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प्रद्युम्न हत्याकांड: 76 दिन बाद घर पहुंचा अशोक, कहा- जुर्म कबूलने को उल्टा लटका पीटती थी पुलिस
By Deshwani | Publish Date: 23/11/2017 6:52:03 PM
प्रद्युम्न हत्याकांड: 76 दिन बाद घर पहुंचा अशोक, कहा- जुर्म कबूलने को उल्टा लटका पीटती थी पुलिस

 गुरुग्राम,(हि.स.)। रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या मामले में स्कूल का बस कंडक्टर अशोक कुमार जेल से रिहा हो गया। जेल में 76 दिन बिताने के बाद बुधवार को घर पहुंचे अशोक ने कई खुलासे किए। अशोक ने बताया कि उसने जेल में काफी दर्द सहा और जुर्म कबूलने के लिए पुलिस ने खूब टॉर्चर किया। अशोक की पत्नी ने बताया कि पुलिस अशोक को मारती थी, उल्टा लटका देती थी और जुर्म कबूलने के लिए उसे यातनाएं देती थी। 

आठ सितम्बर को प्रद्युम्न की हत्या के बाद बस कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने उस वक्त ये दावा किया था कि अशोक ने जुर्म कबूल कर लिया है लेकिन सीबीआई की जांच में अशोक के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले और सीबीआई ने उसे क्लीन चिट दे दी। कोर्ट ने 50 हजार के मुचलके पर अशोक को रिहा कर दिया।

 

'अपराध कबूलने के लिए अशोक को नशा देती थी पुलिस'

स्कूल स्टॉफ के दो सदस्यों और अशोक के परिवार (पिता अमीरचंद) का दावा है कि गरीब परिवार से होने के कारण अशोक को बलि का बकरा बनाया गया। अमीरचंद ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने उनके बेटे को अपराध कबूलने के लिए नशीला पदार्थ दिया और उस पर बेरहमी से अत्याचार किए। मंगलवार को जज रजनी यादव ने अशोक को 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी थी। 

 

सीबीआई ने 11वीं के छात्र को किया गिरफ्तार

प्रद्युम्न हत्या मामले में सीबीआई ने जांच के बाद कई खुलासे किए और अक्टूबर में उसी स्कूल के 11वीं के छात्र को गिरफ्तार किया। 

सीबीआई के मुताबिक, सीनियर छात्र ने अपने जूनियर की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि वो पीटीएम और स्कूल की परीक्षा को टालना चाहता था।

 

वीडियो फुटेज से पहुंची सीबीआई

इस मामले में आठ सेकेंड की सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम सबूत बनी। इसमें तीन-चार लोगों की हल्की तस्वीर दिख रही थी। इसमें बच्चों के पीछे का बैग दिख रहा था, जिसे अधिकारी पहचानने के लिए तीन-चार बार वीडियो को दिखाकर बच्चों से पूछताछ की। इसके बाद बच्चों ने आरोपी के बैग के बारे में जानकारी दी थी।

 

गवाह-1 शिक्षिका अंजू

एफआईआर रिपोर्ट में भी अंजू डुडेजा मैडम का नाम दर्ज है। घटना की सूचना भी उन्हीं के हवाले से पुलिस को दी गई थी। पुलिस ने अंजू मैडम से तीन बार पूछताछ की थी। सीबीआई भी अंजू डुडेजा से पूछताछ कर चुकी है। घटना की जानकारी उसे माली हरपाल ने दी थी, इसके बाद वह अशोक की मदद से प्रद्युम्न को अस्पताल ले गईं। ऐसे में सवाल है कि अशोक को जब उन्होंने देखा तो क्या उस वक्त अशोक के कपड़ों पर खून के छींटे थे। अशोक की मनोदशा क्या थी?

 

गवाह-2 स्कूल के बच्चे

पुलिस ने कक्षा दो के उन तीन बच्चों से भी पूछताछ की थी जो बाथरूम में कराटे की ड्रेस बदलने आए थे। पुलिस ने दावा किया था कि बच्चों ने जानकारी दी कि बाथरूम में जाते और आते वक्त अशोक को देखा था। पुलिस ने इन बयानों को 164 के बयान कोर्ट में दर्ज कराए थे। पुलिस ने जांच में इसे बड़ा अहम बताया था और इसी आधार पर अशोक को मुख्य आरोपी बनाया था। इन बच्चों के बयान अब भी महत्वपूर्ण हैं।

 

गवाह-3 माली हरपाल

हत्या की जानकारी सबसे पहले हरपाल को मिली थी, हरपाल ने अंजू मैडम और दूसरे बच्चों के बाथरूम में होने की सूचना दी थी। शुरुआती बयान में हरपाल ने अशोक का बचाव किया और कहा था कि अशोक के कपड़ों पर खून नहीं था। 

 

गवाह-4 ग्यारहवीं का छात्र

प्रद्युम्न की हत्या में सीबीआई की तरफ से हत्यारोपी बनाए गए ग्यारहवीं के छात्र से भी पुलिस ने पूछताछ की थी, हालांकि पुलिस को छात्र ने अपने जवाबों से गच्च दे दिया था। कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने छात्र को क्लीन चिट दे दी थी और अशोक के खिलाफ पुलिस ने इसी छात्र को मुख्य गवाह भी बनाया था। फिर सीबीआई के सामने कबूलनामा व सुधारगृह पहुंचने के बयान से मुकरने से पूरा मामला संदेह के घेर में है।

 

गवाह-5 बस ड्राइवर

अशोक जिस बस में कंडक्टर था, सौरभ उसका ड्राइवर था। मीडिया ने अशोक की मनोदशा पर चाकू के बारे में सौरभ से पूछताछ की तो विरोधाभासी बयान सामने आए। सौरभ ने पहले कहा था कि चाकू बस में नहीं था। बाद में बयान बदल दिया। 

 
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