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इन्होंने बदल दिया ब्लांइड क्रिकेट का रूप
By Deshwani | Publish Date: 13/2/2017 3:36:30 PM
इन्होंने बदल दिया ब्लांइड क्रिकेट का रूप

रमेश ठाकुर

आईपीएन। बदलाव की फिजा जब बहती है तो, इतिहास अपने आप बन जाते हैं। फिर किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती। ब्लाइंड क्रिकेट वल्र्ड कप में पाकिस्तान पर भारत की जीत से पूरा देश गदगद है। सभी देशवासी इस जीत का जश्न मना रहे हैं। दरअसल यह जीत हम सभी के लिए बहुत मायने रखती है। हिंदुस्तान के ग्यारह स्पेशल क्रिकेटरों ने सफलता के फलक पर नई लकीर लिख दी है। ऐसी सफलता जिसे सिर्फ सपनों में निहारी जाती हो। रविवार को मैदान में जब ये स्पेशल ग्यारह खिलाड़ी उतरे तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि आज का दिन इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो जाएगा। ब्लांइड क्रिकेटरों का यह कारनामा समाज की सोच बदलने का काम करेगा। भारतीय ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने लगाातर दूसरी बार वल्र्डकप पर कब्जा किया है। इस बार फाइनल मुकाबले में हमारी टीम ने चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 9 विकेट से धोकर वल्र्ड कप पर अपना दर्ज किया है। दिव्यांगों को समाज लाचारी भरी नजरों से ताकता है, लेकिन उनका मौजूदा कारनामा समाज की सोच बदलने में कारगर साबित होगा। इनके लिए हर तरफ से बधाईयों का तांता लगा हुआ है। 
धुतकारने वाले समाज के लिए ब्लाइंड क्रिकेटरों की विश्व कप में जीत आईना दिखाने का काम कर रही है।हमारे स्पेशल खिलाड़ियों ने वह कारनामा करके दिखाया है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। दृष्टिहीनता प्रगति में बाधक नहीं बन सकती, इसका उदाहरण टी-20 क्रिकेट वल्र्डकप जीतकर हमारी ब्लाइंड क्रिकेट टीम उन लाखों दिव्यांग व्यक्तियों के लिए नजीर बन गई है जो अपनी तरक्की में आंखों की रौशनी न होने को बाधक समझते हैं। उनकी जीत पर पूरा देश गौरवांतित हुआ है पूरा हिंदुस्तान टीम को बधाई दे रहा है। फिल्मस्टार अमिताभ बच्चन ने बधाई दी है, शाहरूख खान टीम के सभी सदस्यों को गले लगाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को शुभकामनाएं भेजी हैं। खेलमंत्री विजय गोयल ने उनकी जीत के तुरंत बाद ही केंद्र सरकार से ब्लाइंड क्रिकेट को मान्यता देने की वकालत की है। इन दिव्यांग खिलाड़ियों के प्रति हमारा स्नेह कम नहीं होना चाहिए। दरअसल उन्हें लाचारी, सहानुभूति नहीं, मुकम्मल सम्मान चाहिए। नेत्रहीनों की इस कामयाबी ने एक बात साबित की है, अगर उन्हें मौका मिले तो हर क्षेत्र में ऐसे ही बुंलदियां छूएं। 
सबसे दिलचस्प बात यह है कि चाहे टी-20 फॉरमैट का वल्र्ड कप हो, या एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों का वल्र्ड कप, पाकिस्तान कभी भी टीम इंडिया को हरा नहीं पाया है, भले ही मैच किसी भी स्तर पर खेला गया हो। केवल ब्लाइंड वल्र्ड कप के पचास ओवर के संस्करण में केवल एक बार ऐसा मौका आया जब पाकिस्तान को भारत पर जीत मिली। भारत-पाकिस्तान की टीमें अब तक कुल छह बार एक-दूसरे से वनडे वल्र्ड कप में भिड़ी हैं। भारत और पाकिस्तान वल्र्ड कप में 2015, 2011, 2003, 1999, 1996, 1992 में एक दूसरे के सामने आए लेकिन शिकस्त पाक को मिली। तीसरा नेत्रहीन क्रिकेट विश्व कप सन् 2006 में पाकिस्तान में खेला गया था जिसमें फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को हराया था, लेकिन सन् 2014 में उसका बदला भारत ने ले लिया था। रविवार यानी बारह फरवरी को बेंगलुरू में खेले गए फाइनल मुकाबले में पाकिस्तानी टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को जीत के लिए 198 रन रन लक्ष्य दिया, जिसे टीम ने महज एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारत की ओर से ओपनर बल्लेबाज प्रकाश जयरमैया ने नाबाद 99 रन और अजय कुमार ने 43 रन की पारी खेली। केतन पटेल ने भी महत्वपूर्ण 26 रनों का योगदान दिया। भारतीय टीम ने पाकिस्तान के सामने 259 रनों का लक्ष्य रखा था। जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 229 रनों पर सिमट गई थी।
दिव्यांगों की इस सफलता के बाद तुरंत ही खेल मंत्रालय का बयान आया है। सरकार ने ब्लाइंड क्रिकेट को मान्यता देने की बात कही है। ब्लाइंड क्रिकेट को आगे बढ़ाने में विश्व विजेता ब्लांइड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शेखर नाइक और क्रिकेट एसोसिएशन फॉर ब्लांइड इन इंडिया के अध्यक्ष महंतेश जीके ने बहुत अच्छा योगदान दिया है। उनकी इस कामयाबी के लिए उन्हें पद्मसम्मान भी दिया गया है। वल्र्ड कप जीतने के बाद खेल मंत्रालय ब्लाइंड क्रिकेट को हर संभव मदद देने को तैयार हो गया है। खेलमंत्री ने अपने पहले बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्लाइंड क्रिकेट को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनी काम कर रहे हैं और शेखर नाइक को पुस्कार मिलना ब्लाइंड क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। इस उपलब्धि के बाद अब ब्लाइंड क्रिकेट के हालात में सुधार होगा, सरकार बहुत जल्द स्पोटर्स पोर्टेल टैलेंट सर्च की शुरुआत करेगी ताकि विभिन्न खेलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जा सके और उन्हें प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके। समय का तकाजा है कि अब ब्लाइंड क्रिकेट को भी अन्य खेलों की तरह मान्यता मिलनी चाहिए। इससे न सिर्फ खिलाड़ियों का उत्साह बढेगा बल्कि यह खेल और अधिक लोकप्रिय होगा। 
भारत में इस समय लगभग दो करोड़ से ज्यादा व्यक्ति किसी न किसी रूप में दिव्यांग हैं। दिव्यांग व्यक्ति को सहानुभूति की नहीं बल्कि सहयोग की जरुरत है। सहानुभूति दिखाने से दिव्यांग व्यक्ति आहत हो सकता है। दिव्यांगो को समान्य व्यक्ति समझते हुये उनके प्रति सामान्य व्यवहार करने की जरुरत है। सामान्य व्यक्ति की तरह दिव्यांगों में भी प्रतिभा होती है। उनमें आगे बढ़ने का भरपूर उत्साह होता है। केंद्र सरकार दिव्यांगो के प्रति ईमानदारी से काम कर रही है। पूरी तरह से संवेदनशील है। सुप्रीम कोर्ट ने भी दिव्यांगों के लिए हर तरह की सरकारी नौकरियों में तीन फीसदी आरक्षण देने को कहा है। इसके अलावा सरकार ने भी कई तरह की योजनाओं का श्रीगणेश किया है। दरकार इस बात की है कि सरकार के साथ-साथ समाज को भी अब दिव्यागों के प्रति अपना नजरिया बदलना होगा। उनको लाचारी की नजरों से देखने के वजय औरों की तरह इज्जत देनी होगी। सामाजिक क्षेत्रों में भी इनके लिए प्रयाप्त स्पेस मुहैया कराने की जरूरत है। चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर हमारी ब्लाइंड टीम ने सवा सौ करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है। जीतने के बाद जिस तरह से पूरा भारत उनको दूलार रहा है, यह सिलसिला रूकना नहीं चाहिए। 
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