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सनी देओल बोले : मेरे बेटे को मुझसे बेहतर कौन लॉन्‍च कर सकता है
By Deshwani | Publish Date: 13/9/2017 6:10:15 PM
सनी देओल बोले : मेरे बेटे को मुझसे बेहतर कौन लॉन्‍च कर सकता है

मुंबई। बॉलीवुड में 'रफ एंड टफ' इमेज के लिए महशूर सनी देओल की हालिया रिलीज फिल्‍म 'पोस्टर बॉयज' ने बॉक्‍स ऑफिस पर 9.40 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। इस फिल्‍म में उनका एक अलग अंदाज ही नज़र आ रहा है। फिल्‍म में सनी देओल के अलावा उनके भाई बॉबी देओल भी नजर आ रहे हैं। सनी जल्द ही अपने बेटे करन को बॉलीवुड में अपने निर्देशन की फ़िल्म से लॉन्‍च करने वाले हैं। उनकी इस फ़िल्म और करन की फ़िल्म और कैरियर पर उर्मिला कोरी की हुई बातचीत:

किस तरह से फ़िल्म पोस्टर बॉयज से जुड़ना हुआ ?
 
-मुझे इस फ़िल्म का आईडिया सुनाया गया तो मुझे वह बहुत पसंद आया। घायल फ़िल्म करने के बाद मैं अपनी फिल्म शुरू करना चाहता था लेकिन उससे पहले मैं एक फ़िल्म कर सकता था। मुझे यह फ़िल्म पसंद आयी और मैं उससे जुड़ गया। श्रेयस के साथ मैंने फ़िल्म भैयाजी सुपरहिट की है। हमारी जुगलबंदी इतनी खास रहती थी कि हम सीन्स को और अच्छा कर सकते थे। मैंने ही श्रेयस को कहा कि वह इस फ़िल्म को निर्देशित करें।
 
आप खुद भी निर्देशन करते हैं तो आपने इस फ़िल्म को क्यों नहीं निर्देशित किया? 
-मैं अपने बेटे करन की फ़िल्म को निर्देशित करने वाला हूँ तो एक साथ इतनी फिल्में मैं निर्देशित नहीं कर पाऊंगा। वैसे श्रेयस ने भी अच्छा निर्देशन किया है। उसकी कॉमिक टाइमिंग बहुत अच्छी है।
आपकी इमेज के विपरीत आप इस फ़िल्म दिख रहे हैं क्या आप इसे रिस्क मानते हैं ?
-मैं कभी भी रिस्क लेने से घबराता नहीं हूं। मैंने जब अपने कैरियर की शुरुआत की थी तब भी मैंने अलग अलग तरह की फिल्में की थी। उस वक़्त कोई उस तरह की फिल्में नहीं करता था। यह फ़िल्म नसबंदी के ऊपर है। हम सब इस पहल को अच्छा समझते हैं लेकिन हमारे समाज में आज भी यह मान्यता है कि नसबंदी पुरुषों के लिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि वह कमज़ोर हो जाते हैं। हम यूं तो बहुत मॉडर्न बनते हैं लेकिन इन सब मामलों में फिर हम दकियानूसी हो जाते हैं। यह फ़िल्म इसी सोच को कॉमेडी के ज़रिए सामने लेकर आती है।
आपकी लाइफ में आपने सबसे पहले अपने को पोस्टर पर कब देखा था?
-मेरी पहली फ़िल्म 'बेताब' थी तो उसी के पोस्टर पर मैंने पहली बार खुद को देखा था. शिवाजी पार्क के पास उस वक़्त बहुत बड़े बड़े पोस्टर्स लगते थे तो मेरा भी वहीं लगा था। मैँ अपने दोस्तों के साथ उसे देखने गया था। इतने बड़े पोस्टर पर खुद को देखना बहुत अच्छा लग रहा था। उस वक़्त हाथ से पोस्टर्स बनते थे। मेरी कई फिल्मों के पोस्टर जब में शुरुआत में देखता तो नॉर्मल रहते थे लेकिन जब थिएटर में वह पहुँचते तो मेरे हाथमें गन तो कभी माथे से खून टपकते दिखाया जाता था।
आपके बेटे के साथ आपके रिश्ते कैसे हैं?
-मैंने कभी अपनी फिल्मों को अपने बेटे के साथ डिस्कस नहीं किया है ऐसे ही पापा भी कभी मेरे साथ फिल्मों को डिस्कस नहीं करते थे। बेटा कभी दोस्त नहीं हो सकता है। ये हमारे घर में हमेशा से ही रहा है। मेरे पिता सख्त नहीं हैं लेकिन मां हमेशा उनका नाम लेकर डराया करती थी। मैं आज भी अपने पिता को अपने आसपास देखकर थोड़ा ज़्यादा कॉन्शियस रहता हूँ. ऐसे ही मेरा बेटा भी है। हम साथ में समय बिताते हैं लेकिन वह मुझसे ज़्यादा अपनी माँ के साथ सहज हैं। वह सबसे ज़्यादा अपनी माँ से ही बात करता है।
खबरें थी कि यशराज बैनर करण को लांच करने वाला था?
-मैंने भी ऐसा सुना था लेकिन इस में सच्चाई नहीं है अगर कोई अच्छी कहानी होती तो वह मुझे कांटेक्ट करते थे लेकिन उन्होंने मुझे कांटेक्ट नहीं किया। वैसे भी उसके पिता से बेहतर उसे और कौन लांच कर सकता है।
 
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