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अक्सर अलग राय रखने की वजह से सुर्खियों में रहे हैं जस्टिस जे चेलमेश्वर
By Deshwani | Publish Date: 12/1/2018 8:04:07 PM
अक्सर अलग राय रखने की वजह से सुर्खियों में रहे हैं जस्टिस जे चेलमेश्वर

नई दिल्ली, (हि.स.)। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा का नेतृत्व करनेवाले जस्टिस जे चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में दूसरे वरिष्ठतम जज हैं। वे अक्सर अपनी अलग राय रखने की वजह से सुर्खियों में आते रहे हैं। उन्होंने यूपीए सरकार द्वारा लाए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच में बहुमत के फैसले के उलट कॉलेजियम सिस्टम का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि जजों की नियुक्ति में कॉलेजियम सिस्टम भी फूलप्रुफ नहीं है। हाल ही में मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर रिश्वत देने के मामले में भी उन्होंने अलग फैसला देते हुए पांच सदस्यीय बेंच के गठन का आदेश दिया था।
 
जजों की नियुक्ति के लिए लाए गए एनजेएसी की सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय बेंच में जस्टिस चेलमेश्वर अकेले जज थे जिन्होंने कॉलेजियम सिस्टम का विरोध किया था। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चार और एक के बहुमत से सरकार के एनजेएसी कानून को निरस्त कर दिया था। अपने फैसले में उन्होंने न्यायपालिका से कॉलेजियम सिस्टम पर आत्ममंथन करने को कहा था। पूर्व जस्टिस जेएस खेहर के कार्यकाल में उन्होंने कॉलेजियम की कई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था। उनका कहना था कि बैठकों की बातचीत का पूरा ब्यौरा मौजूद होना चाहिए। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के फैसले अब वेबसाइट पर भी आने लगे। इसके पीछे जस्टिस चेलमेश्वर के विरोध का बड़ा योगदान रहा।
 
आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में 23 जून 1953 को जन्मे जस्टिस चेलमेश्वर की शुरुआती पढ़ाई कृष्णा जिले के ही हिन्दू हाईस्कूल में हुई थी। उन्होंने मद्रास लोयोला कॉलेज से भौतिकी में स्नातक की डिग्री ली थी। बाद में 1976 में उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी विशाखापत्तनम से लॉ की डिग्री ली।
 
उन्हें 1995 में सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया। वे 13 अक्टूबर 1995 को एडिशनल एडवोकेट जनरल बनाए गए थे। उन्हें 23 जून 1997 को आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया और 17 मई 1999 को स्थायी जज बनाया गया। उन्हें 3 मई 2007 को प्रोन्नति देकर गुवाहाटी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। उन्हें 17 मार्च 2010 को केरल हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। उन्हें 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।
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