राष्ट्रीय
हिंसा प्रभावित महिलाओं की मददगार बनी ‘सखी वन स्टॉप केन्द्र’ योजना: मेनका गांधी
By Deshwani | Publish Date: 15/12/2017 7:23:18 PM
हिंसा प्रभावित महिलाओं की मददगार बनी ‘सखी वन स्टॉप केन्द्र’ योजना: मेनका गांधी

नई दिल्ली, (हि.स.)। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने हिंसा को रोकने के लिए बहु क्षेत्रीय प्रतिक्रिया व्यवस्था को मज़बूत करने में ‘सखी वन स्टॉप केन्द्र’ की भूमिका पर शुक्रवार को यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ‘सखी वन स्टॉप केन्द्र’ योजना हिंसा प्रभावित महिलाओं की रक्षा एवं मदद करने की दिशा में अत्यंत कारगर पहल है।


केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वन स्टॉप केन्द्र योजना के महत्व को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है कि ओएससी (वन स्टॉप केन्द्र) केन्द्रों को पूर्ण पेशेवर एवं कुशल तरीके से चलाया जा रहा है और केन्द्र में आने वाली संकटग्रस्त महिलाओं के साथ पूर्ण सहानुभूति बरती जाए। उन्होंने कहा कि इन ओएससी केन्द्रों का उद्देश्य ऐसी महिलाओं को सुरक्षित एवं खुशहाल माहौल उपलब्ध कराना है।


मेनका ने कहा कि पहले वन स्टॉप केन्द्र की शुरुआत छत्तीसगढ़ के रायपुर में की गई थी और कुछ ही समय में यह केन्द्र तनावग्रस्त महिलाओं के लिए एक जीवनरेखा बन गया। तब से लेकर देशभर के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में ओएससी केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इन केन्द्रों की कार्यशैली और केन्द्रों में कार्यरत कर्मचारियों में क्षमता निर्माण की नियमित रूप से निगरानी कर रहा है। मंत्रालय इन केन्द्रों के साथ विभिन्न श्रेणियों में जुड़े नर्सों अथवा मनोचिकित्सकों अथवा वकीलों अथवा पुलिसकर्मियों के लिए एक उच्चस्तरीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विकसित करेगा। उन्होंने ओएससी के प्रशासकों से आग्रह किया कि वे केन्द्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों और परेशानियों के बारे में नियमित रूप से मंत्रालय को अपनी प्रतिक्रिया भेजें ताकि निर्धारित समयसीमा में उनका समाधान निकाला जा सके।


महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन देशभर में कार्यरत वन स्टॉप केन्द्रों की गुणवत्ताओं में सुधार करने और केन्द्रों को अधिक मज़बूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है। कार्यशाला में देशभर के 33 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों के राज्य महिला एवं बाल विकास विभागों के करीब 400 सखी वन स्टॉप केन्द्र कर्मी और नोडल अधिकारी भाग ले रहे हैं।


 

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