राष्ट्रीय
देश के हर जिले में एक आयुर्वेद अस्‍पताल सरकार का मिशन : मोदी
By Deshwani | Publish Date: 17/10/2017 7:33:11 PM
देश के हर जिले में एक आयुर्वेद अस्‍पताल सरकार का मिशन : मोदी

 नई दिल्ली, (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धन्वंतरि जयंती और द्वितीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर मंगलवार को देश के पहले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के विस्तार के लिए ये बहुत आवश्यक है कि देश के हर जिले में इससे जुड़ा एक अच्छा सारी सुविधाओं से युक्त अस्पताल जरूर हो। इस दिशा में आयुष मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है और तीन वर्षों में ही 65 से ज्यादा आयुष अस्पताल विकसित किए जा चुके हैं। 

दक्षिणी दिल्‍ली के सरिता विहार में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान के उदघाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष मंत्रालय के आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार के मानक दिशा-निर्देश भी जारी किए। इसके अलावा उन्होंने पुणे के रामामनी अय्यंगर स्‍मारक योग संस्‍थान को योग पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येशो नाईक, देशभर के योगाचार्य, आयुर्वेद विशेषज्ञ, अध्यापक और छात्रों ने हिस्सा लिया। 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति नहीं है। इसके दायरे में सामाजिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण स्वास्थ्य जैसे अनेक विषय भी आते हैं। इसी आवश्यकता को समझते हुए ये सरकार आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियों के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकरण पर जोर दे रही है। आज दिल्ली में एम्स की तरह ही अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का उद्घाटन भी इसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अभी शुरूआती तौर पर इसमें हर रोज साढ़े सात सौ से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या दोगुनी होने का अनुमान है। इस संस्थान को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त बनाया गया है। इसकी मदद से कई गंभीर बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार में भी मदद मिलेगी। मुझे प्रसन्नता है कि आज आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से आयुर्वेद की विद्या, आयुर्वेद की ज्ञान संपदा को पुनः बल मिला है। ये भी बहुत आशाजनक स्थिति है कि ये आयुर्वेदिक संस्थान एम्स, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रीसर्च और कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा। मुझे उम्मीद है कि इस रास्ते पर चलते हुए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान इंटर- डिसिप्लीनरी और इंटीग्रेटिव हेल्थ प्रैक्टिस का मुख्य केंद्र बनेगा।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को स्वास्थ्य आयुर्वेद और योग से मिल सकता है| इसलिए लोग पुनः प्रकृति की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने आयुर्वेद की उपयोगिता को बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गुलामी काल में हमारी ऋषि परम्परा और आयुर्वेद आदि का उपहास उड़ाया गया। इससे समाज में उन शक्तियों के प्रति आस्था कमजोर हुई। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद भी इस स्थिति को ठीक करने का प्रयास नहीं किया गया। मोदी ने कहा कि इसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ा और ऐसी अनेक जानकारियों का पेटेंट दूसरे देशों के पास चले गए। उन्होंने कहा कोई भी देश विकास की कितनी ही चेष्टा करे, कितना ही प्रयत्न करे, लेकिन वो तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक वो अपने इतिहास, अपनी विरासत पर गर्व करना नहीं जानता। अपनी विरासत को छोड़कर आगे बढ़ने वाले देशों की पहचान खत्म होनी तय होती है। अगर हमारे देश का इतिहास देखें, तो हम पाएंगे कि वो दौर इतना शक्तिशाली था, इतना समृद्ध था कि जब बाकी दुनिया ने उसे देखा तो उसे लग गया था कि भारत के ज्ञान और बुद्धिमता से मुकाबला संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने दूसरा मार्ग अपनाया। हमारे पास जो श्रेष्ठ था, उसे ध्वस्त करना उन्हें ज्यादा आसान लगा। 
 
उन्होंने कहा कि गुलामी के कालखंड में हमारी ऋषि परंपरा, हमारे आचार्य, किसान, हमारे वैज्ञानिक ज्ञान, हमारे योग, हमारे आयुर्वेद, इन सभी की शक्ति का उपहास उड़ाया गया| उसे कमजोर करने की कोशिश हुई और यहां तक की उन शक्तियों पर हमारे ही लोगों के बीच आस्था कम करने का प्रयास भी हुआ। जब गुलामी से मुक्ति मिली तो एक उम्मीद थी कि जो बच पाया है, उसे संरक्षित किया जाएगा, समय के अनुकूल परिवर्तन किया जाएगा। लेकिन ये भी प्राथमिकता नहीं बनी। जो था, उसे, उसके हाल पर छोड़ दिया गया। हमारी शक्तियों को गुलामी के कालखंड में नष्ट करने का प्रयास हुआ और आजादी के बाद एक लंबा समय ऐसा आया जब इन शक्तियों को भुलाने का प्रयास किया गया। एक तरह से अपनी ही विरासत से मुंह मोड़ लिया गया। इन्हीं वजहों से ऐसी तमाम जानकारियों के पेटेंट दूसरे देशों के पास चले गए, जिन्हें हम कभी दादी मां के नुस्खे के तौर पर घर-घर में इस्तेमाल करते थे। आज मुझे गर्व है कि पिछले तीन वर्षों में इस स्थिति को काफी हद तक बदल दिया गया है। जो हमारी विरासत है, जो श्रेष्ठ है, उसकी प्रतिष्ठा जन-जन के मन में स्थापित हो रही है।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब हम सभी आयुर्वेद दिवस पर एकत्रित हुए हैं, या जब 21 जून को लाखों की संख्या में बाहर निकलकर योग दिवस मनाते हैं, तो अपनी विरासत के इसी गर्व से भरे होते हैं। जब अलग-अलग देशों में उस दिन लाखों लोग योग करते हैं, तो उन तस्वीरों को देखकर लगता है कि हां, लाखों लोगों को जोड़ने वाला ये योग भारत ने उन्हें दिया है। भाइयों और बहनों, जो योग भारत की विरासत रहा है, वो अब विस्तारित होते हुए पूरी मानवजाति की विरासत होता जा रहा है। ये बदलाव सिर्फ तीन वर्षों की देन है और निश्चित तौर पर इसमें आयुष मंत्रालय की बहुत बड़ी भूमिका है।
 
उन्होंने आयुर्वेद के प्रति विश्वास में कमी का ज़िक्र करते हुए कहा कि जल्द ठीक होने की मानसिकता के कारण युवा अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभावों को भी नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने आयुर्वेद के प्रति शतप्रतिशत समर्पण भाव व विश्वास जागने पर ज़ोर दिया।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने बीएएमएस कोर्स को फिर से डिजाइन करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पांच साल के इस कोर्स को पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें रोजगार मिल सके। खिलाड़ियों में फिजियोथेरेपी के प्रचलन पर उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों में फिजियोथेरेपी इस्तेमाल की संख्या काफी बढ़ रही है इससे वह अनजाने अनेक दवाओं के सेवन से खतरे में पड़ हैं जबकि योग और आयुर्वेद खिलाड़ियों औऱ फ़ौजी जवानों को विषम परिस्थितियों में भी स्वस्थ रखने में कारगर हैं।
 
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS