संपादकीय
भाषण प्रसारण पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण : सुधांशु द्विवेदी
By Deshwani | Publish Date: 17/8/2017 4:00:25 PM
भाषण प्रसारण पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण : सुधांशु द्विवेदी

स्वतंत्रता दिवस पर वामपंथी नेता एवं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार का भाषण दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो द्वारा प्रसारित किये जाने से इंकार करने का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री माणिक सरकार जहां इसे अपने लिए अपमानजनक स्थिति बता रहे हैं, वहीं केन्द्र सरकार के खिलाफ वामपंथी पार्टियों सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता भी मुखर हो गये हैं। वैसे दूरदर्शन व प्रसार भारती सरकारी निकाय हैं, इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है कि वह खुद के लिए निष्पक्षता व वैधानिक मापदंडों का विशेष ध्यान रखें ताकि विवाद की किसी भी तरह की स्थिति निर्मित न हो। 
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने आरोप लगाए हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ने उनके भाषण को प्रसारित करने से इन्कार कर दिया। आरोप लगाया गया है कि प्रसारण नहीं करने के साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक मुख्यमंत्री अपना भाषण फिर से नहीं लिखते, उसे प्रसारित नहीं किया जाएगा। माणिक सरकार ने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के इस कदम को अलोकतांत्रिक, निरंकुश और असहिष्णु करार दिया है। त्रिपुरा की माकपा सरकार द्वारा एक बयान जारी कर आरोप लगाया गया है कि 12 अगस्त को दूरदर्शन और एआईआर ने मुख्यमंत्री का भाषण रिकॉर्ड किया था। सोमवार,14 अगस्त शाम 7 बजे एक पत्र के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित किया गया कि माणिक सरकार के संबोधन को तब तक प्रसारित नहीं किया जा सकता जब तक वह उसे दोबारा नहीं लिखते। पत्र में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री के संदेश की बारीकी से जांच की गई है। इसमें मौके की पवित्रता, प्रसारण संहिता और सार्वजनिक प्रसारणकर्ता के दायित्व के मद्देनजर वर्तमान प्रारूप में मुख्यमंत्री के संबोधन को प्रसारित करना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा अपने बयान में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के एक भी शब्द में बदलाव करने से इन्कार कर दिया। माणिक सरकार का यह भाषण मंगलवार को त्रिपुरा में प्रसारित किया जाना था। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माकपा महासचिव सीताराम येचुरी का कहना है कि दूरदर्शन भाजपा-आरएसएस की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह निर्वाचित मुख्यमंत्री समेत विपक्ष की आवाज को खामोश करने के लिए निर्देश दे रहे हैं। पार्टी ने उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो इस प्रसारण को रोकने के लिए जिम्मेदार हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस मुद्दे को अब जिस तरह से राजनीतिक रंग मिल रहा है तथा राजनताओं के बीच परस्पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होने के आसार दिखाई दे रहे हैं, वह देश एवं भारतीय लोकतंत्र के उज्ज्वल भविष्य के लिहाज से ठीक नहीं हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार अपनी सादगी एवं शालीनता की बदौलत प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में खासे लोकप्रिय और चर्चित हैं तथा दूरदर्शन एवं ऑल इंडिया रेडियो द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर उनका भाषण प्रसारित किया जाना उनका वैधानिक अधिकार भी है। फिर भी प्रसार भारती के अधिकारियों द्वारा माणिक सरकार का भाषण यह कहकर प्रसारित करने से इंकार कर दिया गया है, उनके भाषण में कुछ राजनीतिक मुद्दे समाहित हैं जो स्वतंत्रता दिवस की पवित्रता व पावनता को कम करते हैं। ऐसे में उन अधिकारियों को यह बताना चाहिये कि देश के ऐसे कौन से राजनेता हैं जो स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक भाषणबाजी के लिए नहीं करते तथा प्रसार भारती द्वारा उनके उद्बोधन का प्रसारण नहीं किया जाता? ऐसे राजनेता इन मौकों पर भले ही घोषित तौर पर राजनीतिक भाषण नहीं देते लेकिन उनके उद्बोधन के दौरान उनके द्वारा की जाने वाली घोषणाएं, दावे, कटाक्ष और जुमले तथा हाव-भाव के आधार पर उनके भाषण पूरी तरह से राजनीतिक ही लगते हैं। फिर प्रसार भारती द्वारा सिर्फ माणिक सरकार का भाषण ही प्रसारित करने से इंकार क्यों किया गया, इस सवाल का जवाब मिलना जरूरी है ताकि प्रसार भारती जैसे निकायों की उपयोगिता, प्रासंगिता व निष्पक्षता कायम रह सके। 
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)
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