राष्ट्रीय
नाबालिग पत्नी से जबरन यौन संबंध बनाना बलात्कार : सुप्रीम कोर्ट
By Deshwani | Publish Date: 11/10/2017 7:50:05 PM
नाबालिग पत्नी से जबरन यौन संबंध बनाना बलात्कार : सुप्रीम कोर्ट

 नई दिल्ली, (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 15 से 18 वर्ष से कम की नाबालिगों के साथ पतियों द्वारा बनाए जबरन यौन संबंध को रेप करार दिया है। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद 2 को संविधान की धारा 14 और 21 का उल्लंघन माना है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमारे फैसले का प्रभाव आगे से होगा। इसके पहले की गई शादियां इससे प्रभावित नहीं होंगी। इसका मतलब ये है कि आज के बाद से 15 से 18 वर्ष की नाबालिगों के साथ पतियों द्वारा जबरन बनाया गया यौन संबंध रेप माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर एक साल के अंदर कोई नाबालिग पत्नी जबरन यौन संबंध की शिकायत करती है तो पुलिस को कार्रवाई करने की जरुरत है।

 
अपने 70 पेजों के फैसले में जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि बाल विवाह एक बड़ा मसला है लेकिन कोर्ट वैवाहिक रेप पर नहीं जाएगा। जबकि जस्टिस दीपक गुप्ता ने अपने 57 पेजों के फैसले में कहा कि देशभर में बाल विवाह हो रहे हैं और ये मामला पोक्सो का है।
 
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 का अपवाद 2 कहता है कि अगर 15 से 18 साल की पत्नी से उसका पति संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा जबकि बाल विवाह कानून के मुताबिक शादी के लिए महिला की उम्र 18 साल होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को ये तय करना था कि 15 से 18 साल की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना रेप माना जाएगा या नहीं। इस मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
 
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रेप के प्रावधान में पुरुषों के प्रोटेक्शन की वकालत की थी। केंद्र ने कहा था कि ये देश में बाल विवाह रोकने के लिए जरुरी है। केंद्र ने कहा था कि भारतीय दंड विधान की धारा 375 के अपवाद दो को निरस्त करने की कोई जरुरत नहीं है। केंद्र ने कहा था कि इसके लिए संसद को एक तय समय के तहत विचार कर फैसला करने देना चाहिए।
 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बाल विवाह एक विवाह नहीं बल्कि एक मृगतृष्णा है। कोर्ट ने कहा था कि ये मैरेज नहीं मिराज है। कोर्ट ने कहा था कि कानून में बाल विवाह को अपराध माना गया है उसके बावजूद लोग बाल विवाह करते हैं। 
 
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि 15 से 18 वर्ष के बीच शादी करने वाली महिलाओं को किसी तरह का संरक्षण नहीं है। एक तरह लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु भले ही 18 वर्ष हैं लेकिन इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी धड़ल्ले से हो रही है। याचिका में कहा गया है कि 15 से 18 वर्ष की लड़कियों की शादी अवैध नहीं होती है लेकिन इसे अवैध घोषित किया जा सकता है। याचिका में ये भी दलील दी गई है कि इतनी कम में उम्र में लड़कियों की शादी से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
 
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