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ऐतिहासिक आर्थिक बदलाव लाने वाला बजट
By Deshwani | Publish Date: 3/2/2017 4:14:05 PM
ऐतिहासिक आर्थिक बदलाव लाने वाला बजट

मृत्युंजय दीक्षित 

आईपीएन। मोदी सरकार का वर्ष 2017- 18 का बजट कई मायने में ऐतिहासिक व आर्थिक परिदृश्य में भारी बदलाव लाने वाला बजट बन गया है व बनने जा रहा है। यह बजट कोई साधारण बजट नहीं अपितु सभी दलों व आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान को भी ध्वस्त करने वाला बजट है। यह देश का  संभवतः पहला ऐसा बजट हैं जिसे विपक्ष ने अपने सभी राजनैतिक तरकश के तीरों से रोकने का हरसंभव प्रयासकिया लेकिन वे निष्फल रहे। इन सभी 16 दलों को यह भय सता रहा था कि कहीं मोदी सरकार बजट कोई ऐसा वैसा ऐलान न कर दें जिसका सीधा लाभ पांच प्रांतों के विधानसभा चुनावों मंे बीजेपी को मिल जाये और हर राज्य में बीजेपी की सरकार बन जाये। यही सोच कर विरोधी दलों ने चुनाव आयोग से लेकर अदालत के दरवाजे तक की दौड़ लगा दी लेकिन अंततः केंद्र सरकार ने सभी दबावों को पूरी तरह से दरकिनार करतेे हुए अपना बजट एक फरवरी को ही पेश करके अपनी राजनैतिक व संवैधानिक इच्छाशक्ति का एक बार फिर उदाहरण प्रस्तुत कर दिया। यही नहीं विपक्ष ने तो दुर्भाग्यवश राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान पूर्व विदेशराज्य मंत्री ई अहमद के निधन के बहाने भी बजट को रोकने का निष्फल प्रयास कर डाला। 

लेकिन पहली वास्तविकता यह है कि यह बजट आम सोच से बिलकुल उल्टा निकला। बजट के प्रस्तावों को देखकर विपक्ष के पास आलोचना करने के लिए को ई विशेष नया तर्क नहीं बचा हैं। एक प्रकार से विपक्ष तर्कहीन होकर बजट का विरोध कर रहा है। अब कांग्रेस के पास भी केवल एक ही जुमला शेष रह गया है कि मोदी सरकार हमारी पुरानी योजनाओं को ही नया नाम देकर चला रही है। वह यह भी आरोप लगा रही है कि मोदी सरकार ने कोई लोकलुभावन घोषणा नहीं करी जिसका सीधा लाभ आम जनता व बीजेपी को चुनावों में मिलता । अगर अभी वित्तमंत्री अपने बजट भाषण में कोई ऐलान कर देते तो यही दल एक बार फिर चुनाव आयोग के पास भाजपा की मान्यता रदद करवाने के लिए पहुंच जाते। अब देश के विरोधी दालों का कोई मान व गंभीरता नहीं रह गयी हैं विरोध करने के लिए तर्कांे का घोर अभाव रह गया है। कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी फटे कुर्ते की तरह सरकार का विरोध कर रहे हंै। इस बजट से एक नयी परम्परा यह भी शुरू हुयी है कि रेल बजट अब अलग से पेश नहीं किया जायेगा। जिससे यह बात भी साफ होती जारही है कि अब भविष्य में रेलवे का राजनैतिककरण नहीं हो सकेगा जैसा कि पहले होता रहा है। मोदी सरकार बनने के बाद सबसे बड़ा बदलाव रेलवे में आ रहा है हालांकि अभी सुरक्षित यात्रा एक बड़ा काम बाकी है तथा इसमें काफी समय लग रहा है। लेकिन रेलवे का आधुनिकीकरण तेजी से हो रहा है। 

वर्ष 2017- 18 के आम बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर राजनीति से कालेधन के सफाया करने के लिए व्यावक कदम उठाये गये हैं तथा सबसे बड़ी बात यह है कि अब डिजिटलाइजेशन व कैशलेस व्यवस्था को आक्रामक ढंग से आगे बढ़ाने की बात बजट में कहीं गयी है। एक और विशेष बात यह है कि अब बजट के माध्यम से किसी भी जाति व धर्म का तुष्टीकरण करने की परम्परा भी समाप्त होती जा रही है। 

माना जा रहा है कि आम बजट ने समाज व देश के हर वर्गको चैंकाया है। बजट पर चुनावी नहीं अपितु राष्ट्रीय विकास की सोच दिखलायी पड़ रही है। बजट में कई सारी पुरानी परम्परओं को ध्वस्त कर दिया गया है। बजट में एक प्रकार से क्षेत्रीय व सामजिक संतुलन को साधते हुए विकास का प्रयास किया गया है। बजअ का कुछ लोग समर्थन व रिोधकर रहे हें लेकिन वह सभी अपने राजनैतिक आकाओं को खुश करने के लिए करने के लिए कर रहे है। सरकार की ओर से चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं को धन तो अधिक आवंटित किया गया है लेकिन किसी का न तो तुष्टीकरण किया गया है और नहीं फ्री में देने का इंतजाम किया गया है। बजट के प्रावधनों से साफ झलक रहा है कि मोदी सरकार अब कालेधन के कुबेरों के खिलाफ अपनी जंग को रोकने वाली नहीं है।। जिसमें राजनैतिक दलों  के लिए भी सीमा रेखा खींच दी गयी हैं तो वही जो लेाग देश की संपत्ति को अपना मानकर देश छोड़कर भाग जाते हैं उनके खिलाफ भी कड़े कानून बनाने का संकेत दिया गया है। 

आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2217- 18 के बजट से समाज की तस्वीर ही बदल जायेगी। राजनैतिक चंदे को लेकर जो नयी व्यवस्था सामने आयी है उससे राजनीति में कालेधन के प्रयोग पर कुछ तो अंकुश लगेगा ही। यह भारतीय राजनीति का सबसे कड़ुवा सत्य है कि देश का हर राजनैतिक दल चुनावों के दौरान व अपनी समस्त राजनैतिक गतिविधियों में व्यापक मात्रा में धन का बेहिसाब दुरूपयोग करता है। विशेषज्ञों का अनुमान हेै कि यह बजट ग्रामोन्मुखी और असमानता को कम करने वाला है। यह बजट प्रगतिशील है। लंबी अवधि में यह बजट फायदेमंद होने जा रहा है अभी तक जो बजट पेश किये जा रहे थे वे सभी तात्कालिक लाभ के लिए पेश किये जा रहे थे। एक प्रकार से यह संतुलित बजट है। 

बजट के माध्यम से युवाआंे के लिए कई नई योजनाओं का उल्लेख किया गया है।पेशेवर पाठयक्रमों को बढ़ावा देे के लिये सरकार ने 350 आनलाइन पाठयक्रमों पर अपनी मुहर लगा दी हैं यह एक बड़ा क्रांतिकारी कदम है। साथ ही इनको पूरा करने पर प्रमाणपत्र भी मिलेंगे। यह सभी कोर्स स्वयं नाम के एक पोर्टल से संभव हो सकेंगे। 600 से ज्यादा जिलोें में कौशल केंद्रों को खोलने की योजना बनायी जा रही हैं। अभी देश भर में 60 पीएम कौशल विकास केंद्र हैं। बजट में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने पर भी खास जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की व्यवस्था में अब बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसी सभी प्रवेश परीक्षओं के लिए एक नयी अलग एजेंसी का गठन किया जा रहा है। 

एक प्रकार से सरकारी नौकरियों पर युवाओं को निर्भर रहने की अपेक्षा उनमें रोजगार दक्षता को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा हैं। बजट सरकार के स्वरोजगार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देने के दर्शन पर आधारित है। मुद्रा लोन के तहत समाज के पिछड़े वर्ग से आने वाले छोटे उद्यमियों के धन के अवंटन को बढ़ा दिया गया हैं। बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाये गये हैें। जिसमें कई नई रेलगाड़ियां चलाने की भी योजना पेश की गयी हैं। आयकर दाताओं को छोटी लेकिन बहुत लाभदायक राहत दी गयी है। अब ढाई लाख से पांच लाख तक कमाने वाले लोगों से केवल 5 प्रतिशत ही टैक्स लिया जायेगा। 

उक्त बजट भाषण में डिजिटल शब्द का 25 बार प्रयोग किया गया है जिसका तात्पर्य यह हैं कि नोटबंदी के बाद सरकार अब देश की अर्थव्यवस्था को डिजिटल करने की तरफ बढ़ रही है। इसके अलावा बजट में किसान शब्द का 24 बार और ग्रामीण शब्द का 21 बार प्रयोग किया गया है जबकि गरीब 17 महिलाओं का 16 और युवा शब्द का उल्लेख 10 बार किया गया है। एक प्रकार से इस बजट मेें  डिजिटल अर्थव्यवस्था के अलावा कृषि किसान ग्रामीण क्षेत्र गरीब और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है यही वर्तमान बजट का सार है। बुनियादी तौर पर वर्तमान बजट इंडिया के बजट की बजाय भारत का बजट है। वो भारत जो गांवों में बसता है, वो भारत जो आजादी के इतने लम्बे समय बाद भी गरीब है परेशान है और बदहाल है। स्वच्छ राजनीति के लिए भी बजट मंे पहली बार कदम उठाये गये है। बजट में कई ऐसे फैसले लिये गये हैं जिनसे आने वाले समय में देश को लाभ होगा और पूरे देश के सिस्टम में सुधार आ सकता है। यह बात अलग है नोटबंदी के बाद जो जनता लाइन में खड़ी हुयी उसे कुछ मायूसी अवश्य हुयी है लेकिन जब यह बजट पारित हो जायेगा और इसके प्रावधन लागू हो जायेंगे तब पता चल पायेगा कि इस बजट का क्या वास्तकिव असर हो रहा है।

(उपर्युक्त लेख लेखक के निजी विचार हैं। आवश्यक नहीं है कि इन विचारों से आईपीएन भी सहमत हो।)

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