बिहार
अमित शाह की छवि धूमिल करने के पीछे ''द वायर'' वेबसाइट : नित्यानंद
By Deshwani | Publish Date: 11/10/2017 7:41:21 PM
अमित शाह की छवि धूमिल करने के पीछे ''द वायर'' वेबसाइट : नित्यानंद

पटना, (हि.स.)। बिहार भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उनके परिवार की छवि धूमिल और चरित्र हनन करने की साजिश रचने का आरोप 'द वायर' नाम की वेबसाइट पर लगाया है। उन्होंने इस वेबसाइट के झूठे, अनर्गल, बेबुनियाद और तथ्य से परे रिपोर्ट लिखने के पीछे मुद्दाविहीन कांग्रेस का हाथ बताया है। 

 
नित्यानंद राय ने बुधवार को बयान जारी कर कहा है कि उक्त आलेख में जिस गोल्डन टच की बात की गई है वो तथ्य पर आधारित नहीं है। 'टेम्पल इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी के बिजनेस एवं लाभांश में नरेन्द्र मोदी की सरकार के आने के बाद अप्रत्याशित वृद्धि का हवाला देकर पत्रकार ने कंपनी को जादुई साबित करने की कोशिश की है, जबकि हकीकत है कि इस कंपनी के बैलेंस शीट में 1,48,00,551 (1.48 करोड़) रुपये घाटे की बात रिपोर्ट में कहीं नहीं लिखी गई है जो की कंपनी को नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद हुआ। 
 
राय ने कहा है कि यह भी गौर करने वाली बात है कि अमित शाह ने इस कंपनी के एक डायरेक्टर के तौर पर वित्तीय वर्ष जनवरी, 2015 से ज्वाइन किया। कमोडिटी बिजनेस में 80 करोड़ टर्न ओवर कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि यह एक बड़े जोखिम, उच्च मात्रा और कम लाभ वाला बिजनेस है। उन्होंने कहा कि इस आलेख को पढ़कर यही लगता है कि बिजनेस या इकोनॉमी की कम समझ रखने वाला कोई पत्रकार जब जबरन एक राजनीतिक पक्षपात भरा आलेख लिखता है तो ऐसी चूक संभव है। 
 
राय ने कहा कि जाहिर सी बात है कि शाह की कंपनी ने मार्च, 2013 और 2014 में क्रमशः 6,230 और 1,724 रुपये का घाटा दिखाया, वहीं 2014-15 में 18,728 रुपये का लाभ 50,000 रुपये के रेवेन्यू पर दिखाने के बाद 2015- 16 में इसका टर्न ओवर 80. 5 करोड़ हुआ। इस प्रकार बताया गया की कंपनी के बिजनेस में अप्रत्याशित वृद्धि हुई जोकि तथ्य से परे और हास्यास्पद भी है। उक्त आलेख में सिर्फ तीन सालों के बैलेंसशीट और उसके लाभ को दिखाना खबर नहीं राजनीतिक प्रोपेगेंडा है।
 
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस आलेख में इसके अलावा कई अन्य तथ्यात्मक चूक भी हैं जो सीधे-सीधे राजनीति व निजी दुर्भावना से प्रेरित दिखाई देते हैं। वेबसाइट की खबर लिखने वाले पत्रकार ने तीन सालों का ख़ास आकड़ा देकर जबरन अपनी बात साबित करने की कोशिश की है, लेकिन रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज के हवाले से यह क्यों नहीं लिखा कि 80.50 करोड़ रेवेन्यू की कंपनी का 81.99 करोड़ खर्चा होता है और 1.48 करोड़ घाटा भी होता है जो कि मोदी की सरकार आने के ठीक बाद के वित्तीय वर्ष में होता है। 
उन्होंने कहा कि इस कंपनी के पार्टनर या शेयर होल्डर्स की प्रोफाइल जांचने की कोशिश पत्रकार ने क्यों नहीं की, जोकि इस कंपनी के लिए बेस सपोर्ट का काम करता है। इस खबर से उक्त वेबसाइट एवं पत्रकार दोनों की दुर्भावनापूर्ण मंशा स्पष्ट नज़र आती है।
 
 
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