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राष्ट्रपति चुनाव: पक्ष-विपक्ष दोनों ने बुलाई 19 जून को बैठक
By Deshwani | Publish Date: 18/6/2017 4:34:22 PM
राष्ट्रपति चुनाव: पक्ष-विपक्ष दोनों ने बुलाई 19 जून को बैठक

 नई दिल्ली, (हि.स.)। एक ओर जहां राष्ट्रपति चुनाव के लिए सत्ता पक्ष की ओर से लगातार सभी दलों से बातचीत कर पार्टी को आंकलन करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी एक और पक्ष के बार एक दिन बैठक बुलाने की योजना बना रहे हैं। 

दरअसल सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से पत्ता नहीं खोले जाने के बीच विपक्षी खेमा भी पसोपेश में है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष भी 19 जून को ही बैठक बुलाने की तैयारी में हैं। उसी दिन एनडीए की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें इनके उम्मीदवार के नाम का ऐलान संभव है। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल होंगे। 

इस बीच केंद्रीय वित्त एवं रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने 17वीं जीएसटी परिषद की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे तृणमूल कांग्रेस और बीजद नेताओं से राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में चर्चा की। वहीं केंद्रीय शहरी विकास एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से मुलाकात की। बैठक के बाद वेंकैया ने कहां, 'राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम 23 जून से पहले घोषित कर दिया जाएगा।' 

फिलहाल कुछ मिलाकर भाजपा ने अब तक आप को छोड़ सभी पार्टी से बातचीत पूरी कर ली। भाजपा को लग रहा है कि आप के पास राष्ट्रपति चुनाव के लिए कोई बड़ा वोट नहीं है। इससे पहले, राष्ट्रपति चुनाव पर आम सहमति बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी के सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने सीपीआईएम कार्यालय पर सीताराम येचूरी, वृन्दा करात और प्रकाश करात से राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में मुलाकात की थी। हालांकि इस मुलाकात का कोई नतीजा नहीं निकला।

दूसरी ओर मार्क्सीवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) के महासचिव सीताराम येचूरी पहले ही केंद्र सरकार से 20 जून से पहले राष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम घोषित करने की मांग की है। सीधे शब्दों में कहें तो देश में 17 जुलाई को 19 वे राष्ट्रपति चुनाव होने हैं जिसको लेकर इस समय पक्ष और विपक्ष दोनों अपने तरकश में तीर तराश रहे हैं। मसलन जिसका प्रत्याशी जितना दमदार, रायसीना में उसकी जयकार क्योंकि विपक्ष (कांग्रेस को छोड़ कर सभी) जानता है कि उसके 36% वोट इस चुनाव को बदलने में कितने कारगर है।यही वजह है कि सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों ने इस वोटबैंक को अपने साथ मिलाने की कवायद तेज कर दी है। 

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