पटना
अनेकता में एकता ही भारत की विशेषता है - सुशील मोदी
By Deshwani | Publish Date: 20/1/2018 8:28:32 PM
अनेकता में एकता ही भारत की विशेषता है - सुशील मोदी

पटना  (हिस )- बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भारत की विशेषता एकरूपता नहीं बल्कि अनेकता में एकता है और ‘अलग भाषा, अलग वेश, के बावजूद देश एक है।  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से अन्तर राज्य छात्र-जीवन दर्शन कार्यक्रम के अन्तर्गत पूर्वोत्तर के छात्र-छात्राओं के पटना आगमन पर आयोजित अभिनंदन समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को यहाँ कहा कि भारत की विशेषता एकरूपता नहीं बल्कि अनेकता में एकता है इसीलिए पटना से गुवाहाटी तक देश माटी एक है । उन्होंने कहा कि शंकराचार्य से लेकर रामकृष्ण और विवेकानंद तथा अन्य ऋषि-मुनियों ने भी देश को हमेशा सांस्कृतिक रूप से जोड़ा जिसके कारण दुनिया की कोई भी ताकत पूर्वोत्तर को देश से अलग नहीं कर पाई। 

 
सहिष्णुता को भारत की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ की मान्यता है कि ईश्वर एक है भले ही उसे प्राप्त करने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। उन्हों एखा कि यहां के लोग तलवार के बल पर धर्म परिवर्तन को कभी स्वीकार नहीं कर सकते हैं। 
 
पिछले 52 वर्षों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से आयोजित होने वाले अन्तर राज्य छात्र जीवन दर्शन कार्यक्रम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत पूर्वोत्तर के छात्र-छात्राओं को भारत के अन्य राज्यों में तथा शेष भारत के छात्र-छात्राओं को पूर्वोत्तर के राज्यों में भ्रमण कराया जाता है। इसका मकसद भारत के प्रति एकात्म भावबोध उत्पन्न करना है। लम्बे समय तक पूर्वोत्तर के राज्यों के लोग शेष भारत से अलग-थलग पड़े थे मगर अन्तर राज्य छात्र जीवन दर्शन के माध्यम से उन्हें भारतीयता का अहसास कराने में बड़ी सफलता मिली है। 
 
श्री मोदी ने आम लोगों से एक बार पूर्वोत्तर के राज्यों के भ्रमण की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली-मुम्बई में बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के छात्र-छात्रा पढ़ते हैं, मगर भ्रमवश लोग उन्हें विदेशी समझ लेते हैं। जिस प्रकार पूर्वोत्तर के छात्र-छात्रा देश के अन्य राज्यों में आकर भारतीयता व एकता के भाव को समझते हैं उसी प्रकार अन्य राज्यों के लोगों को भी पूर्वोत्तर के राज्यों में जा कर वहां के प्राकृतिक-सांस्कृतिक सौन्दर्य को देखना समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद के प्रयास से ही आज पूर्वोत्तर के राज्यों में भी वहां के लोग ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ बेझिझक बोलते हैं ।
 
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