पीओके में मौजूद हैं। इस बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के प्रयास तेजी से करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का पनडुब्बी से सतह पर मार करने वाली परमाणु मिसाइल बाबर-3 के सफल परीक्षण का दावा झूठा प्रतीत हो रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने ऐसे परीक्षण की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि पाक ने कंम्प्यूटर ग्राफिक्स की मदद से मिसाइल लांचिग का वीडियो तैयार किया है। लाॅचिंग के बाद मिसाइल के रास्ते को देखते हुए भी ऐसा लगता है।  
वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार के अनुसार रोहिंग्या मुसलमानों का नाम सुनते ही पहली नजर में जो दृश्य हमारे सामने आता है वह है नावों पर भारी संख्या में सवार होकर मैले-कुचैले वस्त्रों में भागते लोगों का जिनके पास खाने तक के लाले हैं। जिस तरह थाइलैंड के किनारे से 2015 में दो ऐसी नावों के पकड़े जाने की खबरें आई उनसे किसी का भी दिल दहल जाएगा। रोहिंग्या बंगलाभाषी हैं। माना जाता है कि उनका मूल स्थान वह जगह है जहां आज बंगलादेश है। उनमें से कुछ को म्यानमार ले जाया गया और वे वहीं बस गए। अनुमान के अनुसार म्यानमार में इनकी संख्या 10 लाख से थोड़ी ज्यादा होगी। आज समस्या यह है कि बंगलादेश उनको अपने यहां बसाने को तैयार नहीं है और म्यानमार उन्हें अपना नागरिक मानता नहीं। इस समस्या का समाधान पूरी दुनिया को मिलकर ढूंढ़ना है, यह अकेले भारत के बस की बात नहीं।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में संसद के निकट हुए आत्मघाती हमले और कार बम धमाके में 30 लोग मारे गए। धमाका ऐसे वक्त हुआ, जब संसदकर्मी कामकाज खत्म कर परिसर से बाहर निकल रहे थे। हमले में 80 से ज्यादा लोग घायल भी हैं। बेकसूर लोगों की जान लेने तथा घायल करने की इस दर्दनाक घटना की जितनी निंदा की जाये कम है। आतंकवादी घटना अब किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई वरन् यह अन्तर्राष्ट्रीय समस्या बन गयी है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के सभी देशों को एकजुट होकर आतंकवाद से सख्ती से निपटना चाहिए।
इंटरनेट उपभोक्ताओं की गतिविधियों, पसंद-नापसंद की जानकारी चुराकर अरबों डाॅलर की कमाई करने वाली गूगल, फेसबुक-व्हाट्सएप जैसी कंपनियों को यूरोपीय संघ (ईयू) ने तगड़ा झटका दिया है। ईयू के पेश नए विधेयक के मुताबिक, इंटरनेट कंपनियां उपभोक्ताओं की स्पष्ट इजाजत के बिना उनकी जानकारियां खंगाल नहीं पाएंगी। ईयू के नए प्रस्ताव से उनकी कमाई गिरेगी। 230 अरब डाॅलर का सालाना विज्ञापन दांव पर है। यूरोपियन यूनियन की रोक से गूगल, फेसबुक जैसी वेबसाइटों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। जिससे वे निःशुल्क सेवा देने में परेशानी महसूस करेगी। यूरोपियन यूनियन का असर गूगल, फेसबुक का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर नहीं पड़़ना चाहिए। ये विश्व के प्रत्येक व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बड़ा माध्यम हैं। यह मानव जाति का बहुमूल्य अधिकार है जिसकी रक्षा न्यायपूर्ण ढंग से की जानी चाहिए। 
वैश्विक युग में आज विश्व का हर युवा यह चाहता है कि वह ऐसे करियर का चुनाव करे, जहां उसे मान-सम्मान के साथ ऐसी नौकरी भी मिले, जहां अच्छी सेलरी हो। ऐसे में इंजीनियरिंग का नाम पहली कतार में आता है। आईटी सेक्टर हो या मैन्युफैक्चरिंग डिजाइन, इंजीनियर्स की मांग हर जगह है। युवा पीढ़ी में अपनी प्रतिभा को सारी दुनिया में घूमकर दिखाने के अनेक अवसर तकनीकी तथा संचार माध्यमों के नये-नये आविष्कारों ने उपलब्ध कराये हैं। इन अवसरों ने युवकों के अन्दर सीमा रहित विश्व का जज्बा पैदा किया है। वे अब युद्धमुक्त तथा आतंकवाद मुक्त विश्व चाहते हैं। गुफाओं से प्रारम्भ हुई मानव सभ्यता अब अपने स्वर्णिम युग में प्रवेश करने से बस एक कदम दूर है। 
दुनिया भर में होगी भारत की जोरदार पहुंच होने के प्रमाण हाल ही में बंग्लौर में आयोजित हुए चैदहवें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन देखने को मिले। सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में पधारे पुर्तगाल के प्रधानमंत्री डाॅ0 एंटोनियो कोस्टा विश्व के 72 देशों के प्रवासी भारतीयों के सम्मुख आकर भावुक हो गए और भारत की भूमि के साथ अपने पूर्वजों के रिश्तों पर गर्व जताते हुए जेब से निकाल कर अपना पीआईओ कार्ड दुनिया को दिखाया। भारतीय मूल के लोग सारी दुनिया में धूम मचा रहे हैं। प्रवासी भारतीयों को एकजुट करने का यह अच्छा प्रयास है। इससे भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् की आवाज सारी दुनिया में पहुंचेगी। भारत की पहल पर विश्व एकता के लिए एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने में सहायता मिलेगी। धरती को न्यायपूर्ण ढंग से चलाने का अंतिम विकल्प तथा सुअवसर मानव जाति के पास बचा है? अभी नहीं तो कभी नहीं? 
(लेखक चर्चित स्तम्भकार हैं। उपर्युक्त लेख लेखक के निजी विचार हैं।)
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