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दिल्ली की पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग से 17 लोगों की मौत
By Deshwani | Publish Date: 21/1/2018 10:30:17 AM
दिल्ली की पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग से 17 लोगों की मौत

नई दिल्ली (हि.स.)। शाहबाद डेयरी स्थित बवाना औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-तीन की एफ-83 की पटाखा फैक्ट्री में शनिवार शाम लगी आग ने 17 जिंदगियां निगल लीं। इस हादसे में मरने वाले सभी फैक्ट्री के कर्मचारी हैं। इनमें पांच लोग आपस में रिश्तेदार थे। फैक्ट्री का लाइसेंस था या नहीं, इस बारे में पुलिस फैक्ट्री मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। शवों को महर्षि बाल्मिकी अस्पताल में रखवाया गया है।

जानकारी के मुताबिक एफ-83 स्थित पटाखा फैक्ट्री दो मंजिला इमारत में बनी हुई है। हर मंजिल पर एक ही दरवाजा है। जहां से बाहर निकला जा सकता है। शनिवार शाम छह बजकर बीस मिनट पर फैक्ट्री में कर्मचारी काम कर रहे थे। फैक्ट्री में आग दरवाजे की तरफ लगी थी। आसपास बारूद, सिलेंडर, कागज आदि चीजें रखी होने के कारण आग काफी तेजी से फैली। अंदर फंसे तीन से चार कर्मचारियों ने आग के बीच में से बाहर आकर दूसरी मंजिल से ही छलांग लगा दी। इस प्रयास में इनकी जान तो बच गई लेकिन इनके पैर और हाथ में फ्रैक्चर आया है जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। देर रात हादसे में जो कर्मचारी बचे हैं, पुलिस उनके बयान लेने की कोशिश कर रही थी।
कुछ शवों की नहीं हुई है पहचान

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे की चपेट में आए कुछ शवों की पहचान नहीं हो पाई है, जिनमें चार से पांच महिलाएं भी हैं। शवों में दो शव ऐसे थे जो एक दूसरे से जुड़े हुए थे। शायद आग को देखकर दोनों एक दूसरे से लिपट गए थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे की चपेट में आने वाले कर्मचारी सौ फीसदी जले हुए बाहर निकाले गए थे। कुछ ऐसे शव निकाले गए जो दीवार से चिपके हुए थे। लोगों ने फैक्ट्री से बाहर निकलने की काफी कोशिश भी की थी लेकिन फैक्ट्री में बारूद रखा होने के कारण कोई भी बाहर नहीं निकल पाया।
बीस हजार किलो से ज्यादा रखा था बारूद

सूत्रों की मानें तो फैक्ट्री में बीस हजार किलो से ज्यादा बारूद रखा हुआ था जबकि एक हजार किलो से ज्यादा कागज व एक हजार किलो से ज्यादा कागज को चिपकाने वाला पदार्थ रखा हुआ था। वहां पर छोटे सिलेंडर भी रखे हुए थे। आग कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री में फैल गई थी। एेसी स्थिति में वहां मौजूद लोगों के पास आग से बचने का कोई अवसर नहीं था। लोगों ने बताया कि करीब पन्द्रह मिनट तक फैक्ट्री में से पटाखों और सिलेंडर फटने की आवाजें आती रही थी।
बम जैसी आवाजें आ रही थी

इलाके में रहने वाले संतोष गुप्ता ने बताया कि फैक्ट्री में काफी बारूद रखा होने के कारण दो किलोमीटर दूर तक बम फटने जैसी आवाजें सुनाई दे रही थी। वह मौके पर पहुंचे तो आग और धुआं निकल रहा था। उस समय दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंची थीं। शिवम कुमार ने बताया कि फैक्ट्री के पास से वह अपने घर जा रहे थे, तभी आग लगी थी। फैक्ट्री से चिल्लाने की आवाजें कुछ सेकेंंड तक ही आई थीं। उनके चिल्लाने की आवाजें पटाखों की आवाज में दब कर रह गई। पटाखें की आवाजें इतनी तेज थीं कि कोई भी मौके पर पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। पास की फैक्ट्री में रहने वाले लोग भी सड़क पर आ गए थे। उन्होंने दो से तीन लोगों को फैक्ट्री से कूदते हुए जरूर देखा था। रामेश्वर दयाल ने बताया कि आवाजें इतनी भयंकर थीं कि लग रहा था कि इमारत फट जाएगी। काफी देर तक बम की तरह पटाखों के फटने की आवाजें सुनाई दीं। जब पटाखों की आवाजें आनी बंद हुईं तो उसके काफी देर बाद दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, जिन्होंने फैक्ट्री को गिरफ्त में ले चुकी आग बुझाई और एक के बाद एक शव बाहर निकाले, जिनको पहचानना भी मुश्किल हो रहा था।
बारूद के ढेर पर काम कर रहे थे कर्मचारी

फैक्ट्री में 18 से ज्यादा लोग काम करते हैं जिसमें महिलाएं ज्यादा थीं। सूत्रों की मानें तो यहां पर किशोरियां भी काम कर रही थीं। पटना की रहने वाली एक महिला ने बताया कि फैक्ट्री में उसकी बहन बेबी भी काम करती है। उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। उसने और परिवार वालों ने बताया कि उनके परिवार वाले पिछले एक-डेढ़ साल से फैक्टरी में नौकरी कर रहे थे। परिवार वालों का कहना है कि वो लोग बताया करते थे कि कभी फैक्टरी में आग लगी तो उनका बच पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि फैक्टरी से निकलने का रास्ता एक ही है।
मेयर और पार्षद मौके पर पहुंचे

आग लगने की जानकारी मिलते ही उत्तरी दिल्ली की मेयर प्रीति अग्रवाल के साथ आस पास के सारे निगम पार्षद मौके पर पहुंच गये। वहां पहुंचने के बाद उन लोगों ने हालात का जाएजा लिया। उन लोगों ने फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों और हादसे में मारे गये लोगों के परिवार वालों को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।


पिछले कुछ वर्षों में हुई आगजनी की घटनाएं और उनमें मारे गए तथा घायल हुए लोगों का विवरण इस प्रकार हैः

वर्ष मौत घायल
2016-17 277 1987

2015-16 339 2099
2014-15 291 2068

2013-14 72 2299
2012-13 285 197


 

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