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वनटांगिया वनग्राम बनेगा राजस्व गांव, अधिसूचना जारी
By Deshwani | Publish Date: 13/10/2017 2:57:20 PM
वनटांगिया वनग्राम बनेगा राजस्व गांव, अधिसूचना जारी

गोरखपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। लंबे संघर्षों के बाद वनटांगिया गांव अब राजस्व गांव का दर्जा पाने वाला है। सरकार की घोषणा के बाद प्रमुख सचिव राजस्व रजनीश दूबे ने अधिसूचना जारी कर दी है। पहले यह गांव वन ग्राम के रूप में अभिलेखों में दर्ज थे।
गोरखपुर के तिकोनिया नम्बर 3, जंगल रामगढ उर्फ़ रजही खाले टोला, चिलबिलवा, आमबाग, रामगढ़ सरकार आजादनगर में वनटांगिया परिवार दशकों से रहते आ रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं से वंचित यहाँ के परिवार में रहने वाले वयस्कों को वोटिंग के भी अधिकार नहीं थे, लेकिन लंबे संघर्ष के बाद कुछ साल पहले ही इन परिवारों को वोटिंग का अधिकार मिला है। बावजूद इसके जमीन के अधिकार सहित मूलभूत सुविधाओं से वनटांगिया वंचित रह गए थे। लंबे समय से यहां के लोग इस अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे थे। 
तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ भी समय समय पर इनकी आवाज उठाते रहे हैं। जब मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी हुई तो वनटांगिया परिवारों में उम्मीद जगी। पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने भी वनटांगिया गांव को राजस्व गांव घोषित करने के लिए कवायद शुरू करने का निर्देश दिया था। इस दौरान वनग्राम को मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त करने का भी निर्देश दिया गया था।
अब इस दीवाली पर योगी सरकार वनग्रामों को राजस्व गांव घोषित कर तोहफा देने जा रही है। इसके लिए प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दूबे ने अधिसूचना जारी कर दी है। इतना ही नहीं, गांवों की चौहद्दी भी चिन्हित कर ली गई है।
खुल जायेगा विकास का रास्ता
वन ग्रामों के राजस्व गांव के रूप में अधिसूचना जारी करने से कई फायदे होंगे। इनके विकास का रास्ता खुल जाएगा। ज़मीन का मालिकाना हक भी वनटांगियों को मिल जाएगा। यहां निर्माण समेत सभी बुक्स कार्यों को गति मिलेगी।
जानें, क्या है वनटांगिया
वनटांगिया किसान वह हैं जो जंगलों को सहेजने कई पीढ़ियों से काम कर रहे। टांगिया शब्द म्यांमार के टोंगिया शब्द का अपभ्रंश है। वहां की स्थानीय भाषा में इसे पहाड़ या खेत के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। पेड़ पौधे लगाकर पहाड़ियों का संरक्षण करने वाले टांगिया कहलाते हैं। भारत में अंग्रेजों ने वनों को संरक्षित करने और हरियाली के लिए बंधुआ मजदूरी कराते हुए वनों में ढेर सारे मजदूर लगाए। इनका काम वन क्षेत्र में पौधे लगाना और उनका संरक्षण करना था। पौधों के बीच बीच में नौ फ़ीट खाली इसके एवज में दी जाती थी। इस जमीन पर यह किसान/मजदूर अन्न उगाता था जिससे उसका भरण-पोषण होता था। यही परिवार वनटांगिया के रूप में आज भी जाने जाते हैं।
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