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तंत्र-मंत्र के चक्कर में जान गंवा रहे हैं सर्प दंश पीड़ित
By Deshwani | Publish Date: 24/11/2017 4:07:40 PM
तंत्र-मंत्र के चक्कर में जान गंवा रहे हैं सर्प दंश पीड़ित

छपरा, (हि.स.)। सर्प दंश के शिकार लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण समय पर इलाज न होना है। चिकित्सा विज्ञान के इस दौर में सर्प दंश के शिकार लोगों के इलाज की सुविधा काफी सहज व सुलभ हो गई है। साथ ही गांव देहात से लेकर शहर तक इसकी सुविधा है। सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार की सुविधा भी है, इसके बावजूद सर्प दंश के शिकार लोगों का उपचार कराने के बजाय लोग तंत्र-मंत्र व झाड़-फूंक के चक्कर में फंस कर मरीजों को अस्पताल में लेकर तब पहुंचते हैं जब मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। इसका मूल कारण लोगों में जागरुकता का अभाव है और तंत्र-मंत्र व अंधविश्वास के प्रति कायम आस्था व विश्वास है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोगों में विश्वास कायम है कि सर्प दंश के शिकार मरीजों को झाड़-फूंक से ठीक किया जा सकता है। 

पहली घटना में दरियापुर थाना क्षेत्र के मठ चिलावे गांव में दो माह पहले एक युवती सर्प दंश की शिकार हो गई जिसे परिजन तांत्रिक के यहां लेकर चले गए। तांत्रिक घंटों तक झाड़-फूंक करता रहा लेकिन युवती ठीक नहीं हुई। जब जहर का प्रभाव बढ़ गया और युवती की जान खतरे में पड़ गई तो तांत्रिक ने हाथ खड़ा कर दिया। इसके बाद परिजन युवती को लेकर चिकित्सक के यहां लेकर गए पर तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल जाते ही युवती की मौत हो गई। दूसरी घटना में मकेर थाना क्षेत्र के दादनपुर गांव में एक व्यक्ति तीन माह पहले सर्प दंश का शिकार हो गया जिसे परिजन तांत्रिक के यहां लेकर चले गए और घंटों तक झाड़ फूंक चलता रहा, लेकिन उस व्यक्ति की हालत बिगड़ते ही तांत्रिक भाग खड़ा हुआ। परिजन उसे अस्पताल लेकर गए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। 

झाड़ फूंक नहीं, इलाज कराएं 

सर्प दंश का शिकार होने पर झाड़ फूंक न कराएं, बल्कि चिकित्सक से इलाज कराएं। सबसे पहले यह आश्वस्त हो लें कि जिस सांप ने डसा है, वह विष वाला है या विषहीन है। सांप अगर विषधर है तो, तत्काल अस्पताल में भर्ती कराएं और अगर सांप विषहीन है तो, अधिक घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन चिकित्सक से जांच करा लें और चिकित्सक के परामर्श का पालन करें। सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार की सुविधा है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर जिला अस्पताल तक में इसकी सुविधा उपलब्ध है। निजी चिकित्सालयों में भी सर्प दंश के उपचार की सुविधा है जिसके लिए राशि खर्च करनी होगी। 

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ शंभू नाथ सिंह ने बताया कि तीन तरह के सांप में विष पाया जाता हैं जिसमें करैत, कोबरा और वायपर शामिल हैं। सांप काटने पर सीधे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। झाड़-फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

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